Kab Hai, Puja Vidhi Shubh Muhurat, Katha, Mantra, Aarti, Upay LIVE Updates: हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया का अत्यंत विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्य के लिए पंचांग या मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं पड़ती, इसलिए इसे अबूझ मुहूर्तों में शामिल किया जाता है। हर वर्ष यह पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है और इसे नई शुरुआत, समृद्धि और शुभ फल देने वाला दिन माना जाता है। इस वर्ष की अक्षय तृतीया और भी खास मानी जा रही है, क्योंकि ग्रहों की स्थिति के अनुसार कई शुभ योगों का निर्माण हो रहा है। इस दिन त्रिपुष्कर योग से लेकर गजकेसरी योग, मालव्य योग, लक्ष्मी नारायण योग, रवि योग, अक्षय योग आदि बन रहे हैं। इन सभी योगों के कारण इस दिन का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। मान्यता है कि इस शुभ अवसर पर मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है, जिससे घर में सुख-शांति आती है और धन-समृद्धि में वृद्धि होती है।
इस दिन सोना-चांदी या अन्य कीमती वस्तुएं खरीदना भी अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि इसे स्थायी समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में अक्षय तृतीया पर क्या खरीदें, पूजा कैसे करें, कौन से मंत्रों का जाप करें और किन बातों का ध्यान रखें। आइए जानते हैं अक्षय तृतीया का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत कथा, लक्ष्मी आरती, कुबेर जी आरती सहित अन्य जानकारी…
अक्षय तृतीया 2026 कब है? (Akshaya Tritiya 2026 Date)
वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि आरंभ- 19 अप्रैल 2026 को 10:49 ए एम बजे
वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि समाप्त– 20 अप्रैल 2026 को 07:27 ए एम बजे
अक्षय तृतीया 2026 तिथि– 19 अप्रैल 2026
अक्षय तृतीया 2026 पूजा मुहूर्त (Akshaya Tritiya 2026 Puja Muhurat)
19 अप्रैल को सुबह 10 बजकर 49 मिनट से दोपहर 12 बजकर 20 मिनट तक पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त है। इसकी कुछ अवधि 1 घंटे 32 मिनट की होगी।
अक्षय तृतीया राशिफल। सोना-चांदी खरीदने का समय। अक्षय तृतीया पर खरीदें ये चीजें। अक्षय तृतीया पर करें ये दान
अक्षय तृतीया पर करें ये 14 महादान (Akshaya Tritiya 2026 LIVE)
शास्त्रों में अक्षय तृतीया के दिन किए जाने वाले 14 महादानों के बारे में बताया गया है। इन्हें करने से सुख-समृद्धि के साथ अक्षय पुण्य की प्राप्ति हो सकती है।
अन्न दान, जल दान, वस्त्र दान, स्वर्ण दान, चांदी दान, भूमि दान, गौ दान, विद्या दान, औषधि दान, कन्या जान, गृह निर्माण में मदद, दीप दान और पुस्तक का दान
अक्षय तृतीया पर पढ़ें लक्ष्मी स्तुति (Akshaya Tritiya 2026 Live)
आदि लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु परब्रह्म स्वरूपिणि।
यशो देहि धनं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
सन्तान लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु पुत्र-पौत्र प्रदायिनि।
पुत्रां देहि धनं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
विद्या लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु ब्रह्म विद्या स्वरूपिणि।
विद्यां देहि कलां देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
धन लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्व दारिद्र्य नाशिनि।
धनं देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
धान्य लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्वाभरण भूषिते।
धान्यं देहि धनं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
मेधा लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु कलि कल्मष नाशिनि।
प्रज्ञां देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
गज लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्वदेव स्वरूपिणि।
अश्वांश गोकुलं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
धीर लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु पराशक्ति स्वरूपिणि।
वीर्यं देहि बलं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
जय लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्व कार्य जयप्रदे।
जयं देहि शुभं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
भाग्य लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सौमाङ्गल्य विवर्धिनि।
भाग्यं देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
कीर्ति लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु विष्णुवक्ष स्थल स्थिते।
कीर्तिं देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
आरोग्य लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्व रोग निवारणि।
आयुर्देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
सिद्ध लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्व सिद्धि प्रदायिनि।
