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गरुड़ पुराण के अनुसार इन सात चीजों को देखने मात्र से मिलता है पुण्य

शास्त्रों के अनुसार गोमूत्र में मां गंगा का वास होता है। इसे औषधि के रूप में भी प्रयोग किया जाता है। आयुर्वेद के जानकारों का मानना है कि इससे कैंसर का भी इलाज किया जा सकता है।

Author नई दिल्ली | February 8, 2019 2:05 PM
भगवान विष्णु।

जीवन में पुण्य और लाभ पाने के लिए हर मनुष्य कई धर्म-कर्म करते हैं। साथ ही मनुष्य पुण्य की प्राप्ति के लिए न जानें कितनी तीर्थ यात्रा, व्रत, अनुष्ठान, यज्ञ और पूजा-पाठ आदि करते हैं। शास्त्रों में भी ऐसे कई कामों के बारे में बताया गया है, जिन्हें करने से मनुष्य को पुण्य मिलता है। गरुड़ पुराण में कुछ ऐसी ही चीजें बताई गई हैं। जिन्हें केवल देख लेने मात्र से व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है। क्या आप जानते हैं कि वो चीजें कौन सी हैं? यानि नहीं, तो आगे हम आपको गरुड़ पुराण के अनुसार यह बताते हैं।

गरुड़ पुराण में एक श्लोक है- गोमूत्रं गोमयं दुन्धं गोधूलिं गोष्ठगोष्पदम्। पक्कसस्यान्वितं क्षेत्रं द्ष्टा पुण्यं लभेद् ध्रुवम्।। यानि गोमूत्र, गोबर, गाय का दूध, गोधूलि, गोशाला, गोखुड़ और पकी हुई फसल से भरा खेत देखने से पुण्य लाभ होता है। सबसे पहले गोमूत्र के बारे में जानते हैं। शास्त्रों में गोमूत्र को बहुत ही पवित्र माना गया है। शास्त्रों के अनुसार गोमूत्र में मां गंगा का वास होता है। इसे औषधि के रूप में भी प्रयोग किया जाता है। आयुर्वेद के जानकारों का मानना है कि इससे कैंसर का भी इलाज किया जा सकता है। गरुड़ पुराण के अनुसार गोमूत्र को देख लेने मात्र से पुण्य की प्राप्ति होती है।

गाय हिंदू धर्म में पूजनीय है। शास्त्रों में गाय को भगवान के सामान माना जाता है। इसलिए गाय के गोबर का भी बहुत अधिक धार्मिक महत्व है। किसी भी स्थान को पवित्र करने के लिए गाय के गोबर का प्रयोग किया जाता है। कहते हैं कि यदि मनुष्य पवित्र भावना से गाय के गोबर को देख ले तो उसे पुण्य की प्राप्ति हो जाती है। इसके अलावा गाय के दूध के कई फायदे बताए गए हैं। यह कई रोगों के लिए दवाई का काम करता है। कलियुग में गाय का दूध भी अमृत के समान ही बताया गया है। इसलिए जो व्यक्ति गाय को दूध देते हुए देखता है, उसे पुण्य की प्राप्ति होती है।

गाय जब चलती है तो उसके पांव से जमीन की जो धूल उड़ती है वह गोधूलि कहलाती है। कहा जाता है कि गाय के पैर से खुदची हुई धूल भी पवित्र हो जाती है। गोधूलि को देख लेने मात्र से ही मनुष्य को कई गुना पुण्यफल प्राप्त होता है। जिस स्थान पर गायों को रखा जाता है उसे गोशाला कहते हैं। यह भी मंदिर के समान पवित्र और पूजनीय होती है। जो मनुष्य रोज गोशाला जाकर गायों की सेवा करता है उसे भगवान कृष्ण के धाम गो लोक की प्राप्ति होती है। गाय के पांव का सबसे निचला हिस्सा गोखुड़ कहा जाता है। इसके पैर को तीर्थ के समान माना जाता है। किसी भी शुभ काम पर जाते समय यदि गोखुड़ का दर्शन कर लिया जाए तो काम में सफलता मिलती है। साथ ही इसके दर्शन से पुण्य और लाभ मिलता है। फसलों से भरा हुआ खेत पुण्य प्राप्ति का प्रतीक माना गया है। गरुड़ पुराण के अनुसार इसे देखने से मनुष्य को पुण्य की प्राप्ति होती है।

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