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कुंडली में हो देव गुरु बृहस्पति मजबूत तो नहीं आती है वैवाहिक जीवन में परेशानी

कुंडली में बृहस्पति मजबूत या प्रभावशाली है तो व्यक्ति धार्मिक और ज्ञानी माना जाता है।

प्रबल बृहस्पति वाले लोग धार्मिक और अपना काम निष्ठा से करने वाले होते हैं।

देव गुरु बृहस्पति की ज्योतिष में एक महत्वपूर्ण भूमिका है और बृहस्पति की हमारे जीवन में क्या भूमिका है। बृहस्पति देव हमारे जीवन को प्रभावित करते हैं और जीवन में कैसे बृहस्पति को प्रसन्न रखा जा सकता है। नवग्रहों में बृहस्पति को सबसे बड़ा ग्रह और साथ ही सबसे प्रभावशाली ग्रह माना जाता है। इसी कारण से बृहस्पति को गुरु कहा जाता है। बृहस्पति ग्रह आकाश तत्व का स्वामी माना जाता है। धनु और मीन राशि का स्वामी ग्रह माना जाता है। इसके साथ ही कर्क राशि में मजबूत माना जाता है और इसका अधिकार मकर राशि में कमजोर होता है। अगर आपकी कुंडली में बृहस्पति मजबूत या प्रभावशाली है तो आप धार्मिक और ज्ञानी माने जाते हैं। जिन जातकों की कुंडली में बृहस्पति मजबूत होता है वो दूसरों को समझाने का काम अच्छा करते हैं।

प्रबल बृहस्पति वाले लोग धार्मिक और अपना काम निष्ठा से करने वाले होते हैं। वे हमेशा धर्म के मार्ग पर चलते हैं। ये लोग दूसरों की समस्याओं को समझ कर उसे सुलझाते हैं। इसके साथ ही जिन लोगों की कुंडली में बृहस्पति बिल्कुल कमजोर हो जाता है वो लोग सात्विक नहीं होते हैं और षडयंत्रकारी और अधर्मी बनाता है। इस तरह के लोग देव-देवताओं में भी भरोसा नहीं करते हैं। ये लोग पैसे के प्रति हमेशा झुके रहते हैं। इसके साथ ही बृहस्पति खराब लोग अपने से बड़े लोगों का अपमान करते हैं जिसके कारण उनका पतन होना शुरु हो जाता है। किसी पुरुष जातक की कुंडली में बृहस्पति खराब होता है तो वो उस पुरुष के वैवाहिक जीवन पर बुरा असर डालता है और उसे जीवन भर कष्ट भोगना पड़ेगा।

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किसी महिला के जीवन में बृहस्पति का प्रकोप है तो उस महिला के विवाह में अनेकों अड़चने आने लगती हैं या अगर विवाह हो गया है तो उसका जीवन बहुत ही दुखदायी होता है। बृहस्पति खराब होने से गंभीर बिमारियां होने लगती हैं जो लंबे समय तक रहती हैं। इसके साथ ही ऐसे लोगों में मोटापा भी बढ़ने लगता है। इसकी जगह अगर बृहस्पति मजबूत हो तो वो किसी भी ग्रह के बुरे प्रभावों को भारी नहीं होने देता है। खराब बृहस्पति को ठीक करने के लिए जितना हो सके बड़ों का सम्मान करना चाहिए। इसके साथ ही किसी गुरु की शरण में जाना भी उचित रहता है। यदि कोई गुरु ना हो तो भगवान शिव की उपासना करनी चाहिए। गायत्री मंत्र का जाप करना सबसे शुभ रहता है।

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