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जन्म के महीने के हिसाब से किसे धारण करना चाहिए कौन सा रत्न, जानिए

रत्नों को राशि और जन्म के महिने के अनुसार पहनने से फायदा मिलता है।

रत्न धारण करने से पहले ऊँ ह्रीं नम: मंत्र का जाप करना चाहिए।

हमारे शास्त्रों में रत्नों को महत्वपूर्ण बताया गया है। कहा जाता है कि रत्न बड़ी से बड़ी परेशानी को खत्म कर सकते हैं। ज्योतिषियों का कहना है कि रत्नों को सही समय और सही ग्रहों की सही स्थिति में ही पहनना चाहिए। रत्नों को राशि और जन्म के महिने के अनुसार पहनने से फायदा मिलता है। अगर कोई बिना विशेषज्ञों की सलाह के रत्न पहनता है तो रत्न पहनने का फल नहीं मिलता। आज हम आपके लिए लाएं हैं पंडित शशि मोहन बहल की किताब से रत्नों के बारें में खास जानकारी, जिसमें बताया गया है कि किस महिने में जन्में व्यक्ति को कौनसा रत्न पहनना चाहिए।

विशेषज्ञों का कहना है कि जनवरी में जन्में लोगों को गार्नेट धारण करना चाहिए। फरवरी में जन्में लोगों को ऐमीथिस्ट, मार्च में जन्में लोगों को ब्लड स्टोन या एक्वामेरीन, अप्रैल में जन्में लोगों को हीरा, सफेद जिरकन, मई में जन्में लोगों को पन्ना, जून में जन्में लोगों को मोती, बदल चन्द्रकान्त, जुलाई में जन्में लोगों को माणिक्य(माणक), अगस्त में जन्में लोगों को सारेडोनिक्स या पेरीडॉट, सितम्बर में जन्में लोगों को नीलम या नीली, अक्टूबर में जन्में लोगों को उपल, बदल या टूर्मेलीन, नवम्बर में जन्में लोगों को पीला, पुखराज या बदल सुनैला और दिसम्बर में जन्में लोगों को फिरोजा, बदल या लाजवर्त रत्न धारण करना चाहिए।

ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि रुद्राक्ष 14 तरह के होते हैं। रत्न धारण करने से पहले ऊँ ह्रीं नम: मंत्र का जाप करना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर रत्नों को किसी खास धातु के साथ पहना जाए तो इसका ज्यादा फल मिलता है। धातु के अनुसार रत्न को विशेष धातु से बनी अंगूठी में धारण करना चाहिए। लेकिन रत्न पहनते समय ध्यान रखना चाहिए कि रत्नों को विशेषज्ञों की सलाह पर ही पहनना चाहिए। हर राशि के लिए अलग-अलग रत्न होते हैं।

जानकार बताते हैं कि रत्नों को एक तय समय के बाद नहीं पहनना चाहिए। क्योंकि रत्नों की एक समय होती है। कुछ रत्नों को पांच साल तक पहना जा सकता है तो वहीं कुछ रत्नों को छह साल तक। अगर किसी रत्न को तय सीमा के बाद भी पहना जाता है तो उसका कोई असर नहीं होता।

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