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Bakra Eid 2017: भारत में 2 सितंबर को मनाई जाएगी बकरीद, जानिए- क्या है इस त्योहार का महत्व

Bakra Eid 2017, Bakrid Date in India: इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक ईद-उल-जुहा 12वें महीने धू अल-हिज्जा के दसवें दिन मनाई जाती है। ईद को इस्लाम धर्म में काफी अहम माना गया है।

Author Updated: August 31, 2017 10:27 AM
Bakra Eid 2017 Date: मस्जिद में नमाज पढ़ते दो बच्चे।(Photo Source: Indian Express Archive)

इस्लाम धर्म में ईद त्योहार का काफी महत्व है। हर साल दो ईद (ईद-उल-फितर और ईद-उल-जुहा) मनाई जाती है। अब 2 सितंबर को भारत में ईद-उल-जुहा (बकरीद) मनाई जाएगी। इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक ईद-उल-जुहा 12वें महीने धू अल-हिज्जा के दसवें दिन मनाई जाती है। ईद को इस्लाम धर्म में काफी अहम माना गया है। इसे कुर्बानी का पर्व कहा गया है। बकरीद के दिन अपनी किसी प्रिय चीज की अल्लाह के लिए कुर्बानी देनी होती है। हालांकि, अभी बकरे, भैंस या ऊंट की कुर्बानी देने की रिवाज है।

बकरीद के दिन मुस्लिम समुदाय के लोग बकरे की कुर्बानी देते हैं। कुर्बानी के लिए बकरे को अपने घर में पाला-पोसा जाता है और उसका पूरा ख्याल रखा जाता है। इसके बाद बकरीद के दिन उसकी कुर्बानी अल्लाह के नाम दे दी जाती है। कुर्बानी के गोश्त को तीन हिस्सों में बांटा जाता है। एक हिस्सा कुर्बानी करने वाले खुद के घर में रख लेते हैं और दो हिस्सें बांट देते हैं। कुर्बानी बकरीद की नमाज पढ़ने के बाद दी जाती है। कुर्बानी तीन दिन तक की जा सकती है। इस दिन मुस्लिम समुदाय के लोग नए कपड़े पहनकर मस्जिद में नमाज पढ़ने जाते हैं। वहां नमाज पढ़कर एक दूसरे के गले लगते हैं और ईद की बधाई देते हैं। नमाज पढ़कर वापस घर लौटने के बाद बकरे की कुर्बानी दी जाती है।

ईद के मौके पर जितना हो सके, उतना गरीबों को दान देने का भी विधान है। मुस्लिम संप्रदाय के लोग अपनी आय के मुताबिक जकात फितरा देते हैं। इसके अलावा बकरे का गोश्त भी गरीबों में बांटा जाता है। कहा जाता है कि इस्लाम में कहा गया है कि कोई भी त्योहार मनाते हुए यह ध्यान रखा जाना जरूरी है कि उनके पड़ोसी घर में भी उतनी ही खुशी के साथ मन रहा हो। कहा जाता है कि बकरीद को लेकर अल्लाह के आदेश है कि इस दिन आप अपनी सबसे प्रिय चीज को कुर्बान करें।

बकरीद से दो महीने पहले रमजान महीने में ईद-उल-फितर मनाई जाती है। रमजान महीना इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना है। इस्लामी कैलेंडर की शुरुआत मुहर्रम महीने से होती है और वहीं आखिरी महीना धु अल-हिज्जा होता है। बकरीद के बाद इस्लामी कैलेंडर के पहले महीने में मुहर्रम मनाई जाएगी।

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