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Balaram jayanti 2020: 9 अगस्त को है बलराम जयंती, जानिये इस दिन कैसे करें श्रीकृष्ण के दाऊ बलराम की पूजा

Balaram Jayanti Puja Vidhi: मान्यता है कि त्रेता युग में भगवान राम के छोटे भाई लक्ष्मण शेषनाग का अवतार ही थे। इसी प्रकार द्वापर में जब भगवान विष्णु धरती पर श्री कृष्ण अवतार में आए तो शेषनाग भी यहां उनके बड़े भाई के रूप में अवतरित हुए।

balaram jayanti 2020, balaram jayanti puja vidhi, balaram jayanti pujan vidhi,हर साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि के दिन बलराम जयंती मनाई जाती है।

Balaram Jayanti 2020, Balaram Jayanti Puja Vidhi: बलराम जयंती 9 अगस्त को मनाई जाएगी। हर साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि के दिन बलराम जयंती मनाई जाती है। बलराम जयंती को हल छठ भी कहा जाता है। यहां हल का मतलब बलराम और छठ का मतलब षष्ठी तिथि से है। क्योंकि बलराम जी भगवान श्री कृष्ण से बड़े हैं। इसलिए श्री कृष्ण जन्माष्टमी से दो दिन पहले बलराम जयंती का उत्सव मनाया जाता है।

मान्यताओं के अनुसार बलराम जी को भगवान विष्णु के शेषनाग का अवतार माना जाता है। मान्यता है कि त्रेता युग में भगवान राम के छोटे भाई लक्ष्मण शेषनाग का अवतार ही थे। इसी प्रकार द्वापर में जब भगवान विष्णु धरती पर श्री कृष्ण अवतार में आए तो शेषनाग भी यहां उनके बड़े भाई के रूप में अवतरित हुए। शेषनाग कभी भी भगवान विष्णु के बिना नहीं रहते हैं। इसलिए वह प्रभु के हर अवतार के साथ स्वयं भी आते हैं। बलराम जयंती के दिन सौभाग्यवती स्त्रियां बलशाली पुत्र की कामना से व्रत रखती हैं। साथ ही भगवान बलराम से यह प्रार्थना की जाती है कि वो उन्हें अपने जैसा तेजस्वी पुत्र प्रदान करें।

बलराम जयंती पूजा विधि (Balaram Jayanti Puja Vidhi)

-हल छठ के दिन व्रती को सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए।
-स्वच्छ वस्त्र पहन कर, पूजन स्थल की सफाई करें।
-पूजन स्थल पर गंगाजल के छींटे मारकर उसे पवित्र करें।
-फिर भगवान श्री कृष्ण के साथ बलराम जी की प्रतिमा की तस्वीर लें। प्रतिमा को फूलों का हार पहनाएं। साथ ही दीप जलाएं।
-भगवान बलराम का शस्त्र उनका हल है। इसलिए पूजा में एक छोटा हल अवश्य बलराम जी के पास रखें।
-बलराम जी को नीले रंग के और भगवान श्री कृष्ण को पीले वस्त्र अर्पित करें।
-कृष्ण-बलराम स्तुति का पाठ करें। भगवान बलराम से सच्चे मन से प्रार्थना करें कि वह आपको बलशाली संतान प्रदान करें।
-फिर आरती कर पीले रंग की मिठाई का भोग लगाएं। साथ ही मिश्री और मक्खन का भोग भी रखें।
-ध्यान रखें कि इस दिन व्रती हल से जुते हुए अनाज और सब्जियों को न खाएं। साथ ही गाय के दूध का सेवन भी न करें। इस दिन तिन्नी का चावल खाकर व्रत रखें।
-पूजा हो जाने के बाद गरीब बच्चों में पीली मिठाई बांटे।

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