आज दिव्य धाम की सीरीज में हम बात करने जा रहे हैं अंबाजी मंदिर के बारे में, जो गुजरात प्रदेश के बनासकांठा जिले में अरावली की पहाड़ियों पर स्थित एक प्रमुख तीर्थस्थल है, यहां माता की मूर्ति नहीं बल्कि दिव्य श्री विसा यंत्र (श्रीयंत्र) की पूजा होती है आपको बता दें कि यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में प्रमुख माना जाता है। मान्यता है कि यहां माता सती का हृदय गिरा था। यही वजह है कि हर साल लाखों श्रद्धालु अंबाजी धाम पहुंचकर मां अंबा का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

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अंबाजी मंदिर का इतिहास

अंबाजी मंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन माना जाता है। विद्वानों के अनुसार यहां देवी की आराधना प्राचीन काल से होती आ रही है। अरावली पर्वतमाला की गोद में स्थित यह धाम सदियों से शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र रहा है। मंदिर का वर्तमान स्वरूप समय-समय पर विभिन्न शासकों और श्रद्धालुओं के सहयोग से इस मंदिर का निर्माण हुआ है। नवरात्रि और भाद्रवी पूर्णिमा के अवसर पर यहां विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें देशभर से लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं।

अंबाजी मंदिर का धार्मिक महत्व

अंबाजी मंदिर को भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान शिव जब माता सती के शरीर को लेकर तांडव कर रहे थे, तब भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से सती के अंग विभिन्न स्थानों पर गिरे। अंबाजी वह स्थान माना जाता है जहां माता का हृदय गिरा था। इस कारण इसे अत्यंत पवित्र शक्तिस्थल माना जाता है। मंदिर के गर्भगृह में किसी प्रकार की प्रतिमा नहीं है, बल्कि पवित्र श्री विसा यंत्र की पूजा की जाती है, जिसके दर्शन विशेष नियमों के तहत किए जाते हैं।

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गब्बर पर्वत का महत्व

अंबाजी यात्रा को गब्बर पर्वत के दर्शन के बिना अधूरा माना जाता है। मान्यता है कि माता सती का हृदय गब्बर पर्वत पर गिरा था। यहां माता के चरणचिह्न और अखंड ज्योति के दर्शन के लिए श्रद्धालु सीढ़ियों या रोपवे के माध्यम से पहुंचते हैं।

अंबाजी मंदिर कैसे पहुंचे?

अंबाजी मंदिर का सबसे पास रेलवे स्टेशन आबू रोड है, जो मंदिर से लगभग 20–22 किलोमीटर दूर है। आबू रोड रेलवे स्टेशन से टैक्सी, ऑटो और बस की सुविधा आसानी से उपलब्ध हो जाती है। यहां से दिल्ली, मुंबई, जयपुर, अहमदाबाद, पुणे और कई प्रमुख शहरों के लिए सीधी ट्रेनें मिलती हैं। अंबाजी का पास प्रमुख हवाई अड्डा अहमदाबाद का सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है। यहां से सड़क मार्ग द्वारा लगभग 175–180 किलोमीटर की यात्रा कर मंदिर पहुंचा जा सकता है।

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डिसक्लेमर- यह लेख धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं और उपलब्ध ऐतिहासिक जानकारी पर आधारित है। मंदिर से जुड़ी मान्यताओं पर आस्था व्यक्ति विशेष की हो सकती है। यात्रा से पहले स्थानीय प्रशासन या आधिकारिक स्रोतों से समय और व्यवस्थाओं की जानकारी अवश्य प्राप्त करें।