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Ahoi Ashtami 2019 Puja Vidhi, Vrat Katha, Muhurat, Mantra, Aarti: अहोई अष्टमी व्रत कथा और आरती यहां पढ़ें

Ahoi Ashtami 2019 Puja Vidhi, Vrat Vidhi, Katha, Muhurat, Samagri, Mantra: आज पूजा करने का शुभ मुहूर्त शाम 05:47 पी एम से शाम 07:03 बजे तक का है। तारों को देखने के सांझ का समय 06:11 का है। अष्टमी तिथि की समाप्ति रात 11:47 पी एम पर हो जायेगी।

Author नई दिल्ली | Updated: Oct 21, 2019 7:30:56 pm
Ahoi Ashtami 2019 Puja Vidhi, Muhurat: यहां जानिए अहोई अष्टमी व्रत से जुड़ी सभी जानकारी।

Ahoi Ashtami 2019 Puja Vidhi, Vrat Vidhi, Katha, Muhurat, Samagri, Mantra: आज संतानों की लंबी आयु के लिए रखा जाना वाला अहोई व्रत है। ये व्रत खास तौर पर यूपी, दिल्ली, हरियाणा, मध्यप्रदेश और राजस्थान में रखा जाता है। कुछ महिलाएं संतान प्राप्ति के लिए भी इस व्रत को रखती है। इस दिन माता पार्वती के अहोई स्वरूप की पूजा की जाती है। आज पूजा करने का शुभ मुहूर्त शाम 05:47 पी एम से शाम 07:03 बजे तक का है। तारों को देखने के सांझ का समय 06:11 का है। अष्टमी तिथि की समाप्ति रात 11:47 पी एम पर हो जायेगी।

Ahoi Ashtami 2019: Puja Vidhi, Muhurat Timings, Samagri, Mantra, Aarti

अहोई अष्टमी के दिन माताएं भोर समय से लेकर शाम तक उपवास रखती हैं। शाम के समय तारों को देखने के बाद इस व्रत को संपन्न किया जाता है। यह व्रत निर्जला रखा जाता है। कई जगह ये व्रत चंद्र दर्शन के बाद खोला जाता है। लेकिन इस दिन चंद्रोदय काफी देर से होता है। आज चंद्रमा निकलने का समय 11:47 पीएम का है। पुराणों के अनुसार अहोई अष्टमी के व्रत को संतान से जोड़कर देखा जाता है और इस व्रत को करने से संतान संबंधी सभी परेशानियां दूर हो जाती है।

यहां जानिए अहोई अष्टमी व्रत की संपूर्ण कथा और आरती 

अहोई अष्टमी व्रत से जुड़ी सभी जानकारी जानने के लिए बने रहिए हमारे इस ब्लॉग पर…

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Highlights

    19:30 (IST)21 Oct 2019
    अहोई माता के व्रत मे काले गहरे नीले वस्त्र चढ़ाएं

    . अहोई एक खास व्रत है इस लिए इसमे ज्यादा सावधानी बरती जाती है। पूजा विधि के लिहाज से तभी फल मिलेगा जब आप स्नान कर ही पूजा अर्चना करें। अहोई माता के व्रत मे काले गहरे नीले वस्त्र चढ़ाएं

    18:08 (IST)21 Oct 2019
    अहोई के दिन राधाकुंड में स्नान का ये है महत्व

    अहोई व्रत के संदर्भ में राधाकुंड महत्व काफी ज्यादा है।अष्टमी के दिन राधाकुंड में लाखों दंपति स्नान कर संतान प्राप्ति की कामना करते हैं। मथुरा से करीब 26 किलोमीटर दूर राधाकुंड का विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि कार्तिक मास की अष्टमी पर राधाकुंड में स्नान करने वाली सुहागिनों को संतान की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि श्रीराधा जी ने इस कुंड को अपने कंगन से खोदा था, इसलिए इसे कंगन कुंड भी कहा जाता है।

    15:45 (IST)21 Oct 2019
    अहोई अष्टमी पूजन का मुहूर्त इतने बजे से होगा शुरू...

