Aaj Ka Panchang 15 May 2026 (पंचांग 15 मई 2026): ज्येष्ठ माह, कृष्ण पक्ष, त्रयोदशी तिथि सुबह 8:31 तक, फिर चतुर्दशी। आज मासिक शिवरात्रि व्रत है, जिससे सुख-समृद्धि मिलती है। अश्विनी और भरणी नक्षत्र, आयुष्मान और सौभाग्य योग बन रहे हैं। बुध और सूर्य राशि परिवर्तन करेंगे। शुभ मुहूर्त: अभिजित, ब्रह्म और गोधूलि। अशुभ मुहूर्त: राहुकाल, यमगण्ड, गुलिक काल और दुर्मुहूर्त। सूर्योदय 5:30 AM, सूर्यास्त 7:05 PM। दिशा शूल पश्चिम। मेष राशि में सूर्य। यह लेख ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है।
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ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि के साथ शुक्रवार का दिन है। पंचांग के अनुसार, त्रयोदशी तिथि सुबह 8 बजकर 31 मिनट तक रहने वाली है। इसके बाद चतुर्दशी तिथि आरंभ हो जाएगी। आज आश्विनी, भरणी नक्षत्र के साथ आयुष्मान, सौभाग्य योग के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है। इसके अलावा आज मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जा रहा है। भगवान शिव को समर्पित इस व्रत को रखने से सुख-समृद्धि, सौभाग्य की प्राप्ति हो सकती है। इसके अलावा आज बुध और सू्र्य राशि परिवर्तन करने वाले है। आइए जानते हैं शुभ मुहूर्तों में ब्रह्म मुहूर्त और गोधूलि मुहूर्त और अशुभ मुहूर्तों में राहुकाल, यमगण्ड सहित 15 मई का संपूर्ण पंचांग…
तिथि – त्रयोदशी – 08:31 ए एम तक, फिर चतुर्दशी आरंभ
पक्ष – कृष्ण पक्ष
वार – शुक्रवार
व्रत-मासिक शिवरात्रि
नक्षत्र – अश्विनी – 08:14 पी एम तक, फिर भरणी
योग – आयुष्मान 02:21 पी एम तक, फिर सौभाग्य
करण
वणिज – 08:31 ए एम तक
विष्टि – 06:54 पी एम तक
शकुनि – 05:11 ए एम, मई 16 तक
आज का शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त – 11:50 ए एम से 12:45 पी एम
ब्रह्म मुहूर्त – 04:07 ए एम से 04:49 ए एम
गोधूलि मुहूर्त – 07:03 पी एम से 07:24 पी एम
आज का अशुभ समय
राहुकाल – 01:59 पी एम से 03:40 पी एम
यमगण्ड – 03:41 पी एम से 05:23 पी एम
गुलिक काल – 07:12 ए एम से 08:54 ए एम
दुर्मुहूर्त- 08:13 ए एम से 09:08 ए एम. 12:45 पी एम से 01:39 पी एम
सूर्य और चंद्रमा का समय
सूर्योदय – 05:30 ए एम
सूर्यास्त – 07:05 पी एम
चंद्रोदय – 04:41 ए एम, मई 16
चन्द्रास्त – 05:31 पी एम
दिशा शूल- पश्चिम
चंद्र राशि- मेष
सूर्य राशि – मेष – 06:28 ए एम तक
डिसक्लेमर- यह लेख पूरी तरह से ज्योतिषीय गणनाओं और मान्यताओं पर आधारित है। जनसत्ता इसकी सत्यता या इससे होने वाले किसी भी लाभ-हानि की पुष्टि नहीं करता है। अधिक जानकारी के लिए पंचांग, शास्त्र या फिर किसी पंडित से अवश्य जानकारी लें।
