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Amalaki Ekadashi 2019: मोक्ष प्राप्ति के लिए किया जाता है आमलकी एकादशी का व्रत, जानिए पूजा-विधि और व्रत-कथा

Amalaki Ekadashi 2019: ब्रह्मा जी की आंसू भगवान विष्णु की चरणों में गिरने लगे। ब्रह्मा जी की इस भक्ति-भाव को देखकर भगवान विष्णु प्रसन्न हुए। फिर ब्रह्मा जी की आंसुओं से आमलकी यानि आंवले की उत्पत्ति हुई।

Author नई दिल्ली | March 15, 2019 1:58 PM
भगवान विष्णु।

आमलकी एकादशी को मोक्ष प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। देवी भागवत पुराण के अनुसार इस एकादशी का महत्व अक्षय नवमी के बराबर है। साल 2019 में आमलकी एकादशी यानि 17 मार्च, रविवार को मनाई जाएगी। कहते हैं कि जो मनुष्य इस एकादशी व्रत को विधि पूर्वक करता है उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

इस व्रत में मुख्यतौर पर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। साथ ही इस एकादशी में भगवान विष्णु के अलावा आंवाले के पेड़ की भी पूजा होती है। यही कारण है कि फाल्गुन शुक्ल एकादशी को आमलकी एकादशी के नाम से जाना जाता है। आगे जानते हैं आमलकी एकादशी की व्रत-कथा और पूजा-विधि।

व्रत कथा: आमलकी एकादशी का वर्णन कई पुराणों में मिलता है। पौराणिक कथा के अनुसार इसी दिन सृष्टि के आरंभ काल में आंवले के वृक्ष की उत्पत्ति हुई थी। आंवले की उत्पत्ति के विषय में एक कथा आती है कि ब्रह्मा जी जब विष्णु जी के नाभि कमल से उत्पन्न हुए थे, तब उन्हें जिज्ञासा हुई कि उनकी उत्पत्ति कैसे हुई है। इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए ब्रह्मा जी तपस्या में लीन हो गए। ब्रह्मा की तपस्या के प्रसन्न होकर भगवान विष्णु प्रकट हुए।

भगवान विष्णु को सामने देकर ब्रह्मा जी खुशी से रोने लगे। ब्रह्मा जी की आंसू भगवान विष्णु की चरणों में गिरने लगे। ब्रह्मा जी की इस भक्ति-भाव को देखकर भगवान विष्णु प्रसन्न हुए। फिर ब्रह्मा जी की आंसुओं से आमलकी यानि आंवले की उत्पत्ति हुई। अर्थात् आंवले के पेड़ की उत्पत्ति हुई। शास्त्रों के अनुसार आमलकी एकादशी के दिन व्रत-उपवास के नियमों का पालन करना चाहिए। इसके अलावा इस दिन आंवले के वृक्ष को लगाना शुभफलदायक होता है। इस दिन आंवले के पौधे को लगाने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

पूजा-विधि: एकादशी के दिन प्रातः स्नानादि से निवृत होकर भगवान विष्णु और आंवले के वृक्ष की पूजा करें। अगर आंवले का वृक्ष उपलब्ध नहीं हो तो आंवले का फल भगवान विष्णु को प्रसाद स्वरूप अर्पित करें। घी का दीपक जलकार विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। जो लोग व्रत नहीं करते हैं वह भी इस एकादशी के दिन भगवान विष्णु को आंवला अर्पित करें और स्वयं खाएं भी। इस दिन आंवले का सेवन अवश्य करना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार आमलकी एकादशी के दिन आंवले का सेवन भी पाप का नाश करता है।

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