लखनऊ में शुक्रवार को भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का महापर्व जन्माष्टमी धूमधाम और भव्यता के साथ मनाया गया। रिजर्व पुलिस लाइंस में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी झांकियों का अवलोकन किया। इस दौरान कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, पूर्व उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा, विधायक जय देवी, विधायक नीरज बोरा समेत कई लोग मौजूद रहे।
समारोह को संबोधित करते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि योगेश्वर श्रीकृष्ण का जन्म जेल की काल कोठरी के अंधेरे में हुआ था, लेकिन उन्होंने अपने पूरे जीवन में समाज को प्रकाश का मार्ग दिखाया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का अवतरण धर्म, सत्य और न्याय की स्थापना के लिए हुआ था। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीकृष्ण का संदेश आज भी लोगों को अपने कर्मक्षेत्र में खुद को पहचानने और श्रेष्ठ कर्म करने की प्रेरणा देता है।
‘आक्रांता मंदिर तोड़ सकता है, आस्था नहीं’
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की आस्था और आध्यात्मिक परंपरा हजारों वर्षों से चली आ रही है। उन्होंने गोवर्धन पूजा का उदाहरण देते हुए कहा कि पिछले करीब पांच हजार वर्षों से लोग गोवर्धन की पूजा और परिक्रमा करते आ रहे हैं और आज भी लाखों श्रद्धालु इसमें शामिल होते हैं।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आक्रांता मंदिरों को तोड़ सकते हैं, लेकिन लोगों की आस्था को नहीं तोड़ सकते। वे मूर्तियां तोड़ सकते हैं, लेकिन भारतीय मूल्यों को समाप्त नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि मंदिरों के ऊपर भले ही दूसरी इमारतें खड़ी कर दी जाएं, लेकिन लोगों के मन में बसे श्रीराम और श्रीकृष्ण को कोई छू नहीं सकता।
‘सोमनाथ बार-बार टूटा, भारत ने बार-बार बनाया’
सीएम योगी ने सोमनाथ मंदिर का उल्लेख करते हुए कहा कि यह मंदिर बार-बार तोड़ा गया, लेकिन भारत ने उसे बार-बार बनाया। इसी तरह उन्होंने अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि का जिक्र करते हुए कहा कि वहां भगवान राम का मंदिर बार-बार टूटने के बावजूद आज भव्य रूप में खड़ा है।
उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर का भी उल्लेख किया। योगी ने कहा कि काशी में भगवान विश्वनाथ का मंदिर भी कई बार प्रभावित हुआ, लेकिन लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर ने इसका पुनर्निर्माण कराया और आधुनिक भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काशी विश्वनाथ धाम को भव्य स्वरूप मिला।
‘मिटाने वाले इतिहास के पन्नों में मिट गए’
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इतिहास इस बात का गवाह है कि जिन लोगों ने भारत और उसकी आस्था को मिटाने का प्रयास किया, वे स्वयं इतिहास के पन्नों में मिट गए। उन्होंने कहा कि आज उनका कोई अस्तित्व नहीं है, जबकि भारत आज भी जीवित, जागृत और अपनी शाश्वत यात्रा पर आगे बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना को किसी भी चुनौती से समाप्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने लोगों से अपनी परंपराओं और मूल्यों से जुड़े रहने का आह्वान किया।
‘कर्मक्षेत्र में खुद को पहचानें’
अपने संबोधन में सीएम योगी ने भगवान श्रीकृष्ण के कर्म संदेश पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण का संदेश आज भी हर व्यक्ति के लिए प्रासंगिक है। उन्होंने लोगों से कर्मक्षेत्र में खुद को पहचानने और जो श्रेष्ठ हो, उसे करने का प्रयास करने की अपील की।
उन्होंने भगवद्गीता के प्रसिद्ध श्लोक ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन’ का उल्लेख करते हुए कहा कि व्यक्ति को अपने कर्म पर अधिकार रखना चाहिए और श्रेष्ठ कार्य करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
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