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2012 से जंतर- मंतर पर धरना दे रहा ‘जिंदा-मुर्दा चाय वाला’, पीएम मोदी को देगा चुनावी मैदान में टक्कर

वाराणसी से पीएम नरेन्द्र मोदी को 'जिदा मुर्दा चाय वाले' चुनावी मैदान में टक्कर देने के लिए उतर रहे हैं। ऐसे में जानें कौन है ये शख्स

संतोष मूरत सिंह (‘जिंदा-मुर्दा चाय वाला’), फोटो सोर्स- स्थानीय

उत्तर प्रदेश के वाराणसी संसदीय क्षेत्र से एक ओर जहां कांग्रेस और सपा-बसपा गठबंधन की ओर से प्रत्याशियों के नाम की घोषणा अब तक नहीं की गई है तो वहीं दूसरी ओर कई लोग चुनावी मैदान में ताल ठोकने के लिए तैयार हैं। इनमें ‘रावण’ से लेकर पूर्व जज और जिंदा मुर्दा चाय वाले तक शामिल हैं। गौरतलब है कि पीएम नरेंद्र मोदी के इस सीट से चुनाव लड़ने को लेकर यह सीट सुर्खियों में है। लोकल टू ग्लोबल इस सीट के चुनावी समीकरण को लेकर चर्चा हो रही है।

पीएम के सामने चुनाव लड़ रहे हैं ये लोग: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने पूर्व जज, पुजारी, भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ‘रावण’, जिंदा मुर्दा चाय वाले प्रतिद्वंद्वी के रूप में चुनावी मैदान में होंगे। बनारस में 19 मई को वोटिंग होगी। मोदी के हमशक्ल अभिनंदन पाठक के अलावा सेवानिवृत्त न्यायाधीश सीएस कर्णन भी चुनावी मैदान में उतरेंगे। बता दें कि कर्णन सर्वोच्च न्यायालय के अवमानना मामले में दोषी करार दिए जा चुके हैं, अब वह यहां से चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। इसके साथ ही सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के बर्खास्त जवान तेज बहादुर यादव भी यहां से चुनाव लड़ने के लिए ताल ठोक रहे हैं। तमिलनाडु से 111 किसान और फ्लोरोसिस से पीड़ित अंसला स्वामी भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ लामबंद हैं। पी अय्यकन्नू के नेतृत्व में ये 111 किसान दिल्ली में 2017 में प्रदर्शन कर चुके हैं। इसके अलावा तेलंगाना के नलगोंडा और आंध्र प्रदेश के प्रकाशम के फ्लोरोसिस पीड़ित भी इस कतार में हैं। जो वड्डे श्रीनिवास और जलागम सुधीर के नेतृत्व में भूजल में फ्लोराइड मिश्रण का मुद्दा उठा रहे हैं। यह इन दोनों राज्यों में गंभीर मुद्दा है। बता दें कि भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ‘रावण’ ने 30 मार्च को वाराणसी में रोड शो किया था।

खुद को जिंदा करने की लड़ाई: पीएम मोदी के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरे एक शख्स पहले ही सुर्खियां बटोर चुका है। दरअसल दिल्ली के जंतर-मंतर पर 2012 से लगातार धरना दे रहे ‘जिदा मुर्दा चाय वाले’ भी प्रधानमंत्री के खिलाफ बनारस से चुनाव लड़ेंगे। जिंदा मुर्दा चाय वाले बनारस के ही रहने वाले हैं। वह खुद को जिंदा करने की लड़ाई लड़ रहे हैं।

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जानें क्यों लोग कहते हैं जिंदा मुर्दा चाय वाले: चौबेपुर (वाराणसी) के रहने वाले संतोष मूरत सिंह उर्फ मैं जिंदा हूं ( जिंदा मुर्दा चाय वाले ) इस समय जंतर-मंतर में दिल्ली में धरने पर बैठे हैं। वह लंबे अरसे से खुद को जिंदा साबित करने की लड़ाई लड़ रहे हैं। मोबाइल फोन पर हुई बातचीत में संतोष ने बताया कि मैंने चाय की दुकान पर नौकरी कर ली है ताकि जीवन चलता रहे। बताया कि चाय वाले के यहां नौकरी करने की वजह से मै जंतर-मंतर पर केतली लेकर चाय बेचता हूं। इसलिए मुझे नया नाम जिंदा मुर्दा चाय वाला’ दिया गया है।

इसलिए लिया चुनाव लड़ने का फैसला: संतोष ने बताया कि जब एक चाय वाला प्रधानमंत्री बन सकता है तो एक जिंदा मुर्दा चाय वाला क्यों नहीं। इसी सोच के साथ मैंने फैसला किया है कि मैं प्रधानमंत्री के खिलाफ चुनाव लड़कर खुद को जिंदा साबित करूंगा।

दस्तावेज में इस तरह हुई मौत: बातचीत में संतोष ने बताया कि मुंबई में वर्ष 2003 में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में उनको मृत दिखाकर उनके पट्टीदारों ने वाराणसी के चौबेपुर के छितौनी में उनकी 12.5 एकड़ पुश्तैनी जमीन अपने नाम करा ली। नाना पाटेकर का साथ और यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव का आश्वासन मिलने के बाद भी वह अब तक खुद को जिंदा साबित नहीं कर पाए हैं। संतोष ने बताया कि फिल्म अभिनेता नाना पाटेकर 2003 में रिलीज हुई फिल्म आंच की शूटिंग के लिए वर्ष 2000 में उनके गांव पहुंचे थे और उसी दरमियान नाना पाटेकर से उनकी मुलाकात हुई। वह उन्हें अपने साथ मुंबई ले गए। वहां मराठी दलित युवती से उन्होंने प्रेम विवाह कर लिया। विवाह बाद जब वह गांव लौटे तो दलित लड़की से शादी के कारण गांव वालों ने उनका बहिष्कार कर दिया। माता-पिता का निधन पहले हो चुका था। पट्टीदारों ने मुंबई ट्रेन धमाकों में उन्हें मृत दिखाकर गांव में तेरहवीं कर दी और उनकी जमीन अपने नाम करा ली।

 

राष्ट्रपति पद के लिए भी कर चुके हैं नामांकन: गौरतलब है कि सिर्फ पीएम पद के लिए ही नहीं बल्कि 2012 में राष्ट्रपति चुनाव के लिए भी अर्जी दे चुके हैं। बता दें कि संतोष के खुद को जिंदा साबित करने के लिए दी गई अर्जी पर साल 2018 में यूपी डीजीपी कार्यालय द्वारा संज्ञान लेते हुए वाराणसी क्राइम ब्रांच को इस मामले की जांच दी गई थी। पूछताछ के बाद क्राइम ब्रांच ने डीजीपी कार्यालय को इसकी रिपोर्ट सौंपी थी।

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