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Ahoi Ashtami Puja Vidhi, Shubh Muhurat, Katha And Aarti: अहोई अष्टमी व्रत की संपूर्ण कथा और आरती यहां पढ़ें

Ahoi Mata Puja Vidhi, Katha And Aarti : ये व्रत माताएं अपनी संतान के जीवन में हमेशा सुख और समृद्धि बनाए रखने के लिए करती हैं। संतान प्राप्ति के लिए भी इस व्रत का खास महत्व माना जाता है।

Author नई दिल्ली | Updated: October 21, 2019 6:49 PM
Ahoi Ashtami 2019: अहोई अष्टमी व्रत की संपूर्ण कथा पढ़ें यहां।

Ahoi Ashtami Fast 2019 Date, Vrat Katha in hindi, Aarti: 21 अक्टूबर को अहोई अष्टमी का व्रत है। ये व्रत माताएं अपनी संतान के जीवन में हमेशा सुख और समृद्धि बनाए रखने के लिए करती हैं। संतान प्राप्ति के लिए भी इस व्रत का खास महत्व माना जाता है। ये पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है। इस दिन माता पार्वती के अहोई स्वरूप की अराधना की जाती है। पुत्र के लिए रखे जाने वाले इस व्रत में पूरे दिन व्रत रखकर रात में तारों को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है। जानिए इस व्रत की पूजा विधि, व्रत कथा और आरती…

अहोई अष्टमी पर मां पार्वती की ऐसे करें पूजा, जानिए मंत्र

अहोई अष्टमी शुभ मुहूर्त (Ahoi Ashtami Shubh Muhurat) :

अहोई अष्टमी सोमवार, अक्टूबर 21, 2019 को
अहोई अष्टमी पूजा मुहूर्त – 05:22 पी एम से 06:38 पी एम तक
अवधि – 01 घण्टा 16 मिनट्स
तारों को देखने के लिये साँझ का समय – 05:49 पी एम
अहोई अष्टमी के दिन चन्द्रोदय समय – 11:29 पी एम
अष्टमी तिथि प्रारम्भ – अक्टूबर 21, 2019 को 06:44 ए एम बजे
अष्टमी तिथि समाप्त – अक्टूबर 22, 2019 को 05:25 ए एम बजे

Ahoi Ashtami 2019: Puja Vidhi, Muhurat Timings, Samagri, Mantra, Aarti

अहोई माता की ऐसे करें पूजा (Ahoi Ashtami Puja Vidhi/Vrat Vidhi) :

– सुबह के समय जल्दी उठकर स्नान आदि कर लें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
– अब घर के मंदिर की दीवार पर गेरू और चावल से अहोई माता यानी मां पार्वती और स्याहु व उसके सात पुत्रों का चित्र बनाएं।
– पूजा के लिए आप चाहें तो बाजार में मिलने वाले पोस्टर का भी इस्तेमाल कर सकती हैं।
– अब एक नया मटका लें उसमें पानी भरकर रखें और उस पर हल्दी से स्वास्तिक बनाएं, अब मटके के ढक्कन पर सिंघाड़े रखें।
– घर में मौजूद सभी बुजुर्ग महिलाओं के साथ मिलकर अहोई माता का ध्यान करें और उनकी व्रत कथा पढ़ें।
– सभी महिलाओं के लिए एक-एक स्वच्छ कपड़ा भी रखें।
– कथा के बाद इस कपड़े को उन महिलाओं को भेंट कर दें।
– रात के समय सितारों को जल से अर्घ्य दें और फिर ही उपवास को तोड़ें।

अहोई की कथा (Ahoi Ashtami Vrat Katha) :

प्राचीन काल में एक साहूकार था, जिसके सात बेटे और सात बहुएं थी। इस साहूकार की एक बेटी भी थी जो दीपावली में ससुराल से मायके आई थी। दीपावली पर घर को लीपने के लिए सातों बहुएं मिट्टी लाने जंगल में गई तो ननद भी उनके साथ चली गई। साहूकार की बेटी जहां मिट्टी काट रही थी, उस स्थान पर स्याहु (साही) अपने साथ बेटों से साथ रहती थी। मिट्टी काटते हुए गलती से साहूकार की बेटी की खुरपी के चोट से स्याहु का एक बच्चा मर गया। इस पर क्रोधित होकर स्याहु बोली- मैं तुम्हारी कोख बांधूंगी।

स्याहु के वचन सुनकर साहूकार की बेटी अपनी सातों भाभियों से एक-एक कर विनती करती हैं कि वह उसके बदले अपनी कोख बंधवा लें। सबसे छोटी भाभी ननद के बदले अपनी कोख बंधवाने के लिए तैयार हो जाती है। इसके बाद छोटी भाभी के जो भी बच्चे होते हैं वे सात दिन बाद मर जाते हैं। सात पुत्रों की इस प्रकार मृत्यु होने के बाद उसने पंडित को बुलवाकर इसका कारण पूछा। पंडित ने सुरही गाय की सेवा करने की सलाह दी।

सुरही सेवा से प्रसन्न होती है और उसे स्याहु के पास ले जाती है। रास्ते में थक जाने पर दोनों आराम करने लगते हैं। अचानक साहूकार की छोटी बहू की नजर एक ओर जाती हैं, वह देखती है कि एक सांप गरूड़ पंखनी के बच्चे को डंसने जा रहा है और वह सांप को मार देती है। इतने में गरूड़ पंखनी वहां आ जाती है और खून बिखरा हुआ देखकर उसे लगता है कि छोटी बहू ने उसके बच्चे को मार दिया है इस पर वह छोटी बहू को चोंच मारना शुरू कर देती है।

छोटी बहू इस पर कहती है कि उसने तो उसके बच्चे की जान बचाई है। गरूड़ पंखनी इस पर खुश होती है और सुरही सहित उन्हें स्याहु के पास पहुंचा देती है। वहां स्याहु छोटी बहू की सेवा से प्रसन्न होकर उसे सात पुत्र और सात बहू होने का आशीर्वाद देती है। स्याहु के आशीर्वाद से छोटी बहू का घर पुत्र और पुत्र वधुओं से हरा भरा हो जाता है। अहोई का अर्थ एक यह भी होता है ‘अनहोनी को होनी बनाना।’ जैसे साहूकार की छोटी बहू ने कर दिखाया था।

अहोई माता की आरती (Ahoi Mata Ki Aarti) :

जय अहोई माता जय अहोई माता ।
तुमको निसदिन ध्यावत हरी विष्णु धाता ।।

ब्रम्हाणी रुद्राणी कमला तू ही है जग दाता ।
जो कोई तुमको ध्यावत नित मंगल पाता ।।

तू ही है पाताल बसंती तू ही है सुख दाता ।
कर्म प्रभाव प्रकाशक जगनिधि से त्राता ।।

जिस घर थारो वास वही में गुण आता ।
कर न सके सोई कर ले मन नहीं घबराता ।।

तुम बिन सुख न होवे पुत्र न कोई पता ।
खान पान का वैभव तुम बिन नहीं आता ।।

शुभ गुण सुन्दर युक्ता क्षीर निधि जाता ।
रतन चतुर्दश तोंकू कोई नहीं पाता ।।

श्री अहोई माँ की आरती जो कोई गाता ।
उर उमंग अति उपजे पाप उतर जाता ।।

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