आज हम दिव्य धाम की सीरीज में बात करने जा रहे हैं बद्रीनाथ मंदिर के बारे में, जो उत्तराखंड के चमोली जिले में अलकनंदा नदी के तट पर स्थित है। यह मंदिर हिंदू धर्म के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक माना जाता है और यह भगवान विष्णु को समर्पित है। मान्यता के अनुसार, यहां भगवान विष्णु ने कठोर तपस्या की थी और उस दौरान माता लक्ष्मी ने उन्हें ठंड से बचाने के लिए बद्री वृक्ष का रूप धारण किया, जिससे इस स्थान का नाम बद्रीनाथ पड़ा। वहीं बद्रीनाथ धाम में भगवान विष्णु का बद्रीनारायण स्वरूप समर्पित है। बद्रीनाथ धाम को संकद पुराण में बद्रीकाश्रम के नाम से जाना जाता है।
वहीं इस साल उत्तराखंड़ के चार धाम की यात्रा 19 अप्रैल से आरंभ होने जा रही है। वहीं 19 तारीख को गंगोत्री, यमनोत्री का कपाट खोले जाएंगे इसके बाद 23 अप्रैल को बद्रीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे।
पंच बद्री में शामिल है बद्रीनाथ मंदिर
वहीं इस धाम को उत्तराखंड की चार धाम यात्रा का प्रमुख और अंतिम पड़ाव माना जाता है और ऐसी मान्यता है कि यहां दर्शन करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है और उसके पापों का नाश होता है। मंदिर का धार्मिक महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इसे आदि शंकराचार्य ने दोबारा स्थापित किया था, जिससे यह सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र बन गया। वहीं बद्रीनाथ पंच बद्री मंदिरों का हिस्सा है, जिनमें योग ध्यान बद्री, भविष्य बद्री, आदि बद्री और वृद्ध बद्री शामिल हैं। बद्रीनाथ मंदिर भी इन्हीं मंदिरों का हिस्सा है।
कैसे पहुंचे बद्रीनाथ मंदिर
बद्रीनाथ धाम तक पहुंचने के लिए सबसे पास हवाई अड्डा जॉली ग्रांट एयरपोर्ट है, जहां से सड़क मार्ग द्वारा यात्रा की जाती है, जबकि रेल मार्ग से आने वाले यात्रियों के लिए ऋषिकेश रेलवे स्टेशन और हरिद्वार प्रमुख स्टेशन हैं। साथ ही सड़क मार्ग से ऋषिकेश, हरिद्वार और देहरादून से नियमित बस और टैक्सी सेवाएं उपलब्ध हैं, जिनके माध्यम से बद्रीनाथ पहुंचा जा सकता है। यात्रा का सबसे अच्छा समय मई से जून और सितंबर से अक्टूबर माना जाता है, क्योंकि सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण मंदिर बंद रहता है।
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