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आज का पंचांग, 22 मई 2020: शनि जयंती और वट सावित्री व्रत आज, जानिये पूजा का शुभ मुहूर्त और राहुकाल

22 May 2020 Panchang: आज नक्षत्र कृत्तिका, योग शोभन है। सूर्य और चंद्र वृषभ राशि में रहेंगे। अमावस्या तिथि की शुरुआत 21 मई से हो चुकी है और इसकी समाप्ति 22 मई यानी आज रात 11 बजकर 08 मिनट पर होगी। आज तमिल हिंदुओं द्वारा मनाया जाने वाला त्योहार मासिक कार्तिगाई भी है। जानिए 22 मई 2020 का पंचांग विस्तार से...

Panchang Today 22 May 2020: अशुभ मुहूर्त: राहुकाल दोपहर 10:15 AM से 11:54 AM तक रहेगा। गुलिक काल का समय 06:54 AM से 08:34 AM तक है। यमगण्ड 03:15 PM से 04:55 PM तक।

Aaj Ka Panchang 22 May 2020: पंचांग अनुसार आज ज्येष्ठ मास की अमावस्या है। इस दिन शनि जयंती मनाई जाती है। सुहागिन महिलाएं इस दिन वट सावित्री व्रत भी रखती हैं। आज नक्षत्र कृत्तिका, योग शोभन है। सूर्य और चंद्र वृषभ राशि में रहेंगे। अमावस्या तिथि की शुरुआत 21 मई से हो चुकी है और इसकी समाप्ति 22 मई यानी आज रात 11 बजकर 08 मिनट पर होगी। आज तमिल हिंदुओं द्वारा मनाया जाने वाला त्योहार मासिक कार्तिगाई (Masik Karthigai 2020) भी है। जानिए 22 मई 2020 का पंचांग विस्तार से…

शुभ मुहूर्त: आज का अभिजित मुहूर्त 11:28 AM से 12:22 PM तक रहेगा। विजय मुहूर्त 02:08 PM से 03:02 PM तक रहेगा। गोधूलि मुहूर्त का समय 06:22 PM से 06:46 PM है। सायाह्न सन्ध्या मुहूर्त 06:36 PM से 07:39 PM तक रहेगा। निशिता मुहूर्त 11:33 PM से 12:16 AM मई 16 तक रहेगा।

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अशुभ मुहूर्त: राहुकाल दोपहर 10:15 AM से 11:54 AM तक रहेगा। गुलिक काल का समय 06:54 AM से 08:34 AM तक है। यमगण्ड 03:15 PM से 04:55 PM तक। पहला दुर्मुहूर्त 07:54 AM से 08:48 AM तक दूसरा दुर्मुहूर्त 12:22 PM से 01:15 PM तक। वर्ज्य 02:07 PM से 03:51 PM तक रहेगा।

22 मई पंचांग सूर्योदय का समय 05:14 AM और सूर्यास्त समय 06:36 PM है। शक सम्वत 1942 शर्वरी, विक्रम सम्वत 2077 प्रमाथी। महीना ज्येष्ठ, पक्ष कृष्ण और तिथि अमावस्या है।

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ज्येष्ठ अमावस्या: नये चन्द्रमा के दिन को अमावस्या कहते हैं। यह एक महत्वपूर्ण दिन माना गया है क्योंकि कई धार्मिक कृत्य केवल अमावस्या तिथि के दिन ही किये जाते हैं। पूर्वजों की आत्मा की तृप्ति और कालसर्प दोष निवारण की पूजा करने के लिए भी ये दिन खास होता है।

शनि जयंती: मान्यता है कि ज्येष्ठ अमावस्या के दिन कर्मफल दाता शनिदेव का जन्म हुआ था। ऐसी मान्यता है कि इस दिन शनिदेव की पूजा करने से शनि साढ़ेसाती, ढैय्या और महादशा से मुक्ति मिल जाती है। साथ ही इस दिन शनि चालीसा और शनि स्त्रोत का पाठ करना भी काफी फलदायी माना गया है।

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