हिंदू धर्म में बगलामुखी जंयती का विशेष महत्व है। यह बगलामुखी जयंती देवी शक्ति की दस महाविद्याओं में से एक मां बगलामुखी को समर्पित होती है। यह दिन विशेष रूप से वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन देवी बगलामुखी प्रकट हुई थीं और उन्होंने दुष्ट शक्तियों का नाश कर धर्म की रक्षा की थी।
मां बगलामुखी को पीताम्बरा देवी भी कहा जाता है, क्योंकि उन्हें पीला रंग अत्यंत प्रिय है। इस दिन भक्त पीले वस्त्र धारण करके विशेष पूजा, हवन और मंत्र जाप करते हैं, मान्यता है इस दिन पूजा करने से शत्रुओं पर विजय और आरोग्य की प्राप्ति होती है। आइए विस्तार से जानें बगलामुखी जयंती की तारीख और पूजा का मुहूर्त…
बगलामुखी जयंती 2026 कब है (kab hai Baglamukhi Jayanti 2026)
फ्यूचर पंचांग के मुताबिक वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 23 अप्रैल, गुरुवार के दिन रात में 8 बजकर 52 मिनट पर होगी। वहीं, अगले दिन यानी 24 अप्रैल, शुक्रवार के दिन शाम को 7 बजकर 21 मिनट तक अष्टमी तिथि व्याप्त रहेगी। इसके उपरांत नवमी तिथि का आरंभ हो जाएगा। ऐसे में उदया तिथि की गणना के अनुसार, 24 अप्रैल को ही बगलामुखी जयंती मनाई जाएगी।
बगलामुखी जयंती 2026 शुभ मुहूर्त
दिन का चौघड़िया
लाभ चौघड़िया : सुबह 7 बजकर 24 मिनट से 9 बजकर 2 मिनट तक
अमृत चौघड़िया : सुबह 9 बजकर 3 मिनट से 10 बजकर 42 मिनट तक
शुभ चौघड़िया : दोपहर के 12 बजकर 18 मिनट से 1 बजकर 58 मिनट तक
रात का चौघड़िया
प्रदोष काल : शाम को 6 बजकर 6 मिनट से लेकर 7 बजकर 38 मिनट तक
लाभ चौघड़िया : रात के 9 बजकर 37 मिनट से 10 बजकर 59 मिनट तक
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बगलामुखी जंयती का महत्व
इस दिन मां बगलामुखी की पूजा करने से शत्रु बाधाओं से मुक्ति और जीवन में विजय प्राप्त होने की मान्यता है। साथ ही इस दिन विधि-विधान से पूजा, हवन और मंत्र जाप करने से नकारात्मक शक्तियों, तंत्र-मंत्र और बुरी नजर का प्रभाव समाप्त होता है। मान्यता है कि देवी के इस रूप की आराधना करने से आरोग्य में वृद्धि होती है और शत्रुओं पर विजय प्राप्त हो सकती है।
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