सिद्धिं देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
सौन्दर्य लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्वालङ्कार शोभिते।
रूपं देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
साम्राज्य लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु भुक्ति मुक्ति प्रदायिनि।
मोक्षं देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
मङ्गले मङ्गलाधारे माङ्गल्ये मङ्गल प्रदे।
मङ्गलार्थं मङ्गलेशि माङ्गल्यं देहि मे सदा।।
सर्व मङ्गल माङ्गल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्रयम्बके देवि नारायणि नमोऽस्तुते
अक्षय तृतीया 2026 पर क्या न करें (Akshaya Tritiya 2026 LIVE)
मान्यता है कि इस दिन न तो किसी को पैसा उधार देना चाहिए और न ही किसी से उधार लेना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से आर्थिक असंतुलन और परेशानियां बढ़ सकती हैं। साथ ही यह भी माना जाता है कि उधार देने से घर की समृद्धि प्रभावित हो सकती है।
इस दिन घर में शांति और सकारात्मक वातावरण बनाए रखना बहुत जरूरी होता है। किसी भी तरह के वाद-विवाद, झगड़े या अपशब्दों से बचना चाहिए।
अक्षय तृतीया पर तामसिक भोजन जैसे मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन का सेवन करने से परहेज करना चाहिए।
घर के मुख्य द्वार और पूजा स्थान को हमेशा स्वच्छ और प्रकाशमान रखना चाहिए। घर में अंधेरा या गंदगी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि स्वच्छता और प्रकाश से ही सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि का आगमन होता है।
अक्षय तृतीया पर करें ये काम (Akshaya Tritiya 2026 LIVE)
अक्षय तृतीया के अवसर पर कुछ विशेष कार्य करने से अत्यंत शुभ फल और पुण्य की प्राप्ति होती है।
इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करना बहुत ही मंगलकारी माना जाता है।
इस दिन अन्न, जल, वस्त्र, स्वर्ण आदि का दान करना अत्यंत पुण्यदायी होता है और इससे घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है।
तुलसी के पौधे में जल अर्पित कर दीपक जलाना और परिक्रमा करना भी शुभ माना गया है।
पीले रंग के वस्त्र धारण करना इस दिन विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है।
घर के मुख्य द्वार को रंगोली और तोरण से सजाना सकारात्मक ऊर्जा और सौभाग्य को आकर्षित करता है।
इसके अलावा पितरों का तर्पण करना भी इस दिन अत्यंत महत्वपूर्ण और शुभ माना गया है।
मान्यता है कि अक्षय तृतीया के दिन नए कार्य की शुरुआत, व्यापार या निवेश करने से उसमें निरंतर वृद्धि और सफलता प्राप्त होती है।
अक्षय तृतीया पर करें मां लक्ष्मी के इन मंत्रों का जाप (Akshaya Tritiya 2026 LIVE)
ॐ लक्ष्मी नम:।
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नम:।
ॐ लक्ष्मी नारायण नम:।
ॐ लक्ष्मी नारायण नमो नम:।
ॐ नमो भाग्य लक्ष्म्यै च विद्महे अष्ट लक्ष्म्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोद्यात’।
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।
ॐ ह्रीं ह्रीं श्री लक्ष्मी वासुदेवाय नम:।
ॐ ह्रीं श्री क्रीं क्लीं श्री लक्ष्मी मम गृहे धन पूरये, धन पूरये, चिंताएं दूरये-दूरये स्वाहा:।
ॐ लक्ष्मी नमो नम:।ॐ श्रीं श्रीये नम:।
अक्षय तृतीया पर करें आरती श्री कुबेर जी की (Akshaya Tritiya 2026 Live)
ऊं जै यक्ष कुबेर हरे,
स्वामी जै यक्ष जै यक्ष कुबेर हरे।
शरण पड़े भगतों के,भण्डार कुबेर भरे॥
ऊं जै यक्ष कुबेर हरे…॥
शिव भक्तों में भक्त कुबेर बड़े,स्वामी भक्त कुबेर बड़े।
दैत्य दानव मानव से,कई-कई युद्ध लड़े॥
ऊं जै यक्ष कुबेर हरे…॥
स्वर्ण सिंहासन बैठे,सिर पर छत्र फिरे, स्वामी सिर पर छत्र फिरे।
योगिनी मंगल गावैं,सब जय जय कार करैं॥
ऊं जै यक्ष कुबेर हरे…॥
गदा त्रिशूल हाथ में,शस्त्र बहुत धरे, स्वामी शस्त्र बहुत धरे।
दुख भय संकट मोचन,धनुष टंकार करें॥
ऊं जै यक्ष कुबेर हरे…॥
भाँति भाँति के व्यंजन बहुत बने,स्वामी व्यंजन बहुत बने।
मोहन भोग लगावैं,साथ में उड़द चने॥
ऊं जै यक्ष कुबेर हरे…॥
बल बुद्धि विद्या दाता,हम तेरी शरण पड़े, स्वामी हम तेरी शरण पड़े
अपने भक्त जनों के,सारे काम संवारे॥
ऊं जै यक्ष कुबेर हरे…॥
मुकुट मणी की शोभा,मोतियन हार गले, स्वामी मोतियन हार गले।
अगर कपूर की बाती,घी की जोत जले॥
ऊं जै यक्ष कुबेर हरे…॥
यक्ष कुबेर जी की आरती,जो कोई नर गावे, स्वामी जो कोई नर गावे।
कहत प्रेमपाल स्वामी,मनवांछित फल पावे॥
ऊं जै यक्ष कुबेर हरे…॥
अक्षय तृतीया पर करें श्री सूक्त का पाठ (Akshaya Tritiya 2026 LIVE)
ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं, सुवर्णरजतस्त्रजाम् ।
चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं, जातवेदो म आ वह ।।
तां म आ वह जातवेदो, लक्ष्मीमनपगामिनीम् ।
यस्यां हिरण्यं विन्देयं, गामश्वं पुरूषानहम् ।।
अश्वपूर्वां रथमध्यां, हस्तिनादप्रमोदिनीम् ।
श्रियं देवीमुप ह्वये, श्रीर्मा देवी जुषताम् ।।
कां सोस्मितां हिरण्यप्राकारामार्द्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम् ।
