Akshay Tritiya 2026, Kuber Ji Aarti: हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया का विशेष महत्व माना जाता है। इस वर्ष अक्षय तृतीया का पर्व 19 अप्रैल को मनाया जा रहा है। इस शुभ अवसर पर मां लक्ष्मी के साथ भगवान कुबेर की पूजा का विशेष विधान है। कुबेर जी को सभी देवताओं का कोषाध्यक्ष माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, धन की देवी लक्ष्मी ने समस्त धन-संपत्ति का लेखा-जोखा भगवान कुबेर को सौंपा है। इसलिए कहा जाता है कि जो व्यक्ति सच्चे मन और श्रद्धा से कुबेर देव की आराधना करता है, उसकी आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस पावन दिन पर कुबेर भगवान की आरती और मंत्रों का पाठ करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। आइए जानते हैं अक्षय तृतीया के मौके पर कुबेर जी से कौन सी आरती का पाठ करें…
कुबेर जी की आरती
ॐ जय यक्ष कुबेर हरे,
स्वामी जय यक्ष जय यक्ष कुबेर हरे।
शरण पड़े भगतों के,
भण्डार कुबेर भरे।
॥ ॐ जय यक्ष कुबेर हरे…॥
शिव भक्तों में भक्त कुबेर बड़े,
स्वामी भक्त कुबेर बड़े।
दैत्य दानव मानव से,
कई-कई युद्ध लड़े ॥
॥ ॐ जय यक्ष कुबेर हरे…॥
स्वर्ण सिंहासन बैठे,
सिर पर छत्र फिरे,
स्वामी सिर पर छत्र फिरे।
योगिनी मंगल गावैं,
सब जय जय कार करैं॥
॥ ॐ जय यक्ष कुबेर हरे…॥
गदा त्रिशूल हाथ में,
शस्त्र बहुत धरे,
स्वामी शस्त्र बहुत धरे।
दुख भय संकट मोचन,
धनुष टंकार करे॥
॥ ॐ जय यक्ष कुबेर हरे…॥
भांति भांति के व्यंजन बहुत बने,
स्वामी व्यंजन बहुत बने।
मोहन भोग लगावैं,
साथ में उड़द चने॥
॥ ॐ जय यक्ष कुबेर हरे…॥
यक्ष कुबेर जी की आरती,
जो कोई नर गावे,
स्वामी जो कोई नर गावे ।
कहत प्रेमपाल स्वामी,
मनवांछित फल पावे।
॥ इति श्री कुबेर आरती ॥
अक्षय तृतीय पर करें कुबेर जी के इन मंत्रों का जाप
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः॥”
कुबेर मंत्र:
“ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये,
धनधान्य समृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥”
कुबेर-लक्ष्मी मंत्र:
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्रीं कुबेराय अष्ट-लक्ष्मी मम गृहे धनं पुरय पुरय नमः॥
डिसक्लेमर- यह लेख पूरी तरह से धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। जनसत्ता इसकी सत्यता या इससे होने वाले किसी भी लाभ-हानि की पुष्टि नहीं करता है। अधिक जानकारी के लिए पंचांग, शास्त्र या फिर किसी पंडित से अवश्य जानकारी लें।
