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विष्णु अवतार अत्तिवरदर की मूर्ति को 40 साल के लिए क्यों डाल दिया जाता है पानी में, यह है पौराणिक कहानी

48 दिन चलने वाला यह त्योहार इस वक्त काफी चर्चा है, क्योंकि कई हाई प्रोफाइल नेता कांचीपुरम पहुंचकर भगवान अत्तिवरदर के दर्शन कर चुके हैं।

Author चेन्नई | August 14, 2019 1:55 PM
अत्तिवरदर त्योहार के लिए कांचीपुरम में कई साल से मंदिर बनाया जा रहा था। फोटो सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस

तमिलनाडु का कांचीपुरम में एक ऐसा मंदिर है, जहां भगवान विष्णु के अवतार अत्तिवरदर की मूर्ति को पूरे 40 साल तक पानी में डुबोकर रखा जाता है। 40 साल बाद निकाली गई मूर्ति को महज 48 दिन तक दर्शन के लिए रखा जाता है। इस दौरान कांचीपुरम में रोजाना लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। 48 दिन बाद इस मूर्ति को अगले 40 साल के लिए जलमग्न कर दिया जाता है।  आखिर क्या वजह है इसकी, क्यों किसी भगवान की प्रतिमा को 40 साल तक पानी की टंकी में डुबोया जाता है।

यह है पौराणिक कहानी: जानकारों की मानें तो भगवान विष्णु के अवतार अत्तिवरदर की प्रतिमा का निर्माण खुद ब्रह्मा ने किया था। वैष्णव संप्रदाय के जानकार बताते हैं कि पुराणों में हस्तगिरी नाम के एक शहर का जिक्र किया गया है, जिसे अब कांचीपुरम कहा जाता है। जानकारों के मुताबिक, भगवान ब्रह्मा ने पृथ्वी लोक में भगवान विष्णु के दर्शन करने की इच्छा जाहिर की थी। भगवान विष्णु ने उन्हें हस्तगिरी यानी कांचीपुरम नाम के शहर अश्वमेघ यज्ञ करने के लिए कहा। बताया जाता है कि उसी यज्ञ के दौरान भगवान विष्णु ने अग्नि रूप में ब्रह्माजी को दर्शन दिए।

ऐसे बनाई गई थी मूर्ति: वैष्णव संप्रदाय के जानकार बताते हैं कि यज्ञ के बाद ब्रह्माजी की विनती पर विश्वकर्मा ने अंजीर (तमिल में अत्ति) की लकड़ी से 9 फीट की मूर्ति बनाई और कांचीपुरम में उसकी स्थापना कर दी।

पानी में मूर्ति रखने की यह है वजह: पौराणिक कथाओं के मुताबिक, ब्रह्माजी की यज्ञशाला से निकलने के बाद भगवान् विष्णु के शरीर में जलन होने लगी थी। ऐसे में यह तय किया गया कि उस वक्त भगवान विष्णु का अभिषेक 3 वक्त पानी के हजार कलशों से किया जाए या उन्हें मंदिर के सरोवर में जलमग्न किया जाए। इसके बाद भगवान विष्णु के अवतार को जलाशय में जलमग्न कर दिया गया।

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