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डॉक्टर ने मेरे साथ किया गंदा काम, काग़ज़ पर लिख बताया था दर्द, पीड़िता की मौत

प्रयागराज में एसआरएन अस्पताल के कुछ डॉक्टरों द्वारा मिर्जापुर की एक युवती के साथ कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म के मामले में मंगलवार को पीड़िता की मौत हो गई।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है।

जब इंसान जिंदगी और मौत से जूझ रहा होता है तो उसके लिए डॉक्टर ही भगवान होता है। डॉक्टर ही उसे दूसरी जिंदगी दे सकता है। लेकिन प्रयागराज से ऐसा मामला सामने आया है जिसने सबको झकझोर कर रख दिया है। दरअसल एक लड़की जो इस उम्मीद से अस्पताल आई थी कि डॉक्टर उसे नई जिंदगी देंगे। उस डॉक्टर ने ही उसकी जिंदगी ले ली। प्रयागराज में एक पीड़िता के साथ अस्पताल में गैंग रेप का मामला सामने आया है। मामले में पीड़िता ने दम तोड़ दिया है।पीड़िता को प्रयागराज के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पीड़िता का ऑपरेशन हुआ था। पीड़िता ऑपरेशन के बाद अचेत लग रही थी और कुछ कहना भी चाह रही थी। जब लड़की के भाई ने उसे पैन और कागज पकड़ाया तो लड़की ने लिखा कि डॉक्टर अच्छे नहीं हैं और सब मिले हुए हैं। पीड़िता ने लिखा कि इलाज के नाम पर उसके साथ गंदा काम किया गया।

क्या है मामला: प्रयागराज में एसआरएन अस्पताल के कुछ डॉक्टरों द्वारा मिर्जापुर की एक युवती के साथ कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म के मामले में मंगलवार को पीड़िता की मौत हो गई। महिला को 29 मई को आंतों की समस्या के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 1 जून को महिला को सर्जरी के लिए ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया, जिस दौरान डॉक्टरों के एक समूह ने उसके साथ कथित तौर पर सामूहिक बलात्कार किया। महिला, जो सर्जरी के बाद बहुत असहज थी, ने अपने भाई को एक नोट में बताया कि ओटी के अंदर अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा उसके साथ कथित तौर पर सामूहिक बलात्कार किया गया था।

पीड़िता ने कांपते हाथों से एक कागज के टुकड़े पर लिखा कि “डॉक्टर अच्छे नहीं हैं, उसे कोई इलाज नहीं दिया गया और उन्होंने उसके साथ गंदा काम किया।” महिला के भाई ने लड़की का एक वीडियो बनाया जिसमें वह मदद की गुहार लगाती और ओटी के अंदर उसके साथ जो कुछ हुआ उसके बारे में एक संक्षिप्त नोट लिखती देखी जा सकती है। उन्होंने मामले की सूचना स्थानीय पुलिस को भी दी। सीओ कोतवाली सत्येंद्र तिवारी भी मौके पर पहुंचे और पीड़िता की मां व अन्य परिजनों से पूछताछ की। हालांकि पुलिस के मुताबिक परिजनों ने डॉक्टरों पर ऐसा कोई आरोप नहीं लगाया है।

पुलिस टीम ने कहा कि पीड़िता के होश में आने के बाद वे उसका बयान दर्ज करने के लिए वापस आएंगे, लेकिन उसके कुछ देर बाद ही लड़की की मौत हो गई। वीडियो अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो गया है और एसआरएन अस्पताल के डॉक्टरों के खिलाफ महिला द्वारा लगाए गए सामूहिक बलात्कार के गंभीर आरोपों की जांच के लिए दो जांच समितियों का गठन किया गया है।

एक जांच कमेटी का गठन एसआरएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर एसपी सिंह ने किया है, जबकि दूसरी जांच टीम सीएमओ प्रयागराज ने गठित की है। इस जांच दल में डॉ वत्सला मिश्रा, डॉ अजय कुमार, डॉ अरविंद गुप्ता, डॉ अमृता चौरसिया और डॉ अर्चना कौल को शामिल किया गया है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य की सिफारिश पर महिला का मेडिकल परीक्षण भी किया गया।

प्रोफेसर एसपी सिंह के मुताबिक ऑपरेशन के वक्त ओटी में चार महिला सर्जन, एक महिला नर्स और दो पुरुष डॉक्टर थे। एसआरएन मेडिकल कॉलेज प्राचार्य द्वारा गठित टीम द्वारा दी गई रिपोर्ट में भी पीड़िता के साथ सामूहिक दुष्कर्म की बात से इनकार किया गया है।

इस बीच मामले की जांच कर रही कोतवाली पुलिस का मानना ​​है कि महिला को प्यास लगी थी और जब डॉक्टरों ने उसे पानी देने से मना कर दिया तो वह काफी परेशान थी।

पुलिस के मुताबिक उसके बाद उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। बाद में उनकी हालत गंभीर हो गई और संभवत: इसी के चलते उन्होंने डॉक्टरों पर सनसनीखेज आरोप लगाए।

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