अयोध्या के राम मंदिर में दान निधि से लगभग 7 करोड़ रुपये के कथित गबन ने एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। जिसके बाद योगी सरकार ने शनिवार (13 जून, 2026) कथित गबन से जुड़े आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया।

श्री राम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर एसआईटी का गठन किया गया है। SIT को 15 दिनों के भीतर अंतिम रिपोर्ट और सात दिनों के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। एसआईटी के सदस्यों में लखनऊ संभागीय आयुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक एस. किरण और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन शामिल हैं।

वहीं, शुक्रवार को पुलिस ने अयोध्या के रुदौली इलाके में मंदिर के एक कर्मचारी के आवास से 10 से 12 लाख रुपये के बीच की रकम बरामद की है। इस बीच, राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा, जो पांच दिनों में दूसरी बार अयोध्या पहुंचे। उन्होंने इस मुद्दे से खुद को अलग करते हुए कहा कि वे केवल निर्माण कार्य की देखरेख के लिए जिम्मेदार हैं।

मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है, अयोध्या पुलिस ने मीनापुर ठाकुरान फागौली गांव में लवकुश मिश्रा के आवास पर धन बरामद करने के लिए छापा मारा। इस दौरान श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय भी मौजूद थे। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि मंदिर प्रशासन में नौकरी मिलने से पहले मिश्रा कार मैकेनिक के रूप में काम करते थे, जिसके बाद उनकी आर्थिक स्थिति में थोड़े ही समय में तेजी से सुधार हुआ।

इसके अलावा, सूत्रों का दावा है कि ट्रस्ट ने मंदिर के दान की गिनती के लिए जिम्मेदार दो कर्मचारियों को हिरासत में लिया है और संदेह के आधार पर उनसे पूछताछ जारी है। दोनों कर्मचारियों को मंदिर में प्राप्त होने वाले चढ़ावों की गिनती करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी और उन्हें 18,000 रुपये से 20,000 रुपये का मासिक वेतन मिलता था।

सूत्रों ने बताया कि दोनों में से एक ने हाल ही में 1.5 करोड़ रुपये की जमीन खरीदी थी, जबकि दूसरे ने 40 लाख रुपये का प्लॉट खरीदा था। गौरतलब है कि सपा सरकार में मंत्री रहे पवन पांडे ने 7 जून को दावा किया था कि राम मंदिर से 5 करोड़ रुपये से 7.5 करोड़ रुपये की हेराफेरी की गई थी। सरकार ने एसआईटी जांच का फैसला जुबानी जंग के बाद लिया है। जिसमें समाजवादी पार्टी (एसपी) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोप लगाया था कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए करोड़ों रुपये गायब हो गए हैं और उन्होंने न्यायपालिका से स्वतः संज्ञान लेने की मांग की थी।

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अयोध्या स्थित राम मंदिर में आने वाले दान की राशि में कथित गबन का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इसको लेकर समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी से लेकर स्थानीय नेताओं ने भी सवाल खड़े किए हैं। इस पूरे मामले को लेकर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के शिष्य महंत कमल नयन दास ने जांच की मांग की है। पढ़ें पूरी खबर।