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अष्टलक्ष्मी कुबेर मंत्र के जाप से धन प्राप्ति होने की है मान्यता, जानिए जाप की सही विधि

Ashtalakshmi Kubera Mantra: बताया जाता है कि जो लोग माता महालक्ष्मी और श्री कुबेर को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं उन्हें जीवनभर किसी चीज की कमी नहीं रहती है।

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माता महालक्ष्मी और श्री कुबेर को धन के देवी-देवता माना जाता हैं।

Ashtalakshmi Kubera Mantra: शास्त्रों में यह वर्णन है कि धन की अधिष्ठात्री देवी माता महालक्ष्मी हैं, जबकि धन के देवता श्री कुबेर हैं। ऐसी मान्यता है कि जिन लोगों पर माता महालक्ष्मी और श्री कुबेर की कृपा बरसती है उन्हें अपार धन-संपत्ति की प्राप्ति होती है। कहते हैं कि धन के देवी-देवताओं को मनाने से उनकी कृपा प्राप्त होने के साथ ही धन-धान्य की प्राप्ति होती है।

बताया जाता है कि जो लोग माता महालक्ष्मी और श्री कुबेर को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं उन्हें जीवनभर किसी चीज की कमी नहीं रहती है। मान्यता है कि दिन ढलते समय यानी सूर्योस्त होने के दौरान अगर कोई व्यक्ति माता महालक्ष्मी और श्री कुबेर की आराधना करता है तो उसके घर बहुत जल्द धन आगमन हो सकता है।

अष्टलक्ष्मी कुबेर मंत्र जाप विधि (Ashtalakshmi Kubera Mantra Jaap Vidhi)
इस मंत्र का जाप करने के लिए स्नान कर पवित्र हो जाएं।
फिर एक चौकी लें। उस पर लाल रंग का कपड़ा बिछाकर गंगाजल की छींटे मारें।
स्थान पवित्र करने के बाद चौकी पर माता महालक्ष्मी और श्री कुबेर की प्रतिमा या फोटो स्थापित करें।
फिर उनके समक्ष घी का दीपक, धूप और अगरबत्ती जलाएं।

प्रतिमा पर लाल कुमकुम का तिलक करें।
अब लाल पुष्पों का हार चढ़ाकर लक्ष्मी माता और कुबेर जी के रूप का ध्यान करें।
फिर लाल रंग के आसन पर बैठकर हाथ जोड़े और 108 मनकों की एक माला दाहिनें हाथ में लेकर जाप शुरू करें।
संभव हो तो कमलगट्टे की माला से जाप करें अन्यथा किसी भी माला से जाप किया जा सकता है।

अब अष्टलक्ष्मी कुबेर मंत्र (Ashtalakshmi Kubera Mantra) का श्रद्धापूर्वक जाप करें।
‘ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं कुबेराय अष्ट-लक्ष्मी मम गृहे धनं पुरय पुरय नमः॥’

ध्यान रखें कि इस मंत्र की 5, 7, 11, 21, 31, 51 या 101 माला ही करें।
जाप पूरा होने पर हाथ जोड़कर ईश्वर से प्रार्थना करें कि वह आपकी जिंदगी से सभी आर्थिक संकटों को दूर कर आपको और आपके परिवार को आर्थिक रूप से संपन्न बनाएं।
फिर माता महालक्ष्मी और श्री कुबेर की परिवार सहित आरती करें।
इसके बाद उन्हें किसी भी मौसमी फल, मिठाई या खीर का भोग लगाएं। अंत में उन्हें दण्डवत प्रणाम करें।

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