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Apara Ekadashi 2020: जानिए कब रखा जायेगा अपरा एकादशी व्रत और क्या है इसका महत्व

Apara Ekadashi 2020: इस व्रत के नियमों का पालन दशमी तिथि से किया जाता है। व्रत के एक दिन पहले यानी दशमी को सूर्यास्त के बाद भोजन नहीं करना चाहिए और रात में भगवान का स्मरण करके सोना चाहिए।

Apara Ekadashi 2020, Apara Ekadashi katha, Apara Ekadashi mehatva, Apara Ekadashi importance, Apara Ekadashi significance, Apara Ekadashi puja vidhi,एकादशी व्रत के दिन विष्णुसहस्रनाम का पाठ करना काफी उत्तम माना गया है।

ऐसी मान्यता है, अपरा एकादशी व्रत रखने से स्वर्ग लोक की प्राप्ति होती है। वैसे तो हर माह में एकादशी व्रत आते हैं लेकिन ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली इस एकादशी का विशेष महत्व माना गया है। जो इस साल 18 मई को मनाई जायेगी। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से सुखमय जीवन प्राप्त होता है। साथ ही इस एकादशी व्रत को करने से धन की देवी मां लक्ष्मी भी प्रसन्न हो जाती हैं। जानिए अपरा एकादशी व्रत की पूजा विधि और महत्व…

महत्व: पौराणिक कथा के अनुसार, महीध्वज नामक एक धर्मात्मा राजा था। उसका छोटा भाई वज्रध्वज बड़े भाई से द्वेष रखता था। एक दिन अवसर पाकर इसने राजा यानी अपने बड़े भाई की हत्या कर दी और उसकी लाश को जंगल में एक पीपल के पेड़ के नीचे गाड़ दिया। अकाल मृत्यु होने के कारण राजा की आत्मा प्रेत बनकर पीपल पर रहने लगी और मार्ग से गुजरने वाले हर व्यक्ति को ये आत्मा परेशान करने लगी।
एक दिन धौम्य नामक ॠषि इस रास्ते से गुजर रहे थे। इन्होंने प्रेत को देखा और अपने तपोबल से उसके प्रेत बनने का कारण जाना। ऋषि ने पीपल के पेड़ से राजा की प्रेतात्मा को नीचे उतारा और उसे परलोक विद्या का उपदेश दिया। दयालु ऋषि ने राजा को प्रेत योनि से मुक्ति दिलाने के लिए अपरा एकादशी का व्रत रखा और व्रत पूरा होने पर उस व्रत का पुण्य प्रेत को दे दिया। एकादशी व्रत का पुण्य प्राप्त करके राजा प्रेत योनि से मुक्त हो गया और स्वर्ग चला गया।

पूजा विधि: इस व्रत के नियमों का पालन दशमी तिथि से किया जाता है। व्रत के एक दिन पहले यानी दशमी को सूर्यास्त के बाद भोजन नहीं करना चाहिए और रात में भगवान का स्मरण करके सोना चाहिए। फिर एकादशी के दिन प्रातः उठकर स्नान करने के बाद भगवान विष्णु की अराधना करनी चाहिए। पूजा में श्रीखंड चंदन, तुलसी पत्ता, गंगाजल एवं मौसमी फलों को प्रसाद के रूप में चढ़ाएं। व्रत रखने वालों को इस दिन गलत विचार अपने मन में नहीं लाने चाहिए। इस दिन विष्णुसहस्रनाम का पाठ करना काफी उत्तम माना गया है।

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