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हिंदू-मुस्लिम एकता की अद्भुत मिसाल, यहां मंदिर-मस्जिद का एक ही गेट

इस मस्जिद के इमाम ने बताया कि करीब 75 साल पहले कुछ हिंदू और मुस्लिम भाई प्यार मोहब्बत से इसी स्थल पर एक साथ बैठते थे। उन्होंने ही भाईचारे के लिए यहां एक ही परिसर में अगल-बगल मंदिर और मस्जिद बनाई। तब से यहां भाईचारा कायम है।

Author March 19, 2018 10:57 PM
उत्तर प्रदेश में कानपुर सेंट्रल स्टेशन से लगभग चार किलोमीटर की दूरी पर टाटमिल चौराहे है जहां पर एक ही परिसर में मंदिर है और मस्जिद भी।

उत्तर प्रदेश में जहां एक और आए दिन समाचार पत्रों के द्वारा सांप्रदायिक हिंसा की खबरें सुनने व पढ़ने को मिलती है तो वही उत्तर प्रदेश से कानपुर में एक ऐसी जगह है जहां आपसी भाईचारा देखने को मिलता है वह भी ऐसा जिसकी आपने कