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अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, जानिये इससे जुड़ी खास बातें और पौराणिक मान्यताएं

Purushottam Maas 2020: यह मास भगवान विष्णु की आराधना के लिए अत्यंत लाभकारी माना गया है। मान्यता है कि अधिक मास में भगवान विष्णु की आराधना का फल दस गुना अधिक मिलता है।

Adhik Maas 2020, Purushottam Maas 2020, purushottam maas 2020 date, adhik maas kya hota hai, Mal Maasभगवान विष्णु ने अधिक मास को अपनाया और इसे अपना ही एक नाम दिया – पुरुषोत्तम मास।

Adhik Maas 2020: हर साल पितृपक्ष समाप्त होने के अगले दिन शारदीय नवरात्रि का आरंभ हो जाता है। लेकिन 2020 में ऐसा ना होने की वजह से कई लोग हैरान हैं और जानना चाहते हैं कि इसके पीछे क्या वजह है। बता दें कि हिंदू पंचांग के मुताबिक हर 3 साल में चंद्रमा और सूर्य के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए अधिक मास (Adhik Maas 2020) आता है। इस मास को मल मास और पुरुषोत्तम मास (Purushottam Maas 2020) भी कहा जाता है। इस साल अधिक मास 18 सितंबर शुक्रवार से शुरू होकर 16 अक्तूबर, शुक्रवार तक रहेगा।

तो इसलिए नाम पड़ा पुरुषोत्तम: दरअसल यह मास भगवान विष्णु की आराधना के लिए अत्यंत लाभकारी माना गया है। मान्यता है कि अधिक मास में भगवान विष्णु की आराधना का फल दस गुना अधिक मिलता है। कहते हैं कि जब सभी महीनों को देवताओं में बांटा जा रहा था। तब सभी देवी-देवताओं ने अधिक मास को अपनाने से मना कर दिया। उनका तर्क था कि इस दौरान कोई भी मांगलिक कार्य नहीं होता है इसलिए वह इस मास को नहीं अपनाना चाहते हैं। सभी देवी-देवता भगवान विष्णु से विनती करने लगे कि वह इस मास को अपनाएं। भगवान विष्णु ने बात मान कर अधिक मास को अपनाया और इसे अपना ही एक नाम दिया – पुरुषोत्तम मास।

पुराणों में भी है अधिक मास का महत्व (Adhik Maas Importance/ Purushhottam Maas Importance): अधिक मास के महत्व के तौर पर एक पौराणिक कथा भी सुनाई जाती है। कहते हैं कि प्राचीन काल में हिरण्यकश्यप नामक दैत्य था। वे स्वयं को अमर करना चाहता था। भगवान विष्णु को वह अपना शत्रु मानता था। उसने ब्रह्मा जी से अमरता का वरदान पाने के लिए तपस्या की। ब्रह्मा जी उसकी तपस्या से प्रकट हुए और उनसे अमरता के अलावा कोई और वरदान मांगने को कहा। हिरण्यकश्यप ने चतुरता दिखाते हुए कहा कि मेरी मृत्यु 12 महीनों में नहीं होनी चाहिए जिस पर ब्रह्मा जी ने तथास्तु कहा।

हिरण्यकश्यप ब्रह्मा जी का यह वरदान सुनकर प्रसन्न हो गया कि अब वह अमर है। अमरता के वरदान की वजह से वह धरती पर कब्जा करने के लिए लगातार पाप कर्म करने लगा। भगवान विष्णु ने उसके बढ़ते पापों को देखकर उसका वध करने के लिए तेरहवां महीना यानी अधिक मास बनाया। इसी माह में भगवान विष्णु ने भक्तराज प्रहलाद के पिता दैत्य हिरण्यकश्यप का वध कर दिया।

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