पद्मेस्थितां पद्मवर्णां तामिहोप ह्वये श्रियम् ।।
चन्द्रां प्रभासां यशसा ज्वलन्तीं श्रियं लोके देवजुष्टामुदाराम् ।
तां पद्मिनीमीं शरणं प्र पद्ये अलक्ष्मीर्मे नश्यतां त्वां वृणे ।।
आदित्यवर्णे तपसोऽधि जातो वनस्पतिस्तव वृक्षोऽक्ष बिल्वः ।
तस्य फलानि तपसा नुदन्तु या अन्तरा याश्च बाह्या अलक्ष्मीः ।।
उपैतु मां दैवसखः, कीर्तिश्च मणिना सह ।
प्रादुर्भूतोऽस्मि राष्ट्रेऽस्मिन्, कीर्तिमृद्धिं ददातु मे ।।
क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठामलक्ष्मीं नाशयाम्यहम् ।
अभतिमसमृद्धिं च, सर्वां निर्णुद मे गृहात् ।।
गन्धद्वारां दुराधर्षां, नित्यपुष्टां करीषिणीम् ।
ईश्वरीं सर्वभूतानां, तामिहोप ह्वये श्रियम् ।।
मनसः काममाकूतिं, वाचः सत्यमशीमहि ।
पशूनां रूपमन्नस्य, मयि श्रीः श्रयतां यशः ।।
कर्दमेन प्रजा भूता मयि सम्भव कर्दम ।
श्रियं वासय मे कुले मातरं पद्ममालिनीम् ।।
आपः सृजन्तु स्निग्धानि चिक्लीत वस मे गृहे ।
नि च देवीं मातरं श्रियं वासय मे कुले ।।
आर्द्रां पुष्करिणीं पुष्टिं पिंगलां पद्ममालिनीम् ।
चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं, जातवेदो म आ वह ।।
आर्द्रां य करिणीं यष्टिं सुवर्णां हेममालिनीम् ।
सूर्यां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आ वह ।।
तां म आ वह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम् ।
यस्यां हिरण्यं प्रभूतं गावो दास्योऽश्वान् विन्देयं पुरुषानहम् ।।
य: शुचि: प्रयतो भूत्वा जुहुयादाज्यमन्वहम् ।
सूक्तं पंचदशर्चं च श्रीकाम: सततं जपेत् ।।
।। इति समाप्ति ।।
अक्षय तृतीया पर करें विष्णु जी की आरती(Akshaya Tritiya 2026 LIVE)
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥
जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय…॥
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय…॥
तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय…॥
तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय…॥
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय…॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय…॥
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय…॥
तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय…॥
जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय…॥
अक्षय तृतीया पर करें मां लक्ष्मी चालीसा (Maa Laxmi Chalisa Akshaya Tritiya 2026 Live)
दोहा
मातु लक्ष्मी करि कृपा करो हृदय में वास।
मनोकामना सिद्ध कर पुरवहु मेरी आस॥
सिंधु सुता विष्णुप्रिये नत शिर बारंबार।
ऋद्धि सिद्धि मंगलप्रदे नत शिर बारंबार॥ टेक॥
सोरठा
यही मोर अरदास, हाथ जोड़ विनती करूं।
सब विधि करौ सुवास, जय जननि जगदंबिका॥
॥ चौपाई ॥
सिन्धु सुता मैं सुमिरौं तोही। ज्ञान बुद्धि विद्या दो मोहि॥
तुम समान नहिं कोई उपकारी। सब विधि पुरबहु आस हमारी॥
जै जै जगत जननि जगदम्बा। सबके तुमही हो स्वलम्बा॥
तुम ही हो घट घट के वासी। विनती यही हमारी खासी॥
जग जननी जय सिन्धु कुमारी। दीनन की तुम हो हितकारी॥
विनवौं नित्य तुमहिं महारानी। कृपा करौ जग जननि भवानी।
केहि विधि स्तुति करौं तिहारी। सुधि लीजै अपराध बिसारी॥
कृपा दृष्टि चितवो मम ओरी। जगत जननि विनती सुन मोरी॥
ज्ञान बुद्धि जय सुख की दाता। संकट हरो हमारी माता॥
क्षीर सिंधु जब विष्णु मथायो। चौदह रत्न सिंधु में पायो॥
चौदह रत्न में तुम सुखरासी। सेवा कियो प्रभुहिं बनि दासी॥
जब जब जन्म जहां प्रभु लीन्हा। रूप बदल तहं सेवा कीन्हा॥
स्वयं विष्णु जब नर तनु धारा। लीन्हेउ अवधपुरी अवतारा॥
तब तुम प्रकट जनकपुर माहीं। सेवा कियो हृदय पुलकाहीं॥
अपनायो तोहि अन्तर्यामी। विश्व विदित त्रिभुवन की स्वामी॥
तुम सब प्रबल शक्ति नहिं आनी। कहं तक महिमा कहौं बखानी॥
मन क्रम वचन करै सेवकाई। मन- इच्छित वांछित फल पाई॥
तजि छल कपट और चतुराई। पूजहिं विविध भांति मन लाई॥
और हाल मैं कहौं बुझाई। जो यह पाठ करे मन लाई॥
ताको कोई कष्ट न होई। मन इच्छित फल पावै फल सोई॥
त्राहि- त्राहि जय दुःख निवारिणी। त्रिविध ताप भव बंधन हारिणि॥
जो यह चालीसा पढ़े और पढ़ावे। इसे ध्यान लगाकर सुने सुनावै॥
ताको कोई न रोग सतावै। पुत्र आदि धन सम्पत्ति पावै।
पुत्र हीन और सम्पत्ति हीना। अन्धा बधिर कोढ़ी अति दीना॥
विप्र बोलाय कै पाठ करावै। शंका दिल में कभी न लावै॥
पाठ करावै दिन चालीसा। ता पर कृपा करैं गौरीसा॥
सुख सम्पत्ति बहुत सी पावै। कमी नहीं काहू की आवै॥
बारह मास करै जो पूजा। तेहि सम धन्य और नहिं दूजा॥
प्रतिदिन पाठ करै मन माहीं। उन सम कोई जग में नाहिं॥
बहु विधि क्या मैं करौं बड़ाई। लेय परीक्षा ध्यान लगाई॥
करि विश्वास करैं व्रत नेमा। होय सिद्ध उपजै उर प्रेमा॥
जय जय जय लक्ष्मी महारानी। सब में व्यापित जो गुण खानी॥
तुम्हरो तेज प्रबल जग माहीं। तुम सम कोउ दयाल कहूं नाहीं॥
मोहि अनाथ की सुधि अब लीजै। संकट काटि भक्ति मोहि दीजे॥
भूल चूक करी क्षमा हमारी। दर्शन दीजै दशा निहारी॥
बिन दरशन व्याकुल अधिकारी। तुमहिं अक्षत दुःख सहते भारी॥
नहिं मोहिं ज्ञान बुद्धि है तन में। सब जानत हो अपने मन में॥
