Anant Chaturdashi 2026 Date: पंचांग के अनुसार, प्रतिवर्ष भाद्रपद में शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को अनंत चतुर्दशी का पर्व मनाया जाता है। इसे अनंत चौदस भी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी के साथ शेषनाग की पूजा की जाती है। इसके साथ ही गणेश उत्सव का समापन होता है। इस दिन गणपति का विसर्जन किया जाता हैं। इसके अलावा इस दिन अनंत सूत्र बांधने की परंपरा है। इस दिन विष्णु जी को ये धागा अर्पित करने के साथ अपनी बांह में बाधा जाता है, जिसमें 14 गांठ होती है। बता दें कि इस साल अनंत चतुर्दशी तिथि 25 सितंबर 2026 को है। आइए जानते हैं अनंत चतुर्दशी की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, गणेश विसर्जन का समय सहित अन्य जानकारी..
अनंत चतुर्दशी 2026 कब? (Anant Chaturdashi 2026 Date)
द्रिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर की रात 11 बजकर 18 मिनट से आरंभ हो रही हैं, जो 25 सितंबर की रात 11 बजकर 08 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में उदया तिथि के हिसाब से अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर 2026 को है। इसी दिन गणेश विसर्जन भी किया जाएगा।
अनंत चतुर्दशी 2026 पूजा मुहूर्त (Anant Chaturdashi 2026 Shubh Muhurat)
पंचांग के अनुसार, अनंत चतुर्दशी का शुभ मुहूर्त 25 सितंबर को सुबह 6:11 बजे से 11:06 बजे तक है।
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:35 से 5:23 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:48 से दोपहर 12:37 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 2:13 से 3:01 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:14 से 6:38 बजे तक
रवि योग: सुबह 6:11 से 11:22 बजे तक
अनंत चतुर्दशी को गणेश विसर्जन (Anant Chaturdashi 2026 Ganesh Vishrjan)
शास्त्रों के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि यानी अनंत चतुर्दशी गणेश उत्सव का आखिरी दिन है। 10 दिनों तक चलने वाला गणेश उत्सव इस दिन गणेश विसर्जन के साथ समाप्त हो जाता है।
गणेश विसर्जन के लिए शुभ चौघड़िया मुहूर्त 25 सितंबर 2026
प्रातः मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत) – 06:11 ए एम से 10:42 ए एम
अपराह्न मुहूर्त (चर) – 04:44 पी एम से 06:14 पी एम
अपराह्न मुहूर्त (शुभ) – 12:13 पी एम से 01:43 पी एम
रात्रि मुहूर्त (लाभ) – 09:14 पी एम से 10:43 पी एम
रात्रि मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर) – 12:13 ए एम से 04:42 ए एम, सितम्बर 26
अनंत चतुर्दशी 2026 महत्व (Anant Chaturdashi 2026 Significance)
हिंदू धर्म में अनंत चतुर्दशी का विशेष महत्व है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अनंत चतुर्दशी की आरंभ महाभारत काल से माना जाता है। इसके साथ ही भगवान ने सृष्टि के आरंभ में चौदह लोकों तल, अतल, वितल, सुतल, तलातल, रसातल, पाताल, भू, भुवः, स्वः, जन, तप, सत्य, मह की रचना की थी। इसके साथ ही उनकी रक्षा करने के लिए चौदह रूपों में प्रकट हुए थे, जिससे वह अनंत नजर आने लगे थे। इसी के कारण अनंत चतुर्दशी तिथि को 14 गांठों वाला अनंत धागा बांह में बाधा जाता है, जो 14 लोकों को प्रदर्शित करता है। इस दिन विष्णु जी को अनंत धागा अर्पित करने के साथ विधिवत पूजा करने से अनंत फलों की प्राप्ति हो सकती है। सुख-समृद्धि, धन-संपदा की प्राप्ति हो सकती है।
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