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Chaitra Navratri 2019: कैसे हुई मां दुर्गा की उत्‍पत्ति, जानिए क्‍या कहता है मार्कण्डेय पुराण

Chaitra Navratri 2019: शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि के नौ दिन शक्ति की देवी दुर्गा को समर्पित है। इसलिए इन दिनों में देवी दुर्गा की उपासना की जाती है।

Author नई दिल्ली | Updated: April 6, 2019 8:34 AM
Chaitra Navratri 2019: देवी दुर्गा।

Chaitra Navratri 2019: चैत्र नवरात्रि 2019 पर इस बार अत्यंत शुभ संयोग बन रहे हैं। चैत्र नवरात्रि इस महीने 06 अप्रैल से शुरू हो रही है। यह चैत्र नवरात्रि चैत्र शुक्ल नवमी अर्थात 14 अप्रैल, रविवार तक मनाया जाएगा। साथ ही इसी चैत्र नवमी को भगवान राम का जन्म दिवस रामनवमी भी मनाई जाएगी। इसके अलावा चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से भारतीय नववर्ष भी शुरू हो रहा है। इस दृष्टि से भी यह चैत्र नवरात्रि बेहद खास है। शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि के नौ दिन शक्ति की देवी दुर्गा को समर्पित है। इसलिए इन दिनों में देवी दुर्गा की उपासना की जाती है। भक्त पूरी निष्ठा और भक्ति भाव से माता की आराधना करते है। मार्केण्डेय पुराण में देवी दुर्गा की उत्पत्ति का रोचक प्रसंग वर्णित है। आइए जानते हैं यह रोचक प्रसंग।

हिन्दू धर्म ग्रंथों में देवी दुर्गा की उपासना के लिए विशेष रूप से नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। नवरात्रि के त्योहार को साल में दो बार मनाया जाता है। देवी दुर्गा को हमलोग विभिन्न नामों जैसे काली, पार्वती, गौरी, सती, महामाया और महिषासुरमर्दिनी के नाम से जानते हैं। कहते हैं कि माँ दुर्गा का रूप पार्वती को शिव की अर्धांगिनी माना जाता है। देवी दुर्गा की उत्पत्ति का प्रसंग मर्केण्डेय पुराण में मिलता है। इस प्रसंग के अनुसार एक समय एक भैंसा अर्थात जो कि एक दानव था, महिषासुर के नाम से विख्यात था।

वह बड़ा शक्तिशाली था। वह सभी देवताओं का वध करना चाहता था। ताकि वह संसार में सर्वोच्च बन सके। इससे घबराकर सभी देवता सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा जी के पास गए और अपनी व्यथा ब्रह्मा जी को बताई। तब सभी ने सर्वसम्मति से अपनी शक्तियों से मिलाकर देवी दुर्गा का सृजन किया। देवी दुर्गा का सृजन सभी की शक्तियों को मिलाने से ही संभव था। ताकि महिषासुर का वध किया जा सके। मां देवी दुर्गा का स्वरूप बेहद आकर्षक है। उनकी मुख पर सौम्यता स्नेह स्पष्ट दिखता है। उनके दस हाथ हैं जिसमें हर एक में एक विशेष शस्त्र हैं। उन्हें हर भगवान और देवता ने कुछ न कुछ अवश्य दिया था।

भगवान शिव ने त्रिशूल, भगवान विष्णु ने चक्र, भगवान वायु ने तीर आदि उन्हें प्रदान किया था। मां दुर्गा की सवारी शेर है। जो हिमवंत पर्वत से प्राप्त हुआ था। देवी दुर्गा को महिषासुर का वध करने के लिए बनाया गया। बाद में देवी दुर्गा ने महिषासुर को मार डाला। देवी दुर्गा का यही स्वरूप अक्सर तस्वीरों और मूर्तियों में दिखया जाता है। महिषासुर को देवी दुर्गा ने अपने शेर शास्त्रों से मार डाला। इस प्रकार मां दुर्गा आज भी बुरी बाधाओं का नाश करने के लिए पूजी जाती है। इसलिए चैत्र नवरात्रि में इनकी उपासना शुभ फलदायी मानी जाती है।

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