गुरुग्राम की एक हाउसिंग सोसाइटी ने करीब एक महीने पहले मेंटेनेंस शुल्क नहीं चुकाने वाले निवासियों का नाम सार्वजनिक किया था। अब RWA का यह फैसला असरदार साबित होता दिख रहा है। पिछले करीब एक महीने मे सेक्टर 49 और 50 स्थित उप्पल साउथेंड टाउनशिप की रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) ने लगभग 15 लाख रुपये की वसूली कर ली है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, सार्वजनिक नोटिस के बाद करीब एक-तिहाई डिफॉल्टर्स ने अपना बकाया चुका दिया है।

मार्च के आखिर में सोसायटी के गेट पर एक डिस्प्ले बोर्ड पर RWA ने डिफॉल्टर्स के नाम लिख दिए थे। इसके बाद यह टाउनशिप चर्चा में आ गई थी। इस नोटिस में बकाया चुकाए जाने तक डिफॉल्टर्स के लिए फूड डिलीवरी ऐप्स जैसे Zomato और Swiggy, कार वॉशिंग और यहां तक कि मेड की सेवाएं भी रोक दी गई थीं।

45 लाख रुपये का बकाया

रिपोर्ट के मुताबिक, इस टाउनशिप में 2 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत वाले इन्डिपेन्डेन्ट फ्लोर, विला और रेजिडेंशियल प्लॉट बने हुए हैं। टाउनशिप में कई लोगों पर 45 लाख रुपये से ज्यादा का बकाया बाकी है।

RWA के जनरल सेक्रेटरी अनिल आनंद ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ”45 लाख में से करीब 15 लाख रुपये से ज्यादा की रिकवरी हो चुकी है। इसमें 40 प्रतिशत से ज्यादा रकम उन लोगों ने दी है जिनके नाम बोर्ड पर डिस्प्ले किए गए थे। हमें कोई रिमाइंडर नहीं भेजना पड़ा। उनके पड़ोसियों ने उन्हें समझाया और अब भी कई सारे निवासी अपना बकाया चुकाने के लिए आगे आ रहे हैं। अधिकतर ऐसे डिफॉल्टर्स जिन पर 1 लाख से ज्यादा की रकम चुकानी है, उन्होंने अभी तक बकाया नहीं दिया है।”

आनंद ने बताया कि इस फैसले को सरकार से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। गुरुग्राम ही नहीं बल्कि बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों की आरडब्ल्यूए भी उनसे संपर्क कर रही हैं। उन्होंने कहा, ”हमें लगातार ऐसी आरडब्ल्यूए से कॉल और मैसेज मिल रहे हैं जो हमारे इस मॉडल को अपनाना चाहती हैं।”

नियमों में ढिलाई

उन्होंने यह भी बताया कि आरडब्ल्यूए ने अब अपने पहले के सख्त नियमों में कुछ ढील दी है। डिफॉल्टर्स के लिए Swiggy और Zomato जैसी फूड डिलीवरी सर्विसेज, मेड और कार वॉशिंग जैसी सुविधाएं अभी शुरू कर दी गई हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया, ”आरडब्ल्यूए के सामाजिक कार्यक्रम अभी भी डिफॉल्टर्स के लिए खुले नहीं हैं।”

लिस्ट में शामिल कई निवासियों के लिए यह मुद्दा सिर्फ भुगतान न करने का नहीं, बल्कि असमान सेवाओं का भी है—खासकर सुरक्षा को लेकर। कुछ लोगों का कहना है कि वे निजी गार्ड के लिए अलग से भुगतान कर रहे हैं, फिर भी उनसे कॉमन सिक्योरिटी के लिए शुल्क लिया जा रहा है।

लिस्ट में शामिल कई निवासियों के लिए यह मामला सिर्फ पेमेंट ना करने तक सीमित नहीं है बल्कि असमान सुविधाओं-खासकर सिक्यॉरिटी से भी जुड़ा है। कुछ निवासियों का कहना है कि वे निजी सिक्यॉरिटी गार्ड के लिए अलग से भुगतान कर रहे हैं। इसके बावजूद उनसे कॉमन सिक्योरिटी का शुल्क भी लिया जा रहा है।

एयरक्राफ्ट पार्ट्स के मैन्युफैक्चरिंग के व्यवसाय से जुड़ी सुनीता चौहान ने पहले बताया, ”हमें उन सुविधाओं का लाभ नहीं मिलता जिनके लिए हमसे शुल्क लिया जा रहा है। हमारा घर मेन रोड पर बने छह मंजिला प्लॉट पर है जहां अलग से कोई सिक्यॉरिटी गार्ड नहीं है। हमें अपनी जेब से पैसे खर्च करके गार्ड रखने पड़ते हैं।”

निवासियों की चिंता

डिफॉल्टर्स की लिस्ट में शामिल क्लिनिकल न्यूट्रिशनिस्ट शालू जैन ने कहा, ”जब हमें गार्ड ही नहीं मिलता तो हम सिक्यॉरिटी के लिए पैसे क्यों दें, कुल बकाये का 80 प्रतिशत सिक्यॉरिटी का ही है। लिस्ट में शामिल अधिकतर लोग इसी समस्य का सामना कर रहे हैं।”

हालांकि, इंटीरियर डिजाइन के कारोबार से जुड़े आनंद ने इन दावों को खारिज किया। उन्होंने कहा, ”सिक्यॉरिटी गार्ड की फीस के साथ भी मासिक मेंटेनेंस काफी कम है- लगभग 1,100 से 1,350 रुपये के बीच। जिन्हें गार्ड नहीं मिल रहा, क्या वे अन्य सुविधाओं जैसे कम्युनिटी इवेंट्स, साफ-सुथरी सड़कें और पार्क का फायदा नहीं लेते जिनके लिए हमें स्टाफ रखना पड़ता है?”