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नियमानुसार करेंगे मंत्रों का जाप तभी मिलेगा लाभ, जानें क्या हैं नियम

मंत्र हमें शुद्ध मन देते हैं, इनका जाप करते समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना जरुरी होता है।

मंत्र शब्दों की विशेष प्रकार की रचना होती है।

मंत्र कुछ विशेष प्रकार के शब्दों की एक संरचना है, इनका विधिपूर्वक जाप करने से सृष्टी की उपलब्धियां प्राप्त की जा सकती है। सिद्ध मंत्रों के जाप से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। मंत्र वास्तव में दो शब्दों के ही होते हैं, जिनका श्वास-प्रश्वास पर जाप किया जा सके।
बाकी जिनको हम मंत्र समझते हैं वो या तो ऋचाएं हैं या श्लोक, बीज मंत्र के साथ प्रयोग करने पर ऋचाएं और श्लोक भी लाभकारी होते हैं। मंत्र दो तरह के होते है, एक मंत्र वो हैं जिनका कोई भी जाप कर सकता है, दूसरे वो मंत्र है जो केवल व्यक्ति विशेष के लिए होते हैं।

कैसे काम करते हैं मंत्र- हर शब्द के अंदर एक रंग और विशेष तंरग होती है, इसी प्रकार से हर व्यक्ति का भी रंग और तरंग होती है। जब ये शब्द सही तरीके से व्यक्ति के रंग और तरंग से मेल खा जाते हैं तो काम करना शुरू कर देते हैं। सबसे पहले मंत्र शरीर पर, फिर मन और तब आत्मा पर असर डालते हैं, इनका असर शरीर में स्थित चक्रों के माध्यम से होता है।

मंत्रों के लाभ और नुकसान- मंत्र में जिन शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है उसमें विशेष रंग और तरंग होती है। जब शरीर के साथ रंग और तरंग का तालमेल बैठता है तभी मंत्र लाभ करते हैं, तालमेल नहीं बैठता तो इनका जाप नुकसान कर सकता है। कभी भी किसी मंत्र का प्रयोग बुरी भावना से ना करें। क्रिया-प्रतिक्रिया का नियम खुद को ही बुरी तरह से नुकसान करता है।

मंत्र जाप करने के नियम और सावधानियां- मंत्र जाप के लिए स्थान, समय और आसन एक ही होना चाहिए। इसकी शुरूआत किसी भी पूर्णिमा या अमावस्या से करें। बैठना का आसान सफेद या काले रंग का हो तो उत्तम होता है। जप करने के लिए चंदन या रुद्राक्ष की माला का प्रयोग करें। मंत्र जाप के बाद कम से कम 15 मिनट जल स्पर्श ना करें। मंत्र जाप किसी भी अवस्था में कर सकते हैं। इसके लिए शरीर का स्वच्छ होना जरुरी है।

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