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Balaram Jayanti: जानें शेषनाग भगवान कृष्ण के बड़े भाई बनकर क्यूं धरती पर आए थे

माना जाता है कि कृष्ण के बड़े भाई के रूप में बलराम का जन्म भाद्रपद महीने में कृष्ण पक्ष की छठवी तिथि को हुआ था। जिस कारण इस दिन को उनकी जयंती के रूप में मनाया जाने लगा।

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Balaram Jayanti 2019: बलराम जिन्हें बलदाऊ या हलधर के नाम से भी जाना जाता है, श्री कृष्ण के बड़े भाई थे। पौराणिक कथाओं में इस बात का वर्णन है कि बलराम शेषनाग के अवतार थे। कहा जाता है कि धरती पर धर्म की स्थापना करने के लिए जब-जब श्री हरि ने अवतार लिया है तब-तब शेषनाग ने भी उनका साथ देने के लिए किसी न किसी रूप में जन्म लिया है। द्वापर युग में विष्णु के अवतार कृष्ण के बड़े भाई तो त्रेता युग में भगवान राम के छोटे भाई लक्ष्मण के रूप में इनका जन्म हुआ। माना जाता है कि कृष्ण के बड़े भाई के रूप में बलराम का जन्म भाद्रपद महीने में कृष्ण पक्ष की छठवी तिथि को हुआ था। जिस कारण इस दिन को उनकी जयंती के रूप में मनाया जाने लगा। साल 2019 में बलराम जयंती 21 अगस्त को पड़ रही है।

ये तो सब ही जानते हैं कि भगवान कृष्णा और राम, भगवान विष्णु का ही स्वरुप है, और बलराम और लक्ष्मण , शेषनाग का | त्रेता युग में जहां शेषनाग ने भगवान हरि के छोटे भाई के रूप में जन्म लिया था तो वहीं द्वापर युग में ये भगवान विष्णु के बड़े भाई बनें। इस युग में इनके बड़े भाई बनने के पीछे एक कहानी प्रचलित है, जिसके अनुसार एक बार भगवान विष्णु से शेष नाग नाराज हो गए और कहा की भगवान में आपके चरणों में रहता हूँ, मुझे थोड़ा सा भी विश्राम नहीं मिलता। आप कुछ ऐसा करिए जिससे कि मुझे विश्राम मिले। तब भगवान विष्णु ने शेषनाग को वरदान दिया कि द्वापर युग में आप मेरे बड़े भाई के रूप में जन्म लेंगे, तब मैं आपसे छोटा रहूंगा।

बलराम काफी शक्तिशाली थे। भगवान कृष्ण अपने बड़े भाई की हर बात मानते थे। बलराम के जन्म को लेकर कथा प्रचलित है कि बलराम मां देवकी के सातवें गर्भ थे, लेकिन देवकी की हर संतान को कंस जन्म लेते ही मार देता था। ऐसे में बलराम का बचना भी काफी मुश्किल था। माना जाता है कि देवकी और वासुदेव ने अपनी सातवीं संतान को सुरक्षित करने के लिए तप किया। जिस कारण देवकी का यह सातवां गर्भ वासुदेव की पहली पत्नी के गर्भ में चला गया था और देवकी के इस गर्भ के गिरने की खबर सारे में फैल गई।

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