नोएडा में श्रमिक के हिंसक प्रदर्शन के बाद औद्योगिक विकास प्राधिकरणों पर श्रमिकोन्मुख योजनाओं को लेकर चौतरफा दबाव बढ़ा है। नोएडा में शुरुआती चरण में बने श्रमिक कुंज समय के साथ जर्जर अवस्था में पहुंच गए हैं लेकिन दशकों से इस पर कोई काम नहीं हुआ।

अलबत्ता जेवर हवाई अड्डे के जरिए विकसित हो रही यमुना सिटी ने श्रमिक वर्ग के लिए आवासीय योजना को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है। यीडा अधिकारियों के मुताबिक, न्यू हाथरस, न्यू आगरा, हेरिटेज सिटी समेत अन्य विकसित होने वाले औद्योगिक शहरों में भी श्रमिकों के आवास समेत अन्य सुविधाओं को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है।

यमुना एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण अब तक तीन हजार से ज्यादा औद्योगिक भूखंडों को आवंटित कर चुकी है। करीब तीन दर्जन बड़े कारखानों ने उत्पादन भी शुरू कर दिया है। उत्पादन में निरंतरता रखने के लिए यमुना सिटी में करीब चार श्रमिक वर्ग के लिए भूखंड योजना तैयार की जा रही है। दो महीने के भीतर इस योजना को जारी करने की योजना है।

बताया गया है कि श्रमिक वर्ग की यीडा बोर्ड से मंजूर आवासीय योजना में भूखंड क्षेत्रफल को बढ़ा दिया गया है। यीडा एसीईओ एसके भाटिया ने बताया कि श्रमिक वर्ग के लिए रियायती दर पर भूखंड योजना में पात्रता तय करने के लिए आय प्रमाण पत्र को आधार माना जाएगा।

कारखानों में काम करने वाले श्रमिक, रेहड़ी पटरी और फेरी लगाने वाले भी यदि पात्रता पूरी करेंगे, तो वह भी आवेदन कर सकेंगे। बड़ी संख्या में उद्यमों के आने और चिकित्सा उपकरण पार्क, सेमीकंडक्टर विनिर्माण क्लस्टर, कपड़ा निर्यात क्षेत्र में कई हजार रोजगार उपलब्ध होंगे। इसी को ध्यान में रखते हुए श्रमिक वर्ग के लिए चार हजार छोटे आवासीय भूखंड योजना को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

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नोएडा में कपड़ा उद्योग के श्रमिकों के उग्र प्रदर्शन में किसी संगठित नेटवर्क की संभावित भूमिका होने का अंदेशा है। अधिकारियों ने मंगलवार को खुलासा किया कि पिछले दो दिनों में मैसेजिंग ऐप व्हाट्सऐप पर कई ग्रुप बनाए गए हैं और QR Code स्कैन करके इन्हें श्रमिकों को इनमें शामिल किया जा रहा है। यह भी पढ़ें…