Adhik Maas 2026: हिंदू धर्म में अधिक मास का विशेष महत्व है। शास्त्रों में इसकी महिमा अत्यंत महान बताई गई है। इसे पुरुषोत्तम मास कहा गया है क्योंकि भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं इसे अपना नाम प्रदान किया था। शास्त्रों के अनुसार कहे, तो जिस महीने में सूर्य का राशि परिवर्तन नहीं होता, अर्थात कोई संक्रांति नहीं पड़ती, वह अधिक मास कहलाता है। इस मास में किया गया छोटा सा भी काम आपको काफी पुण्य दिला सकता है। भगवान श्रीकृष्ण ने मल मास से कहा कि संसार में लोग मुझे पुरुषोत्तम कहते हैं, इसलिए आज से तुम्हें भी पुरुषोत्तम मास कहा जाएगा और इस मास में किए गए श्रेष्ठ कार्य अनेक गुना फल प्रदान करेंगे। आइए जानते हैं अधिक मास कब से आरंभ हो रहा है और इस पूरे मास किन कामों को करना चाहिए और किन कामों को नहीं…

बता दें कि अधिक मास के दौरान विवाह, यज्ञ, देव प्रतिष्ठा, मुंडन संस्कार, गृह प्रवेश, भूमि खरीदना, संपत्ति का विक्रय, नई गाड़ी खरीदना तथा अन्य शुभ मांगलिक कार्य करने की मनाही होती है। इस दौरान जाप, तप करने का विशेष महत्व है।

कब से शुरू होगा अधिक मास 2026?

द्रिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में अधिक मास 17 मई, रविवार से शुरू हो रहा है, जो 15 जून 2026, सोमवार को समाप्त होगा। इस दौरान किसी भी तरह से मांगलिक और शुभ कार्यों  को करने का मनाही होती है।

क्यों होता है अधिक मास?

अधिक मास लगने का कारण हिंदू पंचांग की गणना पद्धति में छिपा है, जो चंद्र कैलेंडर पर आधारित होती है। एक सौर वर्ष में लगभग 365 दिन होते हैं, जबकि चंद्र वर्ष करीब 354 दिनों का होता है। इस तरह हर साल लगभग 11 दिनों का अंतर बन जाता है। यह अंतर धीरे-धीरे बढ़ते हुए करीब 32 महीने 16 दिन में लगभग एक पूरे महीने के बराबर हो जाता है। तब इस अंतर को संतुलित करने के लिए पंचांग में एक अतिरिक्त महीना जोड़ दिया जाता है। इसी अतिरिक्त महीने को अधिक मास, मलमास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है।

अधिक मास में करें ये काम

अधिक मास में कुल चार कार्य करने में अधिक जोर दिया गया है। वह है दान, व्रत, जप और दीपदान। शास्त्रों के अनुसार, इस मास में ये करने से करोड़ों गुना फल प्राप्त होता है। इसलिए अपनी योग्यता के अनुसार अन्न दान, वस्त्र दान, सेवा सहित अन्य शुभ कार्यों में धन को खर्च करें। इससे आपका यश बढ़ेगा और सुख-समृद्धि की प्राप्ति हो सकती है।

अधिक मास के दौरान दीपदान करना काफी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस मास दीपदान करने से जीवन का अज्ञान दूर होता है और ज्ञान का प्रकाश प्राप्त होता है। इसके साथ ही जीवन में सकारात्मक ऊर्जा की बढ़ोतरी हो सकती है। इसलिए अधिक मास के दौरान सुबह या फिर शाम के समय मंदिर में जाकर दीपदान अवश्य करें। अगर आप मंदिर नहीं जा सकते हैं, तो घर पर ही तुलसी या बेलपत्र के समक्ष दीपक जलाएं। इससे शुभ माना जाता है।

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Adhik Maas 2026: अधिक मास नियम 2026 (Image Source- ai)

मलमास के दौरान कथाओं को सुनना या फिर उनका पाठ करना लाभकारी माना जाता है। इसलिए इस माह श्रीमद्भागवत, भगवत गीता, शिवपुराण, गणेश पुराण या फिर अन्य पवित्र ग्रंथों का पाठ और श्रवण कर सकते हैं। इससे आपके सभी पापों का नाश हो सकता है।

अधिक मास मास के दौरान मंदिर अवश्य जाना चाहिए। इससे शुभ फलों की प्राप्ति हो सकती है। इस मास में किया गया हर शुभ कार्य अधिक फल देता है। साल भर की साधना और अधिक मास की साधना में विशेष अंतर बताया गया है।

अधिक मास में जप, तप, स्तुति, मंत्र आदि का जाप करना लाभकारी माना जाता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति रोजाना एक माला जप करता है, उसे इस समय अधिक जप करने का प्रयास करना चाहिए। स्तुति पाठ, शिव भक्ति, गीता पाठ, भागवत श्रवण और भगवान के नाम का स्मरण इस मास में अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।

अधिक मास के दौरान न करें ये काम

अधिक मास के दौरान कुछ चीजों को करने का मनाही होती है। आइए जानते हैं इस दौरान किन कामों को करने से बचना चाहिए।

  • मलमास के दौरान विवाह या फिर अन्य मांगलिक कार्य करने की मनाही होती है।
  • अधिक मास के दौरान गृह प्रवेश या फिर नए घर का निर्माण प्रारंभ करने से बचना चाहिए।
  • अधिक मास के दौरान  भूमि, मकान या नई संपत्ति खरीदना से लेकर नई गाड़ी खरीदने से बचना चाहिए।
  • अधिक मास के दौरान ऐसे तीर्थ स्थान में नहीं जाना चाहिए। जहां पर आप पहली बार जा रहे हो।
  • किसी नए व्रत यानी एकादशी, प्रदोष व्रत या कोई अन्य व्रत का आरंभ अधिक मास में नहीं करना चाहिए।
  • अगर आप कोई व्रत रखे हैं, तो उसका उद्यापन अधिक मास के दौरान नहीं करना चाहिए। इसे शुभ नहीं माना जाता है।
  • नया व्यवसाय या शुभ कार्य आरंभ अधिक मास के दौरान बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए।
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डिसक्लेमर- यह लेख पूरी तरह से ज्योतिषीय गणनाओं और मान्यताओं पर आधारित है। जनसत्ता इसकी सत्यता या इससे होने वाले किसी भी लाभ-हानि की पुष्टि नहीं करता है। अधिक जानकारी के लिए पंचांग, शास्त्र या फिर किसी पंडित से अवश्य जानकारी लें।