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सूर्य ग्रहण 2018: जानें कैसे कम कर सकते हैं ग्रहण का नकारात्मक प्रभाव

Surya Grahan 2018, Solar Eclipse 2018 in India: ग्रहण के बाद पूजा घर में जाकर सबसे पहले सभी देवी-देवताओं की मूर्तियों पर गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें। इसके बाद पितरों को याद करके उन्हें अन्न अर्पित करें।

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Solar Eclipse 2018/Surya Grahan 2018: साल 2018 का पहला आंशिक सूर्य ग्रहण 15 फरवरी को होने जा रहा है। इससे पहले 31 जनवरी को पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण हुआ था। गुरुवार को हिंदू कैलेंडर के अनुसार अमावस्या का दिन है। 15 दिन के भीतर ही ये दूसरा ग्रहण लगने जा रहा है। शास्त्रों के अनुसार पूर्ण और आंशिक किसी भी ग्रहण को शुभ नहीं माना जाता है। मान्यता है कि किसी भी ग्रहण का प्रभाव 108 दिनों तक रहता है। ग्रहण के दौरान शास्त्रों में कुछ कार्यों को वर्जित माना जाता है। इस दिन शिशु और गर्भवती महिलाओं का खास ध्यान रखा जाता है। बुधवार को होने वाले ग्रहण को भारत के लोग नहीं देख पाएंगे। यह ग्रहण दक्षिणी अमेरिका, प्रशांत महासागर, चिली, ब्राजील और अंटार्कटिका और एशिया के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा। भारत में यह ग्रहण दिखाई तो नहीं देगा लेकिन इसका प्रभाव हर जगह होगा।

ग्रहण के समय जो वस्त्र पहने हों उन्हें सूतक खत्म होने के बाद किसी जरुरतमंद को दान कर दें। स्नान करने और स्वच्छ कपड़े पहनने के बाद ही पूजा घर में जाएं। पूजा घर में जाकर सबसे पहले सभी देवी-देवताओं की मूर्तियों पर गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें। इसके बाद पितरों को याद करें और उन्हें अन्न अर्पित करें। इस अन्न को किसी गरीब को दें। घर के पास स्थित मंदिर में जाकर दीपक जलाएं इससे ग्रहण की नकारात्मकता दूर हो जाएगी। घर में सफाई के बाद धूप और अगरबत्ती जलाएं। सूतक काल खत्म होने के बाद अवश्य ही इन कामों को कर लेना चाहिए। ग्रहण के दौरान बनाया हुआ भोजन करने से बचें, ये सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है।

बुधवार को होने वाले ग्रहण को भारत के लोग नहीं देख पाएंगे। यह ग्रहण दक्षिणी अमेरिका, प्रशांत महासागर, चिली, ब्राजील और अंटार्कटिका और एशिया के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा। ग्रहण के नकारात्मक प्रभावों से बचने के लिए गर्भवती महिलाओं को तुलसी का पत्ता जीभ पर रख मंत्रों का जाप करना चाहिए और हनुमान चालीसा या दुर्गा स्तुति का पाठ करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दिन विशेष सावधानी बरतनी चाहिए और इस दौरान सोना नहीं चाहिए। ऐसे में भगवान का भजन और मंत्रों का उच्चारण किया जाता है और मन में किसी के भी प्रति शक-संदेह नहीं करना चाहिए।

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