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योगी सरकार का दावा- यूपी में इस साल अपराधों में आई कमी, दस हजार अपराधियों ने खारिज करा ली जमानत

सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार ने दावा किया है कि इस साल राज्य में अपराध के आंकड़ोंं में कमी आई है। करीब 10 हजार अपराधियों ने आत्मसमर्पण किया और जेल भेजे गए।

उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ। (एक्सप्रेस फोटोः विशाल यादव)

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने दावा किया है कि इस साल राज्य में अपराध के आंकड़ोंं में कमी आई है। करीब 10 हजार अपराधियों ने जमानत खारिज करवा ली। उन्होंने आत्मसमर्पण किया और जेल गए। द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल के मुकाबले इस साल जनवरी से जुलाई के बीच बलात्कार के आंकड़े 2614 से कम होकर 2444 हो गए। वहीं, वर्ष 2016 में समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान पहले सात महीनों में यह आंकड़ा 2041 था। हत्या के आंकड़ों की बात करें तो वर्ष 2016 के पहले सात महीनों में यह 2766 था, 2017 में 2462 और इस साल 2018 में 2505 है। बता दें कि यूपी में 19 मार्च 2017 को भाजपा की योगी सरकार ने शपथ ली थी।

इस पूरे मामले पर उत्तर प्रदेश के भाजपा प्रवक्ता चंद्र मोहन कहते हैं, “राज्य में अपराधियों के खिलाफ एक प्रभावी अभियान शुरू किया गया है। 63 खतरनाक अपराधियों को मार दिया गया। मुठभेड़ में 650 घायल हो गए। 3430 अपराधियों को गिरफ्तार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। वर्ष 2018 में 9866 अपराधियों ने अपनी जमानत रद करवा ली और अदालत के सामने आत्मसमर्पण कर किया। उन्हें जेल भेज दिया गया। गैंगस्टर एक्ट के तहत 14746 अपराधियों को दर्ज किया गया। अपराधियों के पास अब राजनीतिक संरक्षण नहीं है। प्रदेश में निवेश के लिए एक अच्छा वातावरण बनाया गया है।”

इससे पहले मार्च में, योगी सरकार ने विधानसभा में एक लिखित उत्तर में स्वीकार किया था कि यूपी में अपराध बढ़े थे। समाजवादी पार्टी की सरकार के 2016-17 के कार्यकाल की तुलना में एक अप्रैल 2017 से लेकर 31 जनवरी 2018 के बीच बलात्कार के मामलों में 25% की वृद्धि, शीलभंग की घटनाओं में 40% की वृद्धि, महिलाओं के अपहरण के मामलों में 35% की वृद्धि और छेड़खानी के मामलों में 50% की वृद्धि हुई थी। हालांकि, योगी सरकार इस साल आपराधिक आंकड़ों में  बदलाव का दावा कर रही है। जबकि, इस साल जुलाई 2018 तक दर्ज किए गए कुल अपराधिक मामले 1.96 लाख तक पहुंच चुके हैं, जो कि 2016 के पहले सात महीनों में 1.55 लाख और 2017 के पहले सात महीनों में 1.78 लाख थे।

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