    अहोई अष्टमी पूजा मुहूर्त - 05:47 पी एम से 07:03 पी एमअवधि - 01 घण्टा 16 मिनट्सतारों को देखने के लिये साँझ का समय - 06:11 पी एमअहोई अष्टमी के दिन चन्द्रोदय समय - 11:47 पी एम

    14:42 (IST)21 Oct 2019
    अहोई कथा (Ahoi Katha) :

    प्राचीन काल में एक साहूकार था, जिसके सात बेटे और सात बहुएं थी। इस साहूकार की एक बेटी भी थी जो दीपावली में ससुराल से मायके आई थी। दीपावली पर घर को लीपने के लिए सातों बहुएं मिट्टी लाने जंगल में गई तो ननद भी उनके साथ चली गई। साहूकार की बेटी जहां मिट्टी काट रही थी, उस स्थान पर स्याहु (साही) अपने साथ बेटों से साथ रहती थी। मिट्टी काटते हुए गलती से साहूकार की बेटी की खुरपी के चोट से स्याहु का एक बच्चा मर गया। इस पर क्रोधित होकर स्याहु बोली- मैं तुम्हारी कोख बांधूंगी। पूरी कथा यहां पढ़ें।

    13:58 (IST)21 Oct 2019
    अहोई अष्टमी व्रत का महत्व :

    मुख्य रूप से अहोई अष्टमी का व्रत संतान सुख व संतान की समृद्धि के लिए करते हैं। इस दिन निसंतान दंपति भी संतान प्राप्ति की कामना के साथ यह व्रत करते हैं। दरअसल, इस दिन लोग देवी पार्वती के अहोई स्वरूप से अपनी संतान की सुरक्षा, लंबी आयु, उसके अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। 

    13:20 (IST)21 Oct 2019
    अहोई व्रत पूजा विधि:

    अहोई अष्टमी के दिन औरतें अहोई माता का चित्र बनाकर उसे दीवार पर लगाती है। एक बच्चे का चित्र भी बनाया जाता है। एक पानी से भरे कटोरे को माता के चित्र के सामने रखा जाता है। कटोरे पर स्वस्तिक का निशान बनाना चाहिए। पानी के साथ-साथ माता को चावल और दूध के चढ़ावा भी अर्पण किया जाता है। गेहूं से भरी थाली भी माता के चित्र के सामने रखी जानी चाहिए। पका हुआ खाना जैसे पुड़ियाँ हलवा चना इत्यादि भी माता को अर्पण करनी चाहिए। घर की बड़ी औरत या दादी को अहोई अष्टमी व्रत कथा परिवार के सामने पढनी चाहिए। कथा समाप्त होने के बाद परिवार के सदस्यों में प्रसाद को बांटना चाहिए।

    12:51 (IST)21 Oct 2019
    अगर बनाया हो चांदी की अहोई:

    अगर आप चांदी की अहोई बनाकर पूजा करते हैं जिसे बोलचाल की भाषा में स्याऊ कहा जाता है। इसमें आप चांदी के दो मोती डालकर विशेष पूजा करें। इसके लिए एक धागे में अहोई और दोनों चांदी के दानें डाल लें। इसके बाद अहोई की रोली, चावल और दूध से पूजा करें। साथ ही एक लोटे में जल भर कर सातिया बना लें। एक कटोरी में हलवा तथा रुपए का बायना निकालकर रख दें और सात दाने गेहूं के लेकर अहोई माता की कथा सुनने के बाद अहोई की माला गले में पहन लें, जो बायना निकाल कर रखा है उसे सास की चरण छूकर उन्हें दे दें। इसके बाद चंद्रमा को जल चढ़ाकर भोजन कर व्रत खोलें।

    12:24 (IST)21 Oct 2019
    अहोई अष्टमी: इस कुंड में स्नान से मिलता है संतान प्राप्ति का सुख