रूप चतुर्भुज करके धारण। कष्ट मोर अब करहु निवारण॥
कहि प्रकार मैं करौं बड़ाई। ज्ञान बुद्धि मोहिं नहिं अधिकाई॥
रामदास अब कहाई पुकारी। करो दूर तुम विपति हमारी॥
दोहा
त्राहि त्राहि दुःख हारिणी हरो बेगि सब त्रास।
जयति जयति जय लक्ष्मी करो शत्रुन का नाश॥
रामदास धरि ध्यान नित विनय करत कर जोर।
मातु लक्ष्मी दास पर करहु दया की कोर॥
अक्षय तृतीया पर पढ़ें श्री कनकधारा स्तोत्रं (Kankdhara Strotra Lyrics In Hindi)
अंगहरे पुलकभूषण माश्रयन्ती भृगांगनैव मुकुलाभरणं तमालम।
अंगीकृताखिल विभूतिरपांगलीला मांगल्यदास्तु मम मंगलदेवताया:।।1।।
मुग्ध्या मुहुर्विदधती वदनै मुरारै: प्रेमत्रपाप्रणिहितानि गतागतानि।
माला दृशोर्मधुकर विमहोत्पले या सा मै श्रियं दिशतु सागर सम्भवाया:।।2।।
विश्वामरेन्द्रपदविभ्रमदानदक्षमानन्द हेतु रधिकं मधुविद्विषोपि।
ईषन्निषीदतु मयि क्षणमीक्षणार्द्धमिन्दोवरोदर सहोदरमिन्दिराय:।।3।।
आमीलिताक्षमधिगम्य मुदा मुकुन्दमानन्दकन्दम निमेषमनंगतन्त्रम्।
आकेकर स्थित कनी निकपक्ष्म नेत्रं भूत्यै भवेन्मम भुजंगरायांगनाया:।।4।।
बाह्यन्तरे मधुजित: श्रितकौस्तुभै या हारावलीव हरिनीलमयी विभाति।
कामप्रदा भगवतो पि कटाक्षमाला कल्याण भावहतु मे कमलालयाया:।।5।।
कालाम्बुदालिललितोरसि कैटभारेर्धाराधरे स्फुरति या तडिदंगनेव्।
मातु: समस्त जगतां महनीय मूर्तिभद्राणि मे दिशतु भार्गवनन्दनाया:।।6।।
प्राप्तं पदं प्रथमत: किल यत्प्रभावान्मांगल्य भाजि: मधुमायनि मन्मथेन।
मध्यापतेत दिह मन्थर मीक्षणार्द्ध मन्दालसं च मकरालयकन्यकाया:।।7।।
दद्याद दयानुपवनो द्रविणाम्बुधाराम स्मिभकिंचन विहंग शिशौ विषण्ण।
दुष्कर्मधर्ममपनीय चिराय दूरं नारायण प्रणयिनी नयनाम्बुवाह:।।8।।
इष्टा विशिष्टमतयो पि यथा ययार्द्रदृष्टया त्रिविष्टपपदं सुलभं लभंते।
दृष्टि: प्रहूष्टकमलोदर दीप्ति रिष्टां पुष्टि कृषीष्ट मम पुष्कर विष्टराया:।।9।।
गीर्देवतैति गरुड़ध्वज भामिनीति शाकम्भरीति शशिशेखर वल्लभेति।
सृष्टि स्थिति प्रलय केलिषु संस्थितायै तस्यै नमस्त्रि भुवनैक गुरोस्तरूण्यै ।।10।।
श्रुत्यै नमोस्तु शुभकर्मफल प्रसूत्यै रत्यै नमोस्तु रमणीय गुणार्णवायै।
शक्तयै नमोस्तु शतपात्र निकेतानायै पुष्टयै नमोस्तु पुरूषोत्तम वल्लभायै।।11।।
नमोस्तु नालीक निभाननायै नमोस्तु दुग्धौदधि जन्म भूत्यै ।
नमोस्तु सोमामृत सोदरायै नमोस्तु नारायण वल्लभायै।।12।।
सम्पतकराणि सकलेन्द्रिय नन्दानि साम्राज्यदान विभवानि सरोरूहाक्षि।
त्व द्वंदनानि दुरिता हरणाद्यतानि मामेव मातर निशं कलयन्तु नान्यम्।।13।।
यत्कटाक्षसमुपासना विधि: सेवकस्य कलार्थ सम्पद:।
संतनोति वचनांगमानसंसत्वां मुरारिहृदयेश्वरीं भजे।।14।।
सरसिजनिलये सरोज हस्ते धवलमांशुकगन्धमाल्यशोभे।
भगवति हरिवल्लभे मनोज्ञे त्रिभुवनभूतिकरि प्रसीद मह्यम्।।15।।
दग्धिस्तिमि: कनकुंभमुखा व सृष्टिस्वर्वाहिनी विमलचारू जल प्लुतांगीम।
प्रातर्नमामि जगतां जननीमशेष लोकाधिनाथ गृहिणी ममृताब्धिपुत्रीम्।।16।।
कमले कमलाक्षवल्लभे त्वं करुणापूरतरां गतैरपाड़ंगै:।
अवलोकय माम किंचनानां प्रथमं पात्रमकृत्रिमं दयाया : ।।17।।
स्तुवन्ति ये स्तुतिभिर भूमिरन्वहं त्रयीमयीं त्रिभुवनमातरं रमाम्।
गुणाधिका गुरुतरभाग्यभागिनो भवन्ति ते बुधभाविताया:।।18।।
अक्षय तृतीया पर करें कुबेर जी के इन मंत्रों का जाप (Akshaya Tritiya 2026 Live)
ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये, धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥
ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं कुबेराय अष्ट-लक्ष्मी मम गृहे धनं पुरय पुरय नमः॥
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः॥
अक्षय तृतीया आरती (Akshaya Tritiya 2026 Live)
ओम जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।
मैया तुम ही जग-माता।।
सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता।
मैया सुख सम्पत्ति दाता॥
जो कोई तुमको ध्याता, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।
मैया तुम ही शुभदाता॥.
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।
मैया सब सद्गुण आता॥
सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।
मैया वस्त्र न कोई पाता॥
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
शुभ-गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता।
मैया क्षीरोदधि-जाता॥
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता।
मैया जो कोई जन गाता॥
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
ऊं जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता।
ऊं जय लक्ष्मी माता।।
दोहा
महालक्ष्मी नमस्तुभ्यम्, नमस्तुभ्यम् सुरेश्वरि। हरिप्रिये नमस्तुभ्यम्, नमस्तुभ्यम् दयानिधे।।
पद्मालये नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं च सर्वदे। सर्व भूत हितार्थाय, वसु सृष्टिं सदा कुरुं।।
अक्षय तृतीया पर सोना-चांदी खरीदने का शहर के अनुसार समय(Akshaya Tritiya 2026 LIVE)
10:49 ए एम से 12:34 पी एम - पुणे
10:49 ए एम से 12:20 पी एम - नई दिल्ली
10:49 ए एम से 12:08 पी एम - चेन्नई
