यमुना बाजार क्षेत्र स्थित यमुना नदी के 32 घाटों पर दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) द्वारा ‘ओ-जोन’ घोषित करते हुए खाली कराने के आदेश के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस आदेश से यहां रहने वाले पंडों, नाई, माली और नाविकों सहित लगभग 310 परिवारों पर विस्थापन की तलवार लटक गई है। स्थानीय लोग इस कार्रवाई का लगातार विरोध कर रहे हैं। शुक्रवार को प्रभावित परिवार जिला मजिस्ट्रेट से मिलने पहुंचे, लेकिन उनकी मुलाकात नहीं हो सकी। इसके बाद क्षेत्र में असंतोष और बढ़ गया है।
यमुना घाट पंडा एसोसिएशन के खजांची पंडित सुनील शर्मा ने बताया कि यह स्थल केवल आवासीय क्षेत्र नहीं, बल्कि सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं का केंद्र है। उनके अनुसार, वर्ष 1913 के ऐतिहासिक दस्तावेजों में वायसराय लार्ड हार्डिंग के अस्वस्थ होने पर यहां विशेष अनुष्ठान कराए जाने का उल्लेख मिलता है, जिसके बाद कुछ पंडा परिवारों को यहां बसाया गया था। उन्होंने बताया कि राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों से लोग यहां आकर रुद्राभिषेक, पिंडदान, पितृ तर्पण, छठ पूजा, यमुना अभिषेक, यज्ञोपवीत संस्कार और हवन जैसे धार्मिक कार्य कराते हैं। कई जातियों के लोग, जिनमें कश्यप, प्रजापति, बाल्मीकि और सुनार समुदाय शामिल हैं, विशेष रूप से अस्थि विसर्जन के लिए यमुना घाटों का उपयोग करते हैं।
वर्ष 1912 की हाउस टैक्स रसीदें और अन्य पुराने दस्तावेज मौजूद
पंडित शर्मा ने दावा किया कि यहां के कई परिवारों के पास वर्ष 1912 की हाउस टैक्स रसीदें और अन्य पुराने दस्तावेज मौजूद हैं, जो उनके लंबे समय से निवास को प्रमाणित करते हैं। उन्होंने कहा कि यदि पंडों को यहां से हटाया गया तो बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को धार्मिक कार्यों में भारी कठिनाई होगी। उन्होंने सरकार से अपील की है कि उन्हें हटाने से पहले वैकल्पिक समाधान पर विचार किया जाए।
ऐतिहासिक और धार्मिक महत्त्व
निगमबोध घाट का हिंदू मान्यताओं में विशेष महत्त्व बताया जाता है। मान्यता है कि यहां भगवान ब्रह्मा को खोए हुए वेदों का ज्ञान पुन: प्राप्त हुआ था। कहा जाता है कि यह क्षेत्र कई पीढ़ियों से धार्मिक कर्मकांडों का प्रमुख केंद्र रहा है। इतिहासकारों के अनुसार, यह घाट लालकिले के निकट स्थित है और 1857 के विद्रोह के दौरान भी इसका रणनीतिक महत्व रहा था। ब्रिटिश शासनकाल में वर्ष 1934 में कुछ पंडा परिवारों को यहां औपचारिक रूप से बसाया गया बताया जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार यदि बाढ़ प्रबंधन या स्वच्छता को लेकर चिंतित है तो वे सहयोग के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्हें विस्थापित करना उचित नहीं होगा। मामला अब प्रशासन और स्थानीय समुदाय के बीच तनाव का रूप लेता जा रहा है।
यह भी पढ़ें: ‘अंग्रेजों ने हमें बसाया था, कागज हमारे पास हैं’, यमुना के 32 घाटों पर रहने वाले 310 परिवारों को 15 दिन में घर खाली करने का नोटिस
यमुना बाजार इलाके में यमुना के 32 घाटों में रहने वाले लोगों को दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) द्वारा नोटिस जारी कर घर खाली करने के लिए कहा है। यमुना किनारे रहने वाले करीब 310 आवासों वाले आवासीय समूह को आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा 34 के तहत बेदखली नोटिस भेजा गया है। यहां रहने वाले लोगों को पंद्रह दिनों के भीतर अपने आवास खाली करने का निर्देश दिया गया है अगर लोगों ने आवास खाली नहीं किए तो ध्वस्तीकरण अभियान चलाया जाएगा। इस नोटिस का विरोध स्थानीय लोगों द्वारा किया जा रहा है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक।