    संतान की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए रखा जाने वाला अहोई अष्टमी व्रत पूरे व्रज क्षेत्र सहित उत्तर भारत में काफी महत्व रखता है। मथुरा से 26 किलोमीटर दूर राधाकुंड में आज के दिन हजारों दंपति स्नान करते हैं। वह संतान प्राप्ति की मनोकामना के साथ इस कुंड में स्नान करने आते हैं। पौराणिक मान्यता है कि मां पार्वती को ये वरदान था कि अगर वह किसी बेऔलाद दंपति की प्रार्थना से प्रसन्न हो जाए तो उन्हें अवश्य संतान प्राप्ति होती है।

    11:30 (IST)21 Oct 2019
    अहोई माता की आरती :

    जय अहोई माता जय अहोई माता । तुमको निसदिन ध्यावत हरी विष्णु धाता ।।

    ब्रम्हाणी रुद्राणी कमला तू ही है जग दाता । जो कोई तुमको ध्यावत नित मंगल पाता ।।

    तू ही है पाताल बसंती तू ही है सुख दाता । कर्म प्रभाव प्रकाशक जगनिधि से त्राता ।।

    जिस घर थारो वास वही में गुण आता ।कर न सके सोई कर ले मन नहीं घबराता ।।

    तुम बिन सुख न होवे पुत्र न कोई पता । खान पान का वैभव तुम बिन नहीं आता ।।

    शुभ गुण सुन्दर युक्ता क्षीर निधि जाता । रतन चतुर्दश तोंकू कोई नहीं पाता ।।

    श्री अहोई माँ की आरती जो कोई गाता । उर उमंग अति उपजे पाप उतर जाता ।।

    11:04 (IST)21 Oct 2019
    अहोई अष्टमी पर अद्भुत योग :

    इस साल माता पार्वती के पति शिव को समर्पित दिन सोमवार को अहोई अष्टमी पड़ने से एक अद्भुत योग बन रहा है। सोमवार होने से इस बार इस दिन माता पार्वती की अपने भक्तों पर विशेष अनुकंपा बनी रहेगी।

    10:26 (IST)21 Oct 2019
    अहोई अष्टमी की पौराणिक कथा...

    एक साहूकार के सात बेटे और एक बेटी थी। साहूकार ने सातों बेटों और बेटी की शादी कर दी, और अब उसके सात बहू भी थी। बेटी जब एक बार मायके आई तो दीपावली पर घर रंगने के लिए वह बहुओं के साथ जंगल से मिट्टी लेने गई। जब वह मिट्टी काट रही थी। तभी गलती से बेटी की खुरपी की चोट से स्याहु का एक बच्चा मर गया। इस पर क्रोधित स्याहु ने बेटी को कभी मां न बनने का श्रप दे दिया। वह अपनी सातों भाभी से कहती है वह यह श्रप ले लें। लेकिन सबसे छोटी भाभी उसकी बात मानकर श्रप अपने ऊपर ले लेती है। इसके बाद उसके बच्चे जन्म लेते ही सातवें दिन मर जाते। इसके बाद वह सुरही गाय की सेवा करती हैं, और गाय उसकी सेवा से प्रसन्न होकर वरदान मांगने को कहती है। वह इस श्रप से मुक्ति मांगती हैं और गाय माता उसे इससे मुक्त कर देती हैं। इसके बाद वह अहोई माता की विधि विधान से पूजा करके उद्यापन करती हैं। इसके बाद उसे संतान की प्राप्ति होती है। अहोई का एक अर्थ अनहोनी को होनी बनाना भी है।

    09:53 (IST)21 Oct 2019
    अहोई अष्टमी पूजा मुहूर्त (Ahoi Ashtami Puja Muhurat) :

    अहोई अष्टमी सोमवार, अक्टूबर 21, 2019 कोअहोई अष्टमी पूजा मुहूर्त - 05:47 पी एम से 07:03 पी एमअवधि - 01 घण्टा 16 मिनट्सगोवर्धन राधा कुण्ड स्नान सोमवार, अक्टूबर 21, 2019 कोतारों को देखने के लिये साँझ का समय - 06:11 पी एमअहोई अष्टमी के दिन चन्द्रोदय समय - 11:47 पी एम

    अष्टमी तिथि प्रारम्भ - अक्टूबर 21, 2019 को 06:44 ए एम बजेअष्टमी तिथि समाप्त - अक्टूबर 22, 2019 को 05:25 ए एम बजे

    09:15 (IST)21 Oct 2019
    अहोई अष्टमी व्रत किन्हें करना चाहिए...

