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600 साल बाद बदल रहा है बदरीनाथ धाम का छत्र, 3.5 किलो सोने का होगा छत्र

सोने के इस छत्र को नौ मई को विशेष हेलीकाप्टर के जरिए बदरीनाथ लाया जाएगा। इस ऐतिहासिक घटना का गवाह बनने के लिए देश-विदेश से कई उद्योगपति व साधु-संत बदरीनाथ पहुंच रहे हैं।

इस सोने के छत्र का वजन 3.5 किलोग्राम है।

उत्तराखंड में अलकनंदा नदी के किनारे बना बदरीनाथ मंदिर चार धामों में से एक है। यह मंदिर भगवान विष्णु के रूप बदरीनाथ को समर्पित है। इस साल 9 मई को बद्रीनाथ धाम में 600 साल पुराना विग्रह छत्र बदला जा रहा है। इस छत्र को लुधियाना के ‘मुक्त परिवार’ ने तैयार करवाया है। इसको बदलने की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है। इस छत्र का बदलने का शुभ मुहूर्त भी निकाला गया है। इसके लिए 9 मई को दोपहर 11.45 से 12.30 बजे तक का समय शुभ बताया गया है। छत्र बदलने के वक्त मंदिर के मुख्य पुजारी ईश्वरीप्रसाद नम्बूदरी व धर्माधिकारी भुवन उनियाल के साथ ही तमाम वेदपाठी मौजूद रहेंगे। इस ऐतिहासिक घटना का गवाह बनने के लिए देश-विदेश से कई उद्योगपति व साधु-संत बदरीनाथ पहुंच रहे हैं।

इस सोने के छत्र का वजन 3.5 किलोग्राम है। इस छत्र को मुक्त परिवार अपने दादा गुरु मुक्त जी की बदरीनाथ यात्रा के 100 वर्ष पूरे होने की खुशी में चढ़ा रहा है। मुक्त परिवार के दादा गुरु मुक्त जी ने वर्ष 1918 में बदरीनाथ धाम की यात्रा की थी। पिछले साल इस छत्र के लिए मंदिर प्रशासन से अनुमति मांगी गई थी। अनुमति मिलने के बाद इस छत्र को मथुरा में शुद्ध 24 कैरेट सोने से तैयार करवाया गया है।

सोने के इस छत्र को नौ मई को विशेष हेलीकाप्टर के जरिए बदरीनाथ लाया जाएगा। वर्तमान में जो छत्र भगवान बदरीनाथ के विग्रह के ऊपर मौजूद है, उसे मध्य प्रदेश की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने चढ़ाया था।

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