10:49 ए एम से 12:26 पी एम - जयपुर
10:49 ए एम से 12:15 पी एम - हैदराबाद
10:49 ए एम से 12:21 पी एम - गुरुग्राम
10:49 ए एम से 12:22 पी एम - चण्डीगढ़
10:49 ए एम से 11:36 ए एम - कोलकाता
10:49 ए एम से 12:38 पी एम - मुम्बई
10:49 ए एम से 12:19 पी एम - बेंगलूरु
10:49 ए एम से 12:39 पी एम - अहमदाबाद
10:49 ए एम से 12:20 पी एम - नोएडा
अक्षय तृतीया पूजा सामग्री (Akshaya Tritiya 2026 Pujan Samagri)
लकड़ी की चौकी
पीले रंग का कपड़ा
मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की तस्वीर या मूर्ति
भगवान गणेश की मूर्ति
सिंदूर
फूल, माला
रोली
अक्षत
भगवान गणेश के लिए दूर्वा
भगवान विष्णु के लिए तुलसी
पान और सुपारी
दक्षिणा
एक कलश
कच्चे आम के पत्ते
पानी
गंगाजल
हल्दी
चंदन
एक तेल का दीपक
घी
साबुत नारियल
अगरबत्ती
नैवेद्य
कलावा
जनेऊ
पंचामृत (घी, दही, दूध, केला, मिश्री, शहद का मिश्रण)
कपूर
जल
अक्षय तृतीया को हुआ था परशुराम जी का जन्म(Akshaya Tritiya 2025 Live)
भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम जी का जन्म भी अक्षय तृतीया के दिन हुआ माना जाता है। इसलिए इस दिन को परशुराम जयंती के रूप में भी मनाया जाता है।
अक्षय तृतीया को हुआ था गंगा अवतरण (Akshaya Tritiya 2025 Live)
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन मां गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। यह घटना राजा भगीरथ की तपस्या से जुड़ी मानी जाती है, जिसका वर्णन पुराणों में मिलता है।
अक्षय तृतीया पर क्या-क्या खरीद सकते हैं (Akshaya Tritiya 2026 Live)
अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर सोना-चांदी खरीदना तो शुभ माना ही जाता है, लेकिन इसके अलावा भी कई ऐसी वस्तुएं हैं जिन्हें खरीदना बेहद फलदायी माना गया है। यदि आप सोना-चांदी नहीं खरीद पा रहे हैं, तो भी चिंता की बात नहीं है। ऐसे में आप पीली सरसों, जौ, रूई, मिट्टी का घड़ा, कौड़ी तथा पीतल या तांबे के बर्तन जैसी वस्तुएं खरीद सकते हैं। मान्यता है कि इन चीजों की खरीदारी से घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है।
अक्षय तृतीया से महाभारत ग्रंथ लिखने की शुरुआत (Akshaya Tritiya 2025 Live)
लोक परंपरा के अनुसार, अक्षय तृतीया को अत्यंत शुभ और दिव्य दिन माना जाता है, और कहा जाता है कि इसी दिन सत्ययुग यानी स्वर्ण युग की शुरुआत हुई थी। इसी पावन तिथि पर महर्षि वेदव्यास ने भगवान गणेश जी के साथ मिलकर महाभारत ग्रंथ की रचना प्रारंभ की थी। इसलिए यह दिन ज्ञान, धर्म और शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।
अक्षय तृतीया पूजा विधि (Akshaya Tritiya 2026 Live)
अक्षय तृतीया के दिन पूजा विधि को अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। इस दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद हाथ में गंगाजल लेकर व्रत और पूजा का संकल्प लें।
अब भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र को पूजा स्थल पर स्थापित करें। सबसे पहले उन्हें अक्षत अर्पित करें, फिर फूल, विशेषकर सफेद या गुलाबी पुष्प, धूप और दीप से विधिवत पूजा करें।
इसके बाद नैवेद्य के रूप में जौ, गेहूं, सत्तू, ककड़ी और चने की दाल आदि अर्पित करना शुभ माना जाता है। पूजा के अंत में विष्णु चालीसा और लक्ष्मी चालीसा का पाठ करें।
इस दिन मां लक्ष्मी को गुलाबी फूल और यदि संभव हो तो स्फटिक की माला अर्पित करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। साथ ही ब्राह्मणों को भोजन कराना और दान देना विशेष पुण्यकारी होता है।
मान्यता है कि इस विधि से की गई पूजा से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
अक्षय तृतीया 2026 पूजा मुहूर्त (Akshaya Tritiya 2026 Puja Muhurat LIVE)
पंचांग के अनुसार 19 अप्रैल को सुबह 10 बजकर 49 मिनट से दोपहर 12 बजकर 20 मिनट तक पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त है। इसकी कुछ अवधि 1 घंटे 32 मिनट की होगी।
अक्षय तृतीया व्रत कथा (Akshaya Tritiya 2026 LIVE)
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में एक धर्मदास नामक वैश्य था। वह बहुत गरीब था। धर्मदास अपने परिवार के साथ एक छोटे से गांव में रहता था। गरीब होने के कारण परिवार के भरण-पोषण के लिए चिंतित रहता था। धर्मदास बहुत धार्मिक प्रवृत्ति का व्यक्ति था उसका सदाचार तथा देव एवं ब्राह्मणों के प्रति उसकी श्रद्धा अत्यधिक प्रसिद्ध थी। एक दिन धर्मदास ने कहीं पर हो रही कथा में अक्षय तृतीया के महत्व के बारे में सुना।
ऐसे में अक्षय तृतीया के दिन एबह जल्दी उठकर गंगा में स्नान करके विधिपूर्वक देवी-देवताओं की पूजा कर ली। इसके बाद दिनभर व्रत रखा और अपने सामर्थ्यानुसार घड़े को जल सहित, पंखे, जौ, सत्तू, चावल, नमक, गेंहू, गुड़, घी, दही, सोना और वस्त्र आदि वस्तुएं भगवान के चरणों अर्पित करने के साथ दान कर दी।
