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चाणक्य अनुसार ऐसे लोग होते हैं धरती पर बोझ तो इन लोगों का कभी भी हो सकता है नाश

चाणक्य ने अपने नीति ग्रंथ के एक श्लोक में कहा है कि बिना ज्ञान, गुण और शील के मनुष्य इस धरती पर बोझ के समान होता है। उसे इस धरती पर रहने का कोई हक नहीं होता है।

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Chanakya niti: जीवन में कई बार ऐसी परिस्थिति उत्पन्न हो जाती है जब व्यक्ति अपने मार्ग से भटकने लगता है। सही गलत के निर्णय लेने की क्षमता नहीं रह पाती। इन समस्याओं के हल के लिए हमारे शास्त्रों और कई ग्रंथों में कई ऐसी बातें बताई गई हैं जिसे अपनाकर हर व्यक्ति अपनी समस्याओं का हल निकाल सकता है। ऐसा ही एक ग्रंथ है ‘चाणक्य नीति’। इसमे महान राजनीतिज्ञ और अर्थशास्त्री चाणक्य ने अपने जीवन के अनुभवों से कई नीतियां बताई हैं जो व्यक्ति को अपने जीवन की हर राह पर कारगर साबित होती हैं। यहां हम आपको चाणक्य की कुछ महत्वपूर्ण नीतियों के बारे में बताने जा रहे हैं…

चाणक्य अनुसार शत्रुओं को और कांटों को एक समान माना है। चाणक्य कहते हैं कि ऐसी स्थितियों से बचने के 2 ही तरीके हैं या तो जूते से या किसी उपकरण से इनको कुचल दो या तो अपना रास्ता ही बदल दो। मतलब ऐसे व्यक्तियों से कोई वास्ता मत रखो।

 चाणक्य के अनुसार जिस व्यक्ति के मन में पाप है वो चाहे किसी भी तीर्थस्थल के दर्शन कर आए या किसी भी प्रकार का शुद्धीकरण कराए वो कभी शुद्ध नहीं हो सकता। जिस प्रकार शराब को बर्तन में रखने के बाद अग्नि में झुलसाने पर भी शराब पवित्र नहीं होती।

 चाणक्य ने अपने नीति ग्रंथ के एक श्लोक में कहा है कि बिना ज्ञान, गुण और शील के मनुष्य इस धरती पर बोझ के समान होता है। उसे इस धरती पर रहने का कोई हक नहीं होता है।

 चाणक्य कहते हैं कि जो व्यक्ति पैसो को बेवजह खर्च करता है, उसको संभाल के नहीं रखता है वह कभी पैसो के महत्व को नहीं समझ सकता है। ऐसे व्यक्ति सबसे झगडा करते हैं और स्त्रियों का सम्मान भी नहीं करते हैं। ऐसे लोगों का नाश कब और कहाँ हो जाए इस बात का अंदाजा ये स्वयं भी नहीं लगा सकते हैं।

चाणक्य नीति अनुसार कुछ गुण मनुष्य में स्वयं से ही आते हैं। जैसे दान करना, लोगों की सेवा करना, मीठी बातें करना, समय पर सही-गलत का निर्णय लेना। इन गुणों को कहीं से सीखा नहीं जा सकता है। और जो व्यक्ति इन गुणों को अपना लेता है वो अपने जीवन में सफलता को पा लेता है।

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