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बसंत पंचमी 2018: मां सरस्‍वती के ये 12 नाम, जाप से दूर हो सकती हैं बाधाएं

Basant Panchami 2018 Saraswati Puja: एक मान्यता के अनुसार जब पूरी सृष्टि मौन थी तब ब्रह्मा जी ने विष्णु जी की अनुमति लेकर अपने कमंडल के जल से सरस्वती की उत्पत्ति की। इसी के बाद इस सृष्टि को स्वर मिला।

सरस्वती जी।

बसंत पंचमी को मां सरस्वती की आराधना की जाती है। आज 22 जनवरी को देश भर में वसंत पंचमी को पर्व मनाया जा रहा है। एक मान्यता के अनुसार जब पूरी सृष्टि मौन थी तब ब्रह्मा जी ने विष्णु जी की अनुमति लेकर अपने कमंडल के जल से सरस्वती की उत्पत्ति की। इसी के बाद इस सृष्टि को स्वर मिला। तब से ही मां सरस्वती की पूजा की जाने लगी तथा बसंत पंचमी को उनका जन्मदिन मनाया जाने लगा। इस दिन पीले वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। शास्त्रों में मां सरस्वती के 12 नाम बताएं गए हैं। कहा जाता है इन नामों को नियमित रूप से ध्यान करने वाले इंसान की जिह्वा के अग्रभाग में मां सरस्वती का वास हो जाता है। ऐसा करने वाला व्यक्ति बहुत ज्ञानी हो जाता है तथा समाज में उसे मान-सम्मान मिलता है।

बसंत पंचमी 2018 पूजा शुभ मुहूर्त इस प्रकार है: बसंत पंचमी (सरस्वती पूजा) पूजा शुभ मुहूर्त 22 जनवरी 2018 को सुबह 07 बजकर 17 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक है। यानी कुल 5 घंटे 15 मिनट तक देवी सरस्‍वती की आराधना का शुभ मुहूर्त है।

आइए जानते हैं मां सरस्वती के 12 नाम –

प्रथम भारती नाम, द्वितीय च सरस्वती

तृतीय शारदा देवी, चतुर्थ हंसवाहिनी

पंचमम् जगतीख्याता, षष्ठम् वागीश्वरी तथा

सप्तमम् कुमुदीप्रोक्ता, अष्ठमम् ब्रह्मचारिणी

नवम् बुद्धिमाता च दशमम् वरदायिनी

एकादशम् चंद्रकांतिदाशां भुवनेशवरी

द्वादशेतानि नामानि त्रिसंध्य य: पठेनर:

जिह्वाग्रे वसते नित्यमं

ब्रह्मरूपा सरस्वती सरस्वती महाभागे

विद्येकमललोचने विद्यारूपा विशालाक्षि विद्या देहि नमोस्तुते”

मां सरस्वती की आराधना करते वक्‍त इस श्‍लोक का उच्‍चारण करना चाहिए:

ॐ श्री सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।।
कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्।
वह्निशुद्धां शुकाधानां वीणापुस्तकमधारिणीम्।।
रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्।
सुपूजितां सुरगणैब्रह्मविष्णुशिवादिभि:।।वन्दे भक्तया वन्दिता च मुनीन्द्रमनुमानवै:।

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