यह सब दान देखकर धर्मदास की पत्नी के साथ-साथ घर के अन्य सदस्यों ने उसे रोकने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि अगर धर्मदास इतना सब कुछ दान में दे देगा, तो उसके परिवार का पालन-पोषण कैसे होगा। फिर भी धर्मदास अपने दान और पुण्य कर्म से विचलित नहीं हुआ और उसने ब्राह्मणों को कई प्रकार का दान दिया। उसके जीवन में जब भी अक्षय तृतीया का पावन पर्व आया, प्रत्येक बार धर्मदास ने विधि से इस दिन पूजन एवं दान आदि कर्म किया।
अनेक रोगों से ग्रस्त तथा वृद्ध होने के उपरांत भी उसने उपवास करके धर्म-कर्म और दान पुण्य किया। यही वैश्य दूसरे अगले जन्म में कुशावती का राजा हुए।
मान्यता है कि अक्षय तृतीया के दिन किए गए दान-पुण्य व पूजन के कारण वह अपने अगले जन्म में बहुत धनी एवं प्रतापी राजा बना। वह इतना धनी और प्रतापी राजा था कि त्रिदेव तक उसके दरबार में अक्षय तृतीया के दिन ब्राह्मण का वेश धारण करके उसके महायज्ञ में शामिल होते थे। अपनी श्रद्धा और भक्ति का उसे कभी घमंड नहीं हुआ, वह प्रतापी राजा महान एवं वैभवशाली होने के बावजूद भी धर्म मार्ग से कभी विचलित नहीं हुआ। माना जाता है कि यह राजा आगे के जन्मों में भारत के प्रसिद्ध सम्राट चंद्रगुप्त के रूप में पैदा हुए थे।
अक्षय तृतीया पर हुआ था सुदामा और श्री कृष्ण का मिलन (Akshaya Tritiya 2026 LIVE)
पौराणिक कथाओं के अनुसार, अक्षय तृतीया का दिन भगवान श्री कृष्ण और उनके परम मित्र सुदामा के मिलन से भी जुड़ा हुआ है। सुदामा अत्यंत गरीब थे और अपनी आर्थिक स्थिति से परेशान होकर अपने मित्र श्री कृष्ण से मिलने उनके महल पहुंचे। जैसे ही श्री कृष्ण को उनके आगमन का समाचार मिला, वे स्वयं दौड़कर द्वार तक गए और बड़े प्रेम व सम्मान के साथ उनका स्वागत किया। सुदामा अपने साथ उपहार स्वरूप केवल कच्चे चावल की एक छोटी पोटली लाए थे, जिसे देने में उन्हें संकोच हो रहा था, लेकिन श्री कृष्ण के आग्रह पर उन्होंने वह पोटली उन्हें सौंप दी। श्री कृष्ण ने अत्यंत प्रेम से उन चावलों को ग्रहण किया।
सुदामा अपने मन की बात कह नहीं पाए और बिना कुछ मांगे ही कुछ समय बाद वापस अपने घर लौट गए। जब वे अपने गांव पहुंचे, तो अपनी झोपड़ी की जगह एक भव्य महल देखकर आश्चर्यचकित रह गए। उनकी पत्नी भी सजे-धजे रूप में उनका स्वागत करने आईं। तब उन्हें समझ आया कि श्री कृष्ण ने बिना कुछ कहे ही उनकी सारी परेशानियां दूर कर दीं और उन्हें समृद्धि का आशीर्वाद दिया। इसी कथा के कारण अक्षय तृतीया को अटूट सौभाग्य और अक्षय फल देने वाला पर्व माना जाता है।
क्या 20 अप्रैल को भी है अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya 2026 LIVE)
द्रिक पंचांग के अनुसार, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 19 अप्रैल 2026 को 10:49 ए एम बजे शुरू हो रही है, जो 20 अप्रैल 2026 को 07:27 ए एम बजे समाप्त होगी। ऐसे में 19 अप्रैल को अक्षया तृतीया मनाना शुभ होगा। अगर उदया तिथि के हिसाब से 20 अप्रैल को भी मनाया जा रहा है। ऐसे में आप 20 अप्रैल को सुबह 07:27 ए एम तक खरीदारी कर सकते हैं।
अक्षय तृतीया पर करें ये काम (Akshaya Tritiya 2026 LIVE)
मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करना बहुत ही मंगलकारी माना जाता है।
इस दिन अन्न, जल, वस्त्र, स्वर्ण आदि का दान करना अत्यंत पुण्यदायी होता है
तुलसी के पौधे में जल अर्पित कर दीपक जलाना और परिक्रमा करना भी शुभ माना गया है।
पीले रंग के वस्त्र धारण करना इस दिन विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है।
घर के मुख्य द्वार को रंगोली और तोरण से सजाना लाभकारी माना जाता है
पितरों का तर्पण करना भी इस दिन अत्यंत महत्वपूर्ण और शुभ माना गया है।
इस दिन नए कार्य की शुरुआत, व्यापार या निवेश करने से उसमें निरंतर वृद्धि और सफलता प्राप्त होती है।
अक्षय तृतीया 2026 पर क्या न करें (Akshaya Tritiya 2026 LIVE)
अक्षय तृतीया 2026 के अवसर पर कुछ बातों से परहेज करना शुभ माना जाता है, क्योंकि यह दिन अत्यंत पवित्र और सकारात्मक ऊर्जा से जुड़ा हुआ पर्व है।
इस दिन न तो किसी को धन उधार देना चाहिए और न ही किसी से उधार लेना चाहिए, क्योंकि ऐसी मान्यता है कि इससे आर्थिक असंतुलन और वित्तीय परेशानियां उत्पन्न हो सकती हैं। साथ ही यह भी माना जाता है कि उधार देने से घर की समृद्धि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
इस शुभ दिन पर घर का वातावरण शांत और सकारात्मक बनाए रखना बेहद जरूरी होता है। किसी भी प्रकार के वाद-विवाद, झगड़े या अपशब्दों से पूरी तरह बचना चाहिए, क्योंकि इससे घर की शांति और ऊर्जा प्रभावित हो सकती है।
अक्षय तृतीया के दिन सात्त्विक आहार लेना श्रेष्ठ माना जाता है, इसलिए मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन जैसे तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए।
इसके अलावा घर के मुख्य द्वार और पूजा स्थान को स्वच्छ, व्यवस्थित और प्रकाशमान रखना चाहिए। घर में अंधकार या गंदगी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि स्वच्छता और रोशनी को समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
अक्षय तृतीया पर करें विष्णु जी की आरती(Akshaya Tritiya 2026 LIVE)
