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अक्षय तृतीया पूजा विधि: देवी लक्ष्मी के इस मंत्र का जाप करने से मिलेगी समृद्धि

Akshaya Tritiya Puja Vidhi: अक्षय तृतीया पर भारतीय पौराणिक काल की बहुत सी महत्वपूर्ण घटनाएं घटित हुई हैं जो इस तिथि की महत्ता को और भी बढ़ता हैं। जैन समुदाय के लोगों का मानना है कि इस दिन भगवान परशुराम का जन्म हुआ था और इसलिए अक्षय तृतीया को वह परशुराम जयंती के रूप में मनाते हैं।

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अखा तीज या अक्षय तृतीया का पर्व हिन्दुओं और जैनियों द्वारा मनाया जाता है। हिन्दू कैलेंकर के अनुसार वैशाख महीने में शुक्ल पक्ष की तृतीया को अक्षय तृ‍तीया कहा जाता है, इस साल यह त्योहार 28 अप्रैल को मनाया जाएगा। इस दिन सूर्य और चंद्रमा अपने उच्च प्रभाव में होते हैं। इस दिन ज्यादातर लोग शुभ काम जैसे विवाह,निर्माण कार्य, सोना और संपति खरीदने में विश्वास रखते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन किए गए दान पुण्य के कर्म का फल बेकार नहीं जाता। पुण्य की प्राप्ति के लिए लोग इस दिन हवन, यज्ञ और दान आदि जैसे कार्य करते हैं ताकि उन्हें अक्षय पुण्य की प्राप्ति हो।

अक्षय का मतलब है जिसका क्षय ना हो अथवा जो कभी नष्ट ना हो। अक्सर शुभ कामों की शुरूआत के पंचांग देखा जाता हैं। लेकिन इस दिन बिना मुहुर्त विचारे आप कोई भी शुभ कार्य जैसे विवाह, निर्माण, यज्ञ, दान, स्वर्ण या संपत्ति की खरीदारी, आदि कर सकते है। अक्षय तृतीया पर भारतीय पौराणिक काल की बहुत सी महत्वपूर्ण घटनाएं घटित हुई हैं जो इस तिथि की महत्ता को और भी बढ़ता हैं।

जैन समुदाय के लोगों का मानना है कि इस दिन भगवान परशुराम का जन्म हुआ था और इसलिए अक्षय तृतीया को वह परशुराम जयंती के रूप में मनाते हैं। ऐसा भी कहा जाता है कि भगवान गणेश और ऋषि वेद व्यास ने महाकाव्य महाभारत लिखने की शुरूआत भी इसी दिन की थी। इसके अलावा य​ह भी कहा जाता है कि त्रेता युग का आरंभ हुआ था।

इस दिन लक्ष्मी पूजा का विशेष महत्व होता है। देवी लक्ष्मी को धन की देवी भी कहा जाता है। सुख समृद्धि के लिए इस लोगों देवी लक्ष्मी के साथ कुबेर की पूजा भी करते हैं। कहा जाता है कि इस दिन धन के देवता कुबेर ने देवी लक्ष्मी पूजा की थी जिसके बाद उन्हें स्थायी धन और समृद्धि उपहार में मिला। यही कारण है कि इस दिन शादी, सोना खरीदना और नए काम की शुरूआत करना शुभ माना जाता है।
इस दिन कैसे करें माता लक्ष्मी पूजा

ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ
माता लक्ष्मी की पूजा करते वक्त सात बार इस मंत्र का उच्चारण करें। इससे आपको सुख और समृद्धि मिलेगी।

देवी लक्ष्मी की पूजा करते वक्त् साफ सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उनकी पूजा के लिए कमल के फूल का विशेष महत्व होता है।

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