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सद्गुरु के अनुसार जानिए, अच्छी सेहत के लिए इंसान क्या खाए और कितनी देर करें आराम

अधिक मात्र में भोजन करने से शरीर में जड़ता बढ़ जाती है। शरीर में एक बार जब जड़ता आ जाती है तो इंसान की नींद का कोटा बढ़ जाता है।

सद्गुरु जग्गी वासुदेव।

सद्गुरु जग्गी वासुदेव से कुछ विद्यार्थियों ने पूछा कि उन्हें किस तरह का भोजन करना चाहिए, ताकि उनका जीवन पूरी क्षमता तक पहुंच जाए। खासकर स्कूल या कॉलेज जाने वाले छात्र के लिए। इस प्रश्न का जवाब देते हुए सद्गुरु कहते हैं कि विद्यार्थियों को यह ध्यान रखना चाहिए कि भोजन कोई धर्म नहीं है। साथ ही भोजन कोई संस्कृति भी नहीं है। भोजन शरीर के लिए इंधन है। स्वाद को लेकर सांस्कृतिक पहलू हो सकते हैं। साथ ही समय के साथ इस पर धार्मिक रंगत भी चढ़ सकते हैं। परंतु मुख्यरूप से भोजन शरीर के लिए इंधन ही है।

सद्गुरु बताते हैं कि भोजन को यौगिक पद्धति में तमस, रजस और सत्व के रूप में देखते हैं। तमस का मतलब है जड़ता, रजस का मतलब है गतिविधियां, लेकिन कोई संतुलन नहीं। सत्व का मतलब है पूरी तरह से संतुलित ऊर्जा। जब छात्र पढ़ाई कर रहा होता है तो उसे एक प्रकार की संतुलित ऊर्जा की आवश्यकता होती है। यह इसलिए क्योंकि छात्रों को ऐसी चीज पर ध्यान केंद्रित करना होता है जिसमें उसकी स्वाभाविक नहीं रुचि है। जिसके लिए उन्हें एक संतुलित और स्थिर मन चाहिए जो कि एक खास तरह से खाने पर निर्भर करता है। विद्यार्थियों को अपना भोजन चबाकर खाना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि लार में इंजाइम होते हैं। जब भोजन चबाकर किया जाता है तो ऐसे में भोजन का 30-50 फीसदी भोजन मुंह में ही पाच जाता है। परंतु अभी जो लोग खाना खा रहे हैं उसमें अधिकतर बिना पचा या आंशिक रूप से नष्ट खाना ले रहे हैं। ऐसे में उसी मात्रा में ऊर्जा प्राप्त करने के लिए भोजन की जो मात्रा चाहिए वो बढ़ जाती है। साथ ही उतनी ऊर्जा पैदा करने के लिए जितना भोजन करना चाहिए वो बढ़ जाता है।

अधिक मात्र में भोजन करने से शरीर में जड़ता बढ़ जाती है। शरीर में एक बार जब जड़ता आ जाती है तो इंसान की नींद का कोटा बढ़ जाता है। वहीं नींद के बारे में सद्गुरु कहते हैं कि यह जरूरी नहीं है कि जबरदस्ती जागते रहना चाहिए। अगर हम सही खाएं और अपने शरीर के साथ कुछ जरूरी चीजें करें तो 3-4 हफ्तों में नींद की जरूरत 2-3 घंटे बड़ी आसानी से कम कर सकते हैं। इसके लिए हमें चाहिए कि सचेतन होकर खाएं और ठीक से बैठना सीख लें। इसके अलावा विद्यार्थी वर्ग को चाहिए कि वह अपने भोजन का तीस फीसदी हिस्सा कच्चे पदार्थ ले। ये सब्जी, अंकुरित चना या फल हो सकता है। जीवित खाने पर इंसान की मानसिक अवस्था, फोकस और नींद का कोटा और सजगता ठीक रहता है। अगर मांसाहारी भोजन करना ही पड़े तो हमें वो चीज खानी चाहिए हमसे सबसे दूर है। आमतौर पर मछली और पाने के जीव हमसे सबसे दूर हैं। ऐसे में मछली खाना के लिए मछली सबसे अच्छी चीज होगी।

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