ताज़ा खबर
 

इंदौर के इस मंदिर में स्थापित है एशिया के सबसे ऊंची प्रतिमा, जानें क्या है बड़ा गणपति मंदिर का महत्व

साल में चार बार बड़ा गणपति मंदिर में चढ़ाए जाने वाले चोले में 25 किलोग्राम सिंदूर और 15 किलोग्राम घी का मिश्रण होता है।

इस भव्य प्रतीमा का निर्माण 1901 को पूरा हुआ था।

मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में भगवान गणेश का एक ऐसा प्रमुख मंदिर स्थित है। इस मंदिर की विशेषता यहां एशिया की सबसे बड़ी प्रतीमा स्थापित है। माना जाता है भगवान गणेश की ये प्रतीमा एशिया की सबसे बड़ी प्रतीमा है। गणेश जी की बैठी मुद्रा की ऊंचाई 25 फुट है। प्रतीमा 4 फुट ऊंचे और 14 फुट चौड़ी चौकी पर विराजित है। इस भव्य प्रतीमा का निर्माण 1901 को पूरा हुआ था। 1954 में मंदिर के लिए पक्की छत का निर्माण हुआ उससे पहले टीन की छत के नीचे ही मूर्ति स्थापित थी।

इस मंदिर में गणेश जी के श्रृंगार में करीब 8 दिनों का समय लगता है। साल में चार बार गणेश जी को चोला चढ़ाया जाता है। भाद्रपद सुदी चतुर्थी, कार्तिक बदी चतुर्थी, माघ बदी चतुर्थी और बैसाख बदी चतुर्थी के दिन चोला और सुंदर वस्त्रों से गणेश जी का श्रृंगार किया जाता है। इस आलौकिक प्रतिमा के दर्शन करने के लिए हर दिन श्रद्धालु आते हैं लेकिन गणेश उत्सव पर यहां भक्तों की संख्या हजारों हो जाती है। माना जाता है कि इस मंदिर में दर्शन करने से भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं।

इस मंदिर में स्थापित प्रतिमा के लिए माना जाता है कि इसे बनाने के लिए तीर्थ स्थानों का जल, काशी, अयोध्या, अवंतिका और मथुरा की मिट्टी के साथ घुड़साल, हाथीखाना, गौशाला की मिट्टी और रत्नों में हीरा, पन्ना, पुखराज, मोती के साथ ईट, बालू के साथ मेथी के दानों का भी इस्तेमाल किया गया था। माना जाता है कि इस मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद 13 साल तक भगवान गणेश खुले आसमान के नीचे विराजित रहे। साल में चार बार चढ़ाए जाने वाले चोले में 25 किलोग्राम सिंदूर और 15 किलोग्राम घी का मिश्रण होता है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App