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥
जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय…॥
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय…॥
तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय…॥
तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय…॥
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय…॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय…॥
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय…॥
तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय…॥
जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय…॥
अक्षय तृतीया पर पढ़ें श्री कनकधारा स्तोत्रं (Kankdhara Strotra Lyrics In Hindi)
अंगहरे पुलकभूषण माश्रयन्ती भृगांगनैव मुकुलाभरणं तमालम।
अंगीकृताखिल विभूतिरपांगलीला मांगल्यदास्तु मम मंगलदेवताया:।।1।।
मुग्ध्या मुहुर्विदधती वदनै मुरारै: प्रेमत्रपाप्रणिहितानि गतागतानि।
माला दृशोर्मधुकर विमहोत्पले या सा मै श्रियं दिशतु सागर सम्भवाया:।।2।।
विश्वामरेन्द्रपदविभ्रमदानदक्षमानन्द हेतु रधिकं मधुविद्विषोपि।
ईषन्निषीदतु मयि क्षणमीक्षणार्द्धमिन्दोवरोदर सहोदरमिन्दिराय:।।3।।
आमीलिताक्षमधिगम्य मुदा मुकुन्दमानन्दकन्दम निमेषमनंगतन्त्रम्।
आकेकर स्थित कनी निकपक्ष्म नेत्रं भूत्यै भवेन्मम भुजंगरायांगनाया:।।4।।
बाह्यन्तरे मधुजित: श्रितकौस्तुभै या हारावलीव हरिनीलमयी विभाति।
कामप्रदा भगवतो पि कटाक्षमाला कल्याण भावहतु मे कमलालयाया:।।5।।
कालाम्बुदालिललितोरसि कैटभारेर्धाराधरे स्फुरति या तडिदंगनेव्।
मातु: समस्त जगतां महनीय मूर्तिभद्राणि मे दिशतु भार्गवनन्दनाया:।।6।।
प्राप्तं पदं प्रथमत: किल यत्प्रभावान्मांगल्य भाजि: मधुमायनि मन्मथेन।
मध्यापतेत दिह मन्थर मीक्षणार्द्ध मन्दालसं च मकरालयकन्यकाया:।।7।।
दद्याद दयानुपवनो द्रविणाम्बुधाराम स्मिभकिंचन विहंग शिशौ विषण्ण।
दुष्कर्मधर्ममपनीय चिराय दूरं नारायण प्रणयिनी नयनाम्बुवाह:।।8।।
इष्टा विशिष्टमतयो पि यथा ययार्द्रदृष्टया त्रिविष्टपपदं सुलभं लभंते।
दृष्टि: प्रहूष्टकमलोदर दीप्ति रिष्टां पुष्टि कृषीष्ट मम पुष्कर विष्टराया:।।9।।
गीर्देवतैति गरुड़ध्वज भामिनीति शाकम्भरीति शशिशेखर वल्लभेति।
सृष्टि स्थिति प्रलय केलिषु संस्थितायै तस्यै नमस्त्रि भुवनैक गुरोस्तरूण्यै ।।10।।
श्रुत्यै नमोस्तु शुभकर्मफल प्रसूत्यै रत्यै नमोस्तु रमणीय गुणार्णवायै।
शक्तयै नमोस्तु शतपात्र निकेतानायै पुष्टयै नमोस्तु पुरूषोत्तम वल्लभायै।।11।।
नमोस्तु नालीक निभाननायै नमोस्तु दुग्धौदधि जन्म भूत्यै ।
नमोस्तु सोमामृत सोदरायै नमोस्तु नारायण वल्लभायै।।12।।
सम्पतकराणि सकलेन्द्रिय नन्दानि साम्राज्यदान विभवानि सरोरूहाक्षि।
त्व द्वंदनानि दुरिता हरणाद्यतानि मामेव मातर निशं कलयन्तु नान्यम्।।13।।
यत्कटाक्षसमुपासना विधि: सेवकस्य कलार्थ सम्पद:।
संतनोति वचनांगमानसंसत्वां मुरारिहृदयेश्वरीं भजे।।14।।
सरसिजनिलये सरोज हस्ते धवलमांशुकगन्धमाल्यशोभे।
भगवति हरिवल्लभे मनोज्ञे त्रिभुवनभूतिकरि प्रसीद मह्यम्।।15।।
दग्धिस्तिमि: कनकुंभमुखा व सृष्टिस्वर्वाहिनी विमलचारू जल प्लुतांगीम।
प्रातर्नमामि जगतां जननीमशेष लोकाधिनाथ गृहिणी ममृताब्धिपुत्रीम्।।16।।
कमले कमलाक्षवल्लभे त्वं करुणापूरतरां गतैरपाड़ंगै:।
अवलोकय माम किंचनानां प्रथमं पात्रमकृत्रिमं दयाया : ।।17।।
स्तुवन्ति ये स्तुतिभिर भूमिरन्वहं त्रयीमयीं त्रिभुवनमातरं रमाम्।
गुणाधिका गुरुतरभाग्यभागिनो भवन्ति ते बुधभाविताया:।।18।।
अक्षय तृतीया पर करें मां लक्ष्मी चालीसा (Maa Laxmi Chalisa Akshaya Tritiya 2026 Live)
दोहा
मातु लक्ष्मी करि कृपा करो हृदय में वास।
मनोकामना सिद्ध कर पुरवहु मेरी आस॥
सिंधु सुता विष्णुप्रिये नत शिर बारंबार।
ऋद्धि सिद्धि मंगलप्रदे नत शिर बारंबार॥ टेक॥
सोरठा
यही मोर अरदास, हाथ जोड़ विनती करूं।
सब विधि करौ सुवास, जय जननि जगदंबिका॥
॥ चौपाई ॥
सिन्धु सुता मैं सुमिरौं तोही। ज्ञान बुद्धि विद्या दो मोहि॥
तुम समान नहिं कोई उपकारी। सब विधि पुरबहु आस हमारी॥
जै जै जगत जननि जगदम्बा। सबके तुमही हो स्वलम्बा॥
तुम ही हो घट घट के वासी। विनती यही हमारी खासी॥
जग जननी जय सिन्धु कुमारी। दीनन की तुम हो हितकारी॥
विनवौं नित्य तुमहिं महारानी। कृपा करौ जग जननि भवानी।
केहि विधि स्तुति करौं तिहारी। सुधि लीजै अपराध बिसारी॥
कृपा दृष्टि चितवो मम ओरी। जगत जननि विनती सुन मोरी॥
ज्ञान बुद्धि जय सुख की दाता। संकट हरो हमारी माता॥
क्षीर सिंधु जब विष्णु मथायो। चौदह रत्न सिंधु में पायो॥
चौदह रत्न में तुम सुखरासी। सेवा कियो प्रभुहिं बनि दासी॥
जब जब जन्म जहां प्रभु लीन्हा। रूप बदल तहं सेवा कीन्हा॥
स्वयं विष्णु जब नर तनु धारा। लीन्हेउ अवधपुरी अवतारा॥
तब तुम प्रकट जनकपुर माहीं। सेवा कियो हृदय पुलकाहीं॥
अपनायो तोहि अन्तर्यामी। विश्व विदित त्रिभुवन की स्वामी॥
तुम सब प्रबल शक्ति नहिं आनी। कहं तक महिमा कहौं बखानी॥
मन क्रम वचन करै सेवकाई। मन- इच्छित वांछित फल पाई॥
तजि छल कपट और चतुराई। पूजहिं विविध भांति मन लाई॥