    यह व्रत संतानहीन युगल के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है अथवा जिन महिलाओं को गर्भधारण में परेशानी हो रही हैं अथवा जिन महिलाओं का गर्भपात हो गया हो, उन्हें पुत्र प्राप्ति के लिए अहोई माता व्रत करना चाहिए।

    08:32 (IST)21 Oct 2019
    अहोई अष्टमी व्रत का महत्व :

    इस दिन को कृष्णा अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। ये व्रत खासतौर से उत्तर भारत में मनाया जाता है। यूपी, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्यप्रदेश में ये व्रत महत्वपूर्ण माना जाता है।अहोई अष्टमी के पर्व पर माताएं अपने पुत्रों के कल्याण के लिए अहोई माता व्रत रखती हैं। परंपरागत रूप में यह व्रत केवल पुत्रों के लिए रखा जाता था, लेकिन अपनी सभी संतानों के कल्याण के लिए आजकल यह व्रत रखा जता है। माताएं, बहुत उत्साह से अहोई माता की पूजा करती हैं तथा अपनी संतानों की दीर्घ, स्वस्थ्य एवं मंगलमय जीवन के लिए प्रार्थना करती हैं। तारों अथवा चंदमा के दर्शन तथा पूजन कर के ये व्रत पूर्ण किया जाता है।

    08:01 (IST)21 Oct 2019
    Ahoi Ashtami Vrat Vidhi (अहोई अष्टमी व्रत विधि) :

    अहोई का अर्थ अनहोनी को होनी बनाना होता है। इस दिन पार्वती माता के अहोई स्वरूप की पूजा की जाती है। अहोई अष्टमी का व्रत दिनभर निर्जल रहकर किया जाता है और शाम को पूजा करके कथा सुनने के बाद तारों को अर्घ्य देकर ये व्रत पूरा किया जाता है। कई जगह ये व्रत चंद्र दर्शन के बाद भी खोला जाता है। इस दिन महिलाएं शाम को दीवार पर अहोई माता का चित्र बनाती हैं और उसके आसपास सेई व सेई के बच्चे भी बनाती हैं। कुछ लोग बाजार में कागज के अहोई माता के चित्र लाकर उनकी पूजा भी करते हैं। कुछ महिलाएं पूजा के लिए चांदी की एक अहोई भी बनाती हैं, जिसे स्याऊ कहते हैं और उसमें चांदी के दो मोती डालकर विशेष पूजन किया जाता है।

    07:49 (IST)21 Oct 2019
    अहोई माता की आरती (Ahoi Mata Aarti)

    जय अहोई माता, जय अहोई माता!तुमको निसदिन ध्यावत हर विष्णु विधाता। टेक।। ब्राह्मणी, रुद्राणी, कमला तू ही है जगमाता।सूर्य-चंद्रमा ध्यावत नारद ऋषि गाता।। जय।।माता रूप निरंजन सुख-सम्पत्ति दाता।।जो कोई तुमको ध्यावत नित मंगल पाता।। जय।।तू ही पाताल बसंती, तू ही है शुभदाता।कर्म-प्रभाव प्रकाशक जगनिधि से त्राता।। जय।।

    जिस घर थारो वासा वाहि में गुण आता।।कर न सके सोई कर ले मन नहीं धड़काता।। जय।।तुम बिन सुख न होवे न कोई पुत्र पाता।खान-पान का वैभव तुम बिन नहीं आता।। जय।।शुभ गुण सुंदर युक्ता क्षीर निधि जाता।रतन चतुर्दश तोकू कोई नहीं पाता।। जय।।श्री अहोई मां की आरती जो कोई गाता।उर उमंग अति उपजे पाप उतर जाता।।

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