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साहित्य से दूर होता जा रहा है जनमानस- यशपाल शर्मा

चंद्रावल व पगड़ी फिल्म का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि पिछले 50 वर्षों में इन फिल्मों के अलावा हरियाणा के इतिहास में कोई नई उपलब्धि नहीं हासिल हुई।

Author कुरुक्षेत्र | February 28, 2017 4:31 AM
फिल्म अभिनेता यशपाल शर्मा।

फिल्म अभिनेता यशपाल शर्मा ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी सपना चौधरी, रागिनी, बादशाह, हनी सिंह आदि को सुनना व देखना पसंद करती है, लेकिन वह हरियाणवी साहित्य से दूर होती जा रही है। चंद्रावल व पगड़ी फिल्म का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि पिछले 50 वर्षों में इन फिल्मों के अलावा हरियाणा के इतिहास में कोई नई उपलब्धि नहीं हासिल हुई। इसलिए अब आने वाले वर्षों में हमें हरियाणवी साहित्य के नई कीर्तिमान स्थापित करने होंगे। शर्मा सोमवार को यहां हरियाणा सृजन की ओर से आयोजित दो दिवसीय साहित्यिक कार्यक्रम में बोल रहे थे। हरियाणा सृजन उत्सव का आयोजन कुरुक्षेत्र की रोड धर्मशाला में किया गया। कार्यक्रम का आगाज सांस्कृतिक प्रस्तुति जननाट्य मंच कुरुक्षेत्र के होली पानीपती की नजम हुब्बे वतन कव्वाली से हुआ।

इसमें साहित्य जगत से प्रख्यात समीक्षक बजरंग बिहारी तिवारी, मीडिया चिंतक अनिल चमड़िया, एंडी हरियाणा के संपादक हरविंद्र मलिक, साहित्यकार ज्ञानप्रकाश विवेक, टेकचंद, वीएन राय, ब्रह्मदत्त शर्मा, फिल्म अभिनेता यशपाल शर्मा सहित कई बड़े लेखक व साहित्यकार शामिल हुए। कार्यक्रम में प्रख्यात समीक्षक बजरंग बिहारी तिवारी ने कवि व लेखक के लेखन से जुड़े पक्ष, सत्ताधारियों द्वारा लेखनी पर दबाव को लेकर चर्चा की। उन्होंने मध्यकाल की रचनाओं का जिक्र करते हुए बताया कि किस प्रकार उस समय भूख पर अनेकों कविताएं लिखी गर्इं। तमिलनाडु के दलित आंदोलन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि राजनीति के अंतर्गत विभिन्न मामले दबे रह जाते हैं। वहीं सत्ता हथियाना आसान है परंतु उसके ढांचे में तब्दीली नहीं आती।  इस मौके पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रोफेसर डॉ सुभाष द्वारा संपादित द्विमासिक पत्रिका देश हरियाणा के 11वें अंक का विमोचन किया गया। कार्यक्रम की रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए संयोजक डॉ. सुभाष ने कहा कि इस कार्यक्रम का मकसद हरियाणा की कला, साहित्य, संस्कृति से जुड़े लोगों को एक मंच पर एकत्रित करना है ताकि नए रचनाकारों को इससे प्रेरणा मिले और वे हरियाणा की सांस्कृतिक विकास में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।

उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के अथर्शास्त्र के प्रोफेसर टीआर कुंडू ने कहा कि हरियाणा में आर्थिक विकास के साथ-साथ सामाजिक विकास की ओर ध्यान देने की जरूरत है। इस दो दिवसीय उत्सव के माध्यम से हमेंं विचार करने का मौका मिलेगा कि हरियाणा के रचनाकारों की हरियाणा को बनाने में क्या भूमिका रही है। उन्होंने इस सफल आयोजन के लिए डॉ सुभाष को बधाई दी। मंच का संचालन रवींद्र गासो ने किया। इस दो दिवसीय उत्सव में हरियाणा के साथ-साथ देश के अन्य राज्यों से 1000 से अधिक रचनाकार व साहित्यकर्मी हिस्सा ले रहे हैं।

 

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