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योगेंद्र यादव ने ‘आप’ के कारण बताओ नोटिस को ‘मज़ाक’ करार दिया

पार्टी से निष्कासन निकट होने के साथ ‘आप’ के बागी नेता योगेंद्र यादव ने आज सोशल मीडिया के जरिए पार्टी पर हमला बोलते हुए उन्हें मिले कारण बताओ नोटिस को ‘‘मजाक’’ करार दिया...

Author April 18, 2015 3:41 PM

पार्टी से निष्कासन निकट होने के साथ ‘आप’ के बागी नेता योगेंद्र यादव ने आज सोशल मीडिया के जरिए पार्टी पर हमला बोलते हुए उन्हें मिले कारण बताओ नोटिस को ‘‘मजाक’’ करार दिया।

उन्होंने यह भी पूछा कि कारण बताओ नोटिस प्राप्त होने से पहले ही इसका ब्यौरा मीडिया को कैसे मिल गया। यादव ने आरोप लगाया कि इसे पार्टी की अनुशासन समिति ने ‘‘लीक’’ किया है।

उन्होंने हैरानी जताई कि अध्यक्ष दिनेश वाघेला को शामिल किए बिना राष्ट्रीय अनुशासन समिति ने कदम कैसे उठाया। उन्होंने दावा किया कि टेलीफोन पर हुई बाचीत में वाघेला, जो ‘‘दिल्ली में नहीं हैं’’, ने उनसे कहा था कि समिति को अभी मामले पर विचार करना है।

यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट में कहा, ‘‘कल शाम मैंने अनुशासन समिति के अध्यक्ष श्री वाघेला से बात की थी। उन्होंने कहा कि वह दिल्ली में नहीं हैं और टीवी खबर को छोड़कर हमें भेजे जाने वाले किसी संभावित कारण बताओ नोटिस के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। अभी तक, उनके पास कुछ नहीं भेजा गया है।’’

उन्होंने कहा कि वाघेला ने ‘‘न्याय के प्राथमिक सिद्धांत के उल्लंघन’’ के मुद्दे को देखने का वायदा किया था।

यादव ने कहा कि उन्हें संवेदनशील सूचना मीडिया को देने के मुद्दे पर नोटिस भेजा गया। मजे की बात यह है कि उन्हें नोटिस भेजे जाने की यह सूचना खुद मीडिया से मिली।

उन्होंने कहा, ‘‘रात 10 बजे तक मीडिया को सभी चार पत्रों के कंटेंट के बारे में पहले ही जानकारी मिल चुकी थी। क्या समिति के किसी सदस्य को छोड़ कर किसी और ने इसे लीक किया?’’

यादव ने कहा, ‘‘रात आठ बजे तक मीडिया ने हमें बता दिया कि नोटिस अंतत: जारी कर दिया गया है और इसे किसी के मार्फत पहुंचाया जा रहा है। जब तक हमें यह पता नहीं चल गया कि प्रोफेसर आनंद कुमार को उनके घर पर नोटिस मिल गया है, तब तक हमने इसपर विश्वास नहीं किया। मुझे आश्चर्य है, मीडिया को हर चरण में कौन सूचित कर रहा है।’’

आप ने कल चार वरिष्ठ नेताओं – यादव, प्रशांत भूषण, आनंद कुमार और अजीत झा को कारण बताओ नोटिस भेजा जिन्हें पूर्व में पार्टी पदों से हटा दिया गया था।

यादव ने आशीष खेतान और पंकज गुप्ता सहित समिति के अन्य सदस्यों पर भी हमला बोला और पूछा ‘‘क्या कभी सुना है कि शिकायतकर्ता और गवाह खुद न्यायाधीश बन बैठे हों?’’

उन्होंने कहा, ‘‘समिति जिसने नोटिस भेजा है और जो मामले पर फैसला करेगी, उसमें श्री पंकज गुप्ता शामिल हैं जिन्होंने एक लिखित सार्वजनिक बयान पर दस्तखत किए थे जिसमें प्रशांत भूषण और मुझ पर पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाया गया था, आरोप की अब वह जांच करने जा रहे हैं।’’

यादव ने कहा, ‘‘समिति में आशीष खेतान भी शामिल हैं जिन्होंने पिछले महीने प्रशांत भूषण और उनके परिवार के खिलाफ आपमानजनक टिप्पणियां की थीं (जिसके लिए उन्हें माफी मांगनी पड़ी थी) और जो दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान प्रशांत भूषण की पार्टी विरोधी गतिविधियों के ‘साक्ष्य’ का महत्वपूर्ण स्रोत थे। उन्होंने टीवी पर हम दोनों को जी भर कर कोसा।’’

उन्होंने मांग की कि सदस्य उनके मामले के परीक्षण से दूर रहें और पार्टी कारण बताओ नोटिस की समीक्षा करे। ‘‘क्या समिति किसी और के परीक्षण के लिए बैठने से पहले खुद के लीक की जांच करेगी? या मजाक जारी रहेगा? या इसे मैं तमाशा कहूं?’’

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