Ahoi Ashtami 2021 Vrat Katha And Puja Vidhi: अहोई अष्टमी व्रत की पौराणिक कथा, पढ़ें यहां

Ahoi Ashtami 2021 Vrat Katha, Story: मान्यता है कि अहोई अष्टमी की कथा पढ़ने से माता अहोई सदा आपकी संतान की रक्षा करती हैं।

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Ahoi Ashtami Vrat Katha: अहोई अष्टमी के दिन यहां से पढ़ें व्रत कथा

Ahoi Ashtami 2021 Vrat Katha, Vrat Puja Vidhi: अहोई अष्टमी का त्योहार महिलाएं अपने बच्चों की लंबी आयु, आरोग्य जीवन और सुख-समृद्धि के लिए करती हैं। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और तारों का दर्शन करके ही व्रत खोलती हैं। इस व्रत में शाम के समय विधि-विधान से पूजा की जाती है। जिसके बाद व्रत कथा सुनना बेहद अनिवार्य माना जाता है। मान्यता है कि अहोई अष्टमी की कथा पढ़ने से माता अहोई की कृपा सदा आपकी संतान पर बनी रहती है।

प्राचीन समय की बात है, एक साहुकार था, उसके सात बेटे और सात बहुएं थी। साहुकार की एक बेटी भी थी, जो दिवाली के मौके पर अपने ससुराल से मायके आई थी। दिवाली पर घर को लीपने के लिए सातों बहुएं मिट्टी लाने जंगल में गई तो ननद भी उनके साथ चल दी। साहुकार की बेटी जहां मिट्टी काट रही थी, उस स्थान पर स्याहु (साही) अपने साथ बेटों से साथ रहती थी। मिट्टी काटते वक्त गलती से साहूकार की बेटी की खुरपी से स्याहू के एक बच्चे को चोट लग गई, जिससे उसकी मृत्यु हो गई। अपने बच्चे की मौते पर स्याहु क्रोधित होकर बोली कि मैं तुम्हारी कोख बाधूंगी।

स्याहू के वचन सुनकर साहूकार की बेटी अपनी सातों भाभियों से एक-एक कर विनती करने लगी कि वह उसके बदले अपनी कोख बंधवा लें। हालांकि पांचों बड़ी भाभियों ने ऐसा करने से मना कर दिया। फिर सबसे छोटी भाभी ननद के बदले अपनी कोख बंधवाने के लिए तैयार हो गई। इसके बाद छोटी भाभी के जो भी बच्चे होते हैं वे सात दिन बाद मर जाते हैं। सात पुत्रों की इस प्रकार मृत्यु होने के बाद उसने पंडित को बुलवाकर इसका कारण पूछा तो पंडित ने सुरही गाय की सेवा करने की सलाह दी।

सुरही गाय सेवा से प्रसन्न हो गई और छोटी बहू को स्याहु के पास ले जाने लगी। रास्ते में थक जाने पर दोनों आराम करने लगती हैं तभी अचानक साहुकार की छोटी बहू की नजर एक ओर जाती है और वह देखती है कि एक सांप गरूड़ पंखनी के बच्चे को डंसने जा रहा है और वह सांप को मार देती है। इतने में गरूड़ पंखनी वहां आ जाती है और खून बिखरा हुआ देखकर उसे लगता है कि छोटी बहु ने उसके बच्चे के मार दिया है, इस पर वह छोटी बहू को चोंच मारना शुरू कर देती है।

छोटी बहू इस पर कहती है कि उसने तो उसके बच्चे की जान बचाई है। गरूड़ पंखनी इस पर खुश हो जाती है और सुरही सहित छोटी बहू को स्याहु के पास पहुंचा देती है। वहां स्याहु छोटी बहू की सेवा से प्रसन्न होकर उसे सात पुत्र और सात बहु होने का अशीर्वाद देती है। स्याहु के आशीर्वाद से छोटी बहु का घर पुत्र और पुत्र वधुओं से हरा-भरा हो जाता है।

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