ताज़ा खबर
 

Basant Panchami 2019: जानिए बसंत पंचमी की पूजा विधि और व्रत कथा

Basant Panchami Puja Vidhi: बसंत पंचमी यानि सरस्वती पूजा माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाई जाती है। साल 2019 में बसंत पंचमी 10 फरवरी, रविवार को मनाई जाएगी।

Author February 10, 2019 9:06 AM
देवी सरस्वती।

Basant Panchami Puja Vidhi, Vrat Katha and Vidhi in hindi: बसंत पंचमी विद्या और बुद्धि की देवी सरस्वती को समर्पित है। यह बिहार, झारखंड और बंगाल में मुख्य रूप से मनाया जाता है। बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा की जाती है। बसंत पंचमी यानि सरस्वती पूजा माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाई जाती है। साल 2019 में बसंत पंचमी 10 फरवरी, रविवार को मनाई जाएगी। शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार जानते हैं कि बसंत पंचमी की पूजा विधि क्या है? साथ ही बसंत पंचमी की व्रत कथा क्या है?

बसंत पंचमी पूजा विधि

  • बसंत पंचमी के दिन स्नान-ध्यान के बाद पीले, बसंती या सफेद वस्त्र धारण करें। ध्यान रखना है कि काले या लाल वस्त्र पहनकर माता की पूजा नहीं करनी चाहिए।
  • इसके बाद पूरब या उत्तर की ओर मुह कर पूजा प्रारंभ करें।
  • पूजा के लिए इस दिन सूर्योदय के बाद ढाई घंटे अथवा सूर्यास्त के बाद ढाई घंटे का ही प्रयोग करना चाहिए।
  • इस दिन पूजा में मां सरस्वती को सफेद या पीले पुष्प, सफेद चंदन आदि का अर्पण करें।
  • प्रसाद के रूप में दही, हलवा अथवा मिश्री का प्रयोग करें।
  • साथ ही केसर मिले हुए मिश्री का भोग लगाना सर्वोत्तम होगा।
  • माता सरस्वती का प्रभावशाली मंत्र “ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः” का जाप कम से कम 108 बार करें।
  • मंत्र के जाप के बाद ही प्रसाद ग्रहण करना चाहिए।

बसंत पंचमी व्रत कथा: वैसे तो बसंत पंचमी की कथा अनेक धार्मिक ग्रन्थों में वर्णित है। लेकिन सबसे अच्छी कथा का जो वर्णन शास्त्रों में मिलता है। वह इस प्रकर है। सृष्टि के आरंभ में त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने मनुष्य जाति का आवरण किया। लेकिन त्रिदेव अपनी इस सृजन से संतुष्ट नहीं हुए। त्रिदेव को लगता था की इसमें कुछ कमी रह गई है जिसके कारण पूरे ब्रह्माण्ड में शांति थी। भगवान विष्णु और शिव से अनुमति लेकर ब्रह्मा ने अपने कमंडल से जल के साथ वेदों का उच्चारण करते हुए पृथ्वी पर छिड़का, पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही उस स्थान पर कंपन होने लगा।

फिर उस स्थान पर स्थित वृक्ष से एक अद्भुत शक्ति का प्रादुर्भाव हुआ। यह प्रादुर्भाव एक चतुर्भुजी सुंदर सी स्त्री की थी, जिनकी एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ से तथास्तु मुद्रा को संबोधित कर रही थी। जबकि अन्य दोनों हाथो में पुस्तक और माला थी। त्रिदेव ने उनका अभिवादन किया और उनसे वीणा बजाने का अनुरोध किया। माता सरस्वती ने त्रिदेव का अभिवादन स्वीकार करते हुए जैसे ही वीणा का मधुरनाद किया, तीनों लोको के सभी जीव-जंतु और प्राणियों को वीणा की मधुरनाद प्राप्त हो गई। समस्त लोक वीणा के मधुरता में भाव-विभोर हो गए। मां की वीणा की मधुरता से समस्त लोक में चंचलता व्याप्त हो गई। इस कारण त्रिदेव ने मां को सरस्वती के नाम से संबोधित किया।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
1 Vasant Panchami 2019 Date: यहां जानिए बसंत पंचमी का इतिहास, इसलिए भारत में मनाई जाती है बसंत पंचमी
2 Vasant Panchami Puja 2019: ये है पूजा के लिए शुभ मुहूर्त और पूजन विधि
3 Vasant Panchami 2019: बसंत पंचमी पर क्यों होती है मां सरस्वती की पूजा? ये है महत्व