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महात्मा बुद्ध के अनुसार चार प्रकार के होते हैं पुरुष

कहते हैं कि 29 वर्ष की आयु में महात्मा बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के लिए अपना घर परिवार त्याग दिया। जिसके बाद 35 वर्ष की आयु में गया के निकट महात्मा बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई।

Author नई दिल्ली | February 10, 2019 3:09 PM
महात्मा बुद्ध।

बौद्ध धर्म की स्थापना महात्मा बुद्ध ने की थी। इनके बचपन का नाम सिद्धार्थ था। महात्मा बुद्ध की माता का नाम महामाया और पिता का नाम शुद्धोदन था, जो शक्य वंश के राजा थे। इसलिए बुद्ध को शाक्य मुनि भी कहा जाता है। महात्मा बुद्ध का विवाह यशोधरा नाम की कन्या से हुआ था। जिससे उन्हें एक पुत्र हुआ, जिसका नाम राहुल था। कहा जाता है कि एक बार राज्य भ्रमण के दौरान एक बीमार व्यक्ति, एक जर्जर शरीर वाला व्यक्ति, एक मरा हुआ व्यक्ति और एक सन्यासी को देखकर सिद्धार्थ के मन में सांसरिक सुखों की व्यर्थता में विश्वास हो गया। कहते हैं कि 29 वर्ष की आयु में महात्मा बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के लिए अपना घर परिवार त्याग दिया। जिसके बाद 35 वर्ष की आयु में गया के निकट महात्मा बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई। आगे जानते हैं कि महात्मा बुद्ध के अनुसार कौन-कौन से चार प्रकार के मनुष्य होते हैं।

एक बार महात्मा बुद्ध प्रवचन दे रहे थे। उनके प्रवचन के बाद एक जिज्ञासु ने उनसे कहा कि ये महात्मा! आपने अपने प्रवचन में चार प्रकार के मनुष्य की बात कही है, लेकिन ये नहीं बताया कि ये चार प्रकार कौन-कौन से हैं। तब भगवान बुद्ध ने अपने अनुयायी को इस प्रश्न का उत्तर देने लगे। उनहोंने कहा कि चार प्रकार के मनुष्यों में पहला तिमिर (अंधकार) से तिमिर की ओर जाने वाला होता है। आगे बुद्ध बोले कि जब कोई मनुष्य आपना पूरा जीवन बुरे कर्मों को करते हुए बिता देता है तो वह तिमिर से तिमिर की ओर जाने वाला होता है।

महात्मा बुद्ध ने दूसरे प्रकार के मनुष्य की व्याख्या करते हुए कहा कि यह अंधकार से रोशनी की ओर जाने वाला होता है। फिर महात्मा बुद्ध ने तीसरे प्रकार के मनुष्य के बारे में बताया कि ये प्रकाश से तिमिर की ओर जाने वाला होता है। वहीं दूसरी ओर जब कोई मनुष्य भले ही अच्छे या ऊंचे कुल का न हो लेकिन उसके कर्म और वचन अच्छे हो, साथ ही वह सदाचारी हो तो वह तिमिर से प्रकाश की ओर जाने वाला मनुष्य होता है।

इसके अलावा जो मनुष्य अच्छे कुल में जन्मा हो, बलवान हो, उसकी काया बहुत आकर्षक हो लेकिन मन, वचन और कर्म से दुराचारी हो तो ऐसा मनुष्य प्रकाश से तिमिर की ओर जाने वाला मनुष्य होता है। महात्मा बुद्ध के अनुसार चौथी श्रेणी का मनुष्य वह है जो ज्योति से ज्योति की ओर जाने वाला हो। ऐसे लोग जो अच्छे कुल में जन्में हों और अपने आचरण से भी शुद्ध और पवित्र हो, ऐसा मनुष्य ज्योति से ज्योति की ओर जाने वाला होता है।

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