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Astrology: कुंडली में मौजूद हों ये अशुभ योग तो मेहनत के बाद भी नहीं मिलती सफलता, जानिए

बताया जाता है कि कुंडली में राहु-केतु के बलवान होने से व्यक्ति को डिप्रेशन का शिकार भी होना पड़ सकता है। उस व्यक्ति के हर काम में बाधा आ जाती है।

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Kaal Sarp Dosh: काल सर्प दोष को अच्छा नहीं माना जाता है।

Kaal Sarp Dosh: जब किसी व्यक्ति की कुंडली में सभी ग्रह राहु और केतु के बीच में आ जाते हैं तो ज्योतिष शास्त्र इस योग को काल सर्प दोष का नाम दिया जाता है। जन्म-कुंडली में विविध लग्नों व राशियों में स्थित ग्रह के भाव के आधार पर ही इस योग के अच्छे या बुरा होने का पता चलता है। कई लोगों के लिए काल सर्प योग वरदान साबित होता है।

ज्योतिष शास्त्र में इस योग को शुभ फल देने वाला नहीं माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि जिस व्यक्ति की कुंडली में यह दोष लग जाता है उसे सफलता बहुत देरी से मिलती है। ऐसे व्यक्ति को हर काम में बाधा का सामना करना पड़ता है। कहते हैं कि ऐसा व्यक्ति जैसे ही सफलता को अपनी ओर आते देखता है वैसे ही सफलता उससे दूर होनी शुरू हो जाती है। आइये जानते हैं क्या होता है कालसर्प और इसे दूर करने के उपाय-

कैसे बनता है काल सर्प दोष? जब कुंडली में राहु और केतु एक तरफ मौजूद होते हैं और बाकी सभी ग्रह इनके बीच में हों स्थित हों तब कालसर्प योग या दोष बनता है। किसी भी व्यक्ति की कुंडली में काल सर्प दोष लगने की वजह राहु-केतु हैं।जिस भी व्यक्ति की कुंडली में यह चारों ओर से ग्रहों को घेर कर बैठ जाते हैं उसे मानसिक अशांति, रोग, दोष, जादू-टोना और हड्डियों के रोगों को झेलना पड़ता है। इन लोगों को सफलता पाने में देरी लगती है। काल सर्प योग 12 प्रकार के होते हैं जिनका अलग-अलग प्रभाव होता है। कई लोगों के जीवन में इस योग की वजह से अशांति मची रहती है।

कलसर्प दोष का प्रभाव ऐसे करें कम: कुंडली में कालसर्प दोष है तो पीड़ित व्यक्ति को भगवान शिव, राहु-केतु और कर्कोटक आदि की आराधना करनी चाहिए। बताया जाता है कि इनकी उपासना और मंत्र जाप से इस दोष के प्रभाव को कम किया जा सकता है। इसके अलावा राहु और केतु ग्रहों की शांति के उपाय करें। काल सर्प दोष निवारण यंत्र की पूजा करनी चाहिए। आप सर्प मंत्र और सर्प गायत्री मंत्र का जाप भी कर सकते हैं। आप चाहें तो काल सर्प निवारण पूजा भी करवा सकते हैं। इसके साथ ही इस मंत्र का जाप करने से भी लाभ मिलता है- ॐ नवकुलाय विद्यमहे विषदंताय धीमहि तन्नो सर्प: प्रचोदयात्।

काल सर्प इनके लिए भाग्यशाली: कुण्डली में जब राहु अपनी उच्च राशि वृष या मिथुन में होता है तो ऐसे लोग राहु की दशा में खूब सफलता पाते हैं। कालसर्प योग वाले व्यक्ति की कुंडली में जब गुरू और चन्द्र एक दूसरे से केन्द्र में हों अथवा साथ बैठें हों तो ऐसा व्यक्ति भी निरंतर उन्नति करते हैं।

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