Aaj Ka Panchang 30 January 2026 (30 जनवरी 2026 का पंचांग): 30 जनवरी 2026 का पंचांग: आज माघ मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि है, जो सुबह 11:09 बजे तक है, उसके बाद त्रयोदशी शुरू होगी। आज शुक्र प्रदोष व्रत है, जो भगवान शिव की पूजा के लिए शुभ है। चंद्रमा मिथुन राशि में है, जो गजकेसरी राजयोग बना रहा है। शुभ मुहूर्त में ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित मुहूर्त और गोधूलि मुहूर्त हैं। अशुभ मुहूर्त में राहुकाल और यमगण्ड हैं। विशेष उपाय के तौर पर, शाम को शिव मंदिर में शहद से अभिषेक करें और शिव चालीसा का पाठ करें।
पंचांग के अनुसार, आज माघ मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि के साथ शुक्रवार का दिन है। पंचांग के अनुसार, द्वादशी तिथि सुबह 11 बजकर 9 मिनट तक है। इसके बाद त्रयोदशी तिथि आरंभ हो जाएगी। इसके साथ ही आज शुक्र प्रदोष व्रत रखा जा रहा है। आज भगवान शिव की विधिवत पूजा करने से कई गुना अधिक फलों की प्राप्ति हो सकती है। आज चंद्रमा की स्थिति की बात करें, तो मिथुन राशि में ही विराजमान होंगे, जिससे वह गुरु के साथ युति करके गजकेसरी राजयोग का निर्माण कर रहे हैं। आइए जानते हैं शुभ मुहूर्तों में ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित मुहूर्त और गोधूलि मुहूर्त और अशुभ मुहूर्तों में राहुकाल, यमगण्ड सहित 30 जनवरी का संपूर्ण पंचांग….
तिथि – द्वादशी – 11:09 ए एम तक, फिर त्रयोदशी
पक्ष – शुक्ल पक्ष
वार –शुक्रवार
अमांत महीना- माघ
पूर्णिमांत महीना –माघ
नक्षत्र
आर्द्रा 03:27 ए एम, जनवरी 31 तक, पुनर्वसु
योग
वैधृति – 04:58 पी एम तक, फिर विष्कुम्भ
करण
बालव – 11:09 ए एम तक
कौलव – 09:46 पी एम तक, फिर तैतिल
आज का शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त – 12:13 पी एम से 12:56 पी एम
ब्रह्म मुहूर्त – 05:25 ए एम से 06:18 ए एम
गोधूलि मुहूर्त- 05:56 पी एम से 06:23 पी एम
अमृत काल – 06:18 पी एम– 07:46 पी एम
आज का अशुभ मुहूर्त
राहुकाल – 11:14 ए एम से 12:35 पी एम
यमगण्ड – 03:17 पी एम से 04:38 पी एम
गुलिक काल – 08:31 ए एम से 09:52 ए एम
दुर्मुहूर्त- 09:20 ए एम से 10:03 ए एम, 12:56 पी एम से 01:39 पी एम
सूर्योदय का समय
सूर्योदय –07:10 ए एम
सूर्यास्त का समय
सूर्यास्त – 05:59 पी एम
चंद्रोदय का समय
चंद्रोदय – 03:06 पी एम
चन्द्रास्त का समय
चन्द्रास्त – 05:54 ए एम, जनवरी 31
दिशा शूल – पश्चिम
चंद्र राशि – मिथुन
सूर्य राशि – मकर
आज का विशेष उपाय (Remedy for Shukra Pradosh)
आज शुक्र प्रदोष के दिन शाम के समय शिव मंदिर में जाकर शहद से भगवान शिव का अभिषेक करें। इसके साथ ही शिव चालीसा और कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें।
सूर्य का रत्न माणिक पहनना काफी लाभकारी माना जाता है। लेकिन कब कैसे और क्यों पहनना चाहिए। इससे बारे में जानना बेहद जरूरी है। इसके अलावा असली और नकली माणिक्य की पहचान करना भी बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं कहीं आप नकली माणिक्य तो नहीं पहन रहे हैं? जानें असली रत्न की पहचान, लाभ और धारण करने की सही विधि
डिसक्लेमर- इस लेख को विभिन्न माध्यमों जैसे ज्योतिषियों, पंचांग, मान्यताओं या फिर धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। इसके सही और सिद्ध होने की प्रामाणिकता नहीं दे सकते हैं। इसके किसी भी तरह के उपयोग करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।
