Aaj Ka Panchang 1 October 2026 (आज का पंचांग 1 अक्टूबर 2026): आश्विन माह के कृष्ण पक्ष पंचमी तिथि के साथ गुरुवार का दिन है। पंचांग के अनुसार, पंचमी तिथि दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक है। इसके बाद षष्ठी तिथि आरंभ हो जाएगी। इसके साथ ही आज रोहिणी, मृगशीर्ष नक्षत्र के साथ सिद्धि, व्यातीपात योग का निर्माण हो रहा है। चंद्रमा की स्थिति की बात करें, तो वृषभ राशि में ही संचार करेंगे। इसके साथ ही आज श्राद्ध पक्ष की षष्ठी तिथि है। आज उन पितरों का श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान किया जाएगा जिनकी मृत्यु षष्ठी तिथि को हुई थी। आइए जानते हैं गुरुवार का शुभ मुहूर्त, योग, सूर्योदय-सूर्यास्त का समय, राहुकाल से लेकर विस्तृत पंचांग…

विक्रम संवत – 2083, सिद्धार्थि
शक सम्वत – 1948, पराभव
पूर्णिमांत – आश्विन
अमांत – भाद्रपद
वार- गुरुवार

तिथि- कृष्ण पक्ष पंचमी दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक, फिर षष्ठी तिथि आरंभ
नक्षत्र- रोहिणी सुबह 06:02 बजे से 2 अक्टूबर सुबह 04:27 तक

करण

तैतिल – 01 अक्टूबर 01:46 एएम– 01 अक्टूबर 12:35 PM
गर – 01 अक्टूबर 12:35 PM – 01 अक्टूबर 11:25 PM
वणिज – 01 अक्टूबर 11:25 PM – 02 अक्टूबर 10:15 AM

आज का योग

सिद्धि – 01 अक्टूबर 12:20 एएम– 01 अक्टूबर 09:17 पीएम
व्यातीपात – 01 अक्टूबर 09:17 पीएम– 02 अक्टूबर 06:17 पीएम
सर्वार्थसिद्धि योग – 01 अक्टूबर 06:02 एएम- 01 अक्टूबर 06:22 एएम

सूर्य और चंद्रमा का समय

सूर्योदय – 6:22 एएम
सूर्यास्त – 6:10 PM
चन्द्रोदय – 01 अक्टूबर 9:40 पीएम
चन्द्रास्त – 02 अक्टूबर 11:58 एएम

आज का अशुभ काल

राहुकाल – 1:45 पीएम– 3:13 पीएम
यम गण्ड – 6:22 एएम– 7:50 एएम
कुलिक – 9:19 एएम– 10:48 एएम
दुर्मुहूर्त – 10:18 एएम– 11:05 एएम, 03:01 पीएम– 03:49 पीएम
वर्ज्यम् – 08:58 पीएम– 10:28 पीएम

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आज का शुभ काल

अभिजीत मुहूर्त – 11:52 एएम– 12:40 पीएम
अमृत काल – 01:27 एएम– 02:57 एएम
ब्रह्म मुहूर्त – 04:46 एएम– 05:34 एएम

सूर्या राशि- सूर्य कन्या राशि पर है
चंद्र राशि- चन्द्रमा वृषभ राशि पर संचार करेगा

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डिसक्लेमर- यह लेख पूरी तरह से ज्योतिषीय गणनाओं और मान्यताओं पर आधारित है। आपके शहर, क्षेत्र के अनुसार पंचांग के समय में बदलाव हो सकता है। इसलिए किसी भी कार्य को करने से पहले क्षेत्रीय पंचांग देखने के अलावा पंडित से पूछ लें। जनसत्ता इसकी सत्यता या इससे होने वाले किसी भी लाभ-हानि की पुष्टि नहीं करता है। अधिक जानकारी के लिए पंचांग, शास्त्र या फिर किसी पंडित से अवश्य जानकारी लें।