Ashadh Amavasya Kab Hai : आषाढ़ अमावस्या हिंदू धर्म में बेहद पवित्र और पुण्यदायी मानी जाती है। यह तिथि पितरों के तर्पण, पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य के लिए विशेष होती है। साथ ही इस दिन भगवान शिव और भगवान विष्णु की आराधना की जाती है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक किए गए स्नान, दान और पितृ तर्पण से पितरों की कृपा प्राप्त होती है। साथ ही जीवन के अनेक कष्ट दूर होते हैं। आपको बता दें कि साल 2026 में आषाढ़ अमावस्या 14 जुलाई को मनाई जाएगी। इस दिन किए गए धार्मिक कार्यों का कई गुना अधिक शुभ फल प्राप्त होता है। आइए जानते हैं तिथि और दान- स्नान का शुभ मुहूर्त…
आषाढ़ अमावस्या तिथि (Ashadh Amavasya Kab Hai)
द्रिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ अमावस्या की तिथि 13 जुलाई को शाम 6 बजकर 51 मिनट पर शुरू होगी और तिथि का 14 जुलाई को दोपहर 3 बजकर 13 मिनट पर होगा।
आषाढ़ अमावस्या शुभ मुहूर्त (Ashadh Amavasya 2026 Shubh Muhurat)
इस दिन स्नान व दान का मुहूर्त सुबह 4 बजकर 30 मिनट से शुरू होगा और सुबह 5 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। इस बीच में आप दान- स्नान और तर्पण कर सकते हैं।
आषाढ़ अमावस्या का महत्व
सनातन परंपरा में आषाढ़ अमावस्या को दान करने और पितृ तृप्ति का विशेष अवसर माना गया है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर सूर्यदेव को अर्घ्य देना, पितरों का तर्पण करना और अन्न, वस्त्र, तिल, जल तथा धन का दान करना बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे पितृ दोष शांत होता है, परिवार में सुख-समृद्धि आती है। साथ ही नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कम होता है। साथ ही भगवान शिव, विष्णु और पीपल के वृक्ष की पूजा करने से मनोकामनाओं की पूर्ति, मानसिक शांति और जीवन में सकारात्मकता आती है। इसलिए आषाढ़ अमावस्या को श्रद्धा, सेवा और दान का पर्व भी कहा जाता है।
डिसक्लेमर- यह लेख पूरी तरह से ज्योतिषीय गणनाओं और मान्यताओं पर आधारित है। जनसत्ता इसकी सत्यता या इससे होने वाले किसी भी लाभ-हानि की पुष्टि नहीं करता है। अधिक जानकारी के लिए पंचांग, शास्त्र या फिर किसी पंडित से अवश्य जानकारी लें।