और हाल मैं कहौं बुझाई। जो यह पाठ करे मन लाई॥
ताको कोई कष्ट न होई। मन इच्छित फल पावै फल सोई॥
त्राहि- त्राहि जय दुःख निवारिणी। त्रिविध ताप भव बंधन हारिणि॥
जो यह चालीसा पढ़े और पढ़ावे। इसे ध्यान लगाकर सुने सुनावै॥
ताको कोई न रोग सतावै। पुत्र आदि धन सम्पत्ति पावै।
पुत्र हीन और सम्पत्ति हीना। अन्धा बधिर कोढ़ी अति दीना॥
विप्र बोलाय कै पाठ करावै। शंका दिल में कभी न लावै॥
पाठ करावै दिन चालीसा। ता पर कृपा करैं गौरीसा॥
सुख सम्पत्ति बहुत सी पावै। कमी नहीं काहू की आवै॥
बारह मास करै जो पूजा। तेहि सम धन्य और नहिं दूजा॥
प्रतिदिन पाठ करै मन माहीं। उन सम कोई जग में नाहिं॥
बहु विधि क्या मैं करौं बड़ाई। लेय परीक्षा ध्यान लगाई॥
करि विश्वास करैं व्रत नेमा। होय सिद्ध उपजै उर प्रेमा॥
जय जय जय लक्ष्मी महारानी। सब में व्यापित जो गुण खानी॥
तुम्हरो तेज प्रबल जग माहीं। तुम सम कोउ दयाल कहूं नाहीं॥
मोहि अनाथ की सुधि अब लीजै। संकट काटि भक्ति मोहि दीजे॥
भूल चूक करी क्षमा हमारी। दर्शन दीजै दशा निहारी॥
बिन दरशन व्याकुल अधिकारी। तुमहिं अक्षत दुःख सहते भारी॥
नहिं मोहिं ज्ञान बुद्धि है तन में। सब जानत हो अपने मन में॥
रूप चतुर्भुज करके धारण। कष्ट मोर अब करहु निवारण॥
कहि प्रकार मैं करौं बड़ाई। ज्ञान बुद्धि मोहिं नहिं अधिकाई॥
रामदास अब कहाई पुकारी। करो दूर तुम विपति हमारी॥
दोहा
त्राहि त्राहि दुःख हारिणी हरो बेगि सब त्रास।
जयति जयति जय लक्ष्मी करो शत्रुन का नाश॥
रामदास धरि ध्यान नित विनय करत कर जोर।
मातु लक्ष्मी दास पर करहु दया की कोर॥
अक्षय तृतीया पर करें कुबेर जी के इन मंत्रों का जाप (Akshaya Tritiya 2026 Live)
ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये, धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥
ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं कुबेराय अष्ट-लक्ष्मी मम गृहे धनं पुरय पुरय नमः॥
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः॥
अक्षय तृतीया पर करें मां लक्ष्मी चालीसा (Maa Laxmi Chalisa Akshaya Tritiya 2026 Live)
दोहा
मातु लक्ष्मी करि कृपा करो हृदय में वास।
मनोकामना सिद्ध कर पुरवहु मेरी आस॥
सिंधु सुता विष्णुप्रिये नत शिर बारंबार।
ऋद्धि सिद्धि मंगलप्रदे नत शिर बारंबार॥ टेक॥
सोरठा
यही मोर अरदास, हाथ जोड़ विनती करूं।
सब विधि करौ सुवास, जय जननि जगदंबिका॥
॥ चौपाई ॥
सिन्धु सुता मैं सुमिरौं तोही। ज्ञान बुद्धि विद्या दो मोहि॥
तुम समान नहिं कोई उपकारी। सब विधि पुरबहु आस हमारी॥
जै जै जगत जननि जगदम्बा। सबके तुमही हो स्वलम्बा॥
तुम ही हो घट घट के वासी। विनती यही हमारी खासी॥
जग जननी जय सिन्धु कुमारी। दीनन की तुम हो हितकारी॥
विनवौं नित्य तुमहिं महारानी। कृपा करौ जग जननि भवानी।
केहि विधि स्तुति करौं तिहारी। सुधि लीजै अपराध बिसारी॥
कृपा दृष्टि चितवो मम ओरी। जगत जननि विनती सुन मोरी॥
ज्ञान बुद्धि जय सुख की दाता। संकट हरो हमारी माता॥
क्षीर सिंधु जब विष्णु मथायो। चौदह रत्न सिंधु में पायो॥
चौदह रत्न में तुम सुखरासी। सेवा कियो प्रभुहिं बनि दासी॥
जब जब जन्म जहां प्रभु लीन्हा। रूप बदल तहं सेवा कीन्हा॥
स्वयं विष्णु जब नर तनु धारा। लीन्हेउ अवधपुरी अवतारा॥
तब तुम प्रकट जनकपुर माहीं। सेवा कियो हृदय पुलकाहीं॥
अपनायो तोहि अन्तर्यामी। विश्व विदित त्रिभुवन की स्वामी॥
तुम सब प्रबल शक्ति नहिं आनी। कहं तक महिमा कहौं बखानी॥
मन क्रम वचन करै सेवकाई। मन- इच्छित वांछित फल पाई॥
तजि छल कपट और चतुराई। पूजहिं विविध भांति मन लाई॥
और हाल मैं कहौं बुझाई। जो यह पाठ करे मन लाई॥
ताको कोई कष्ट न होई। मन इच्छित फल पावै फल सोई॥
त्राहि- त्राहि जय दुःख निवारिणी। त्रिविध ताप भव बंधन हारिणि॥
जो यह चालीसा पढ़े और पढ़ावे। इसे ध्यान लगाकर सुने सुनावै॥
ताको कोई न रोग सतावै। पुत्र आदि धन सम्पत्ति पावै।
पुत्र हीन और सम्पत्ति हीना। अन्धा बधिर कोढ़ी अति दीना॥
विप्र बोलाय कै पाठ करावै। शंका दिल में कभी न लावै॥
पाठ करावै दिन चालीसा। ता पर कृपा करैं गौरीसा॥
सुख सम्पत्ति बहुत सी पावै। कमी नहीं काहू की आवै॥
बारह मास करै जो पूजा। तेहि सम धन्य और नहिं दूजा॥
प्रतिदिन पाठ करै मन माहीं। उन सम कोई जग में नाहिं॥
बहु विधि क्या मैं करौं बड़ाई। लेय परीक्षा ध्यान लगाई॥
करि विश्वास करैं व्रत नेमा। होय सिद्ध उपजै उर प्रेमा॥
जय जय जय लक्ष्मी महारानी। सब में व्यापित जो गुण खानी॥
तुम्हरो तेज प्रबल जग माहीं। तुम सम कोउ दयाल कहूं नाहीं॥
मोहि अनाथ की सुधि अब लीजै। संकट काटि भक्ति मोहि दीजे॥
भूल चूक करी क्षमा हमारी। दर्शन दीजै दशा निहारी॥
बिन दरशन व्याकुल अधिकारी। तुमहिं अक्षत दुःख सहते भारी॥
नहिं मोहिं ज्ञान बुद्धि है तन में। सब जानत हो अपने मन में॥
रूप चतुर्भुज करके धारण। कष्ट मोर अब करहु निवारण॥
कहि प्रकार मैं करौं बड़ाई। ज्ञान बुद्धि मोहिं नहिं अधिकाई॥
रामदास अब कहाई पुकारी। करो दूर तुम विपति हमारी॥
दोहा
त्राहि त्राहि दुःख हारिणी हरो बेगि सब त्रास।
जयति जयति जय लक्ष्मी करो शत्रुन का नाश॥
रामदास धरि ध्यान नित विनय करत कर जोर।
मातु लक्ष्मी दास पर करहु दया की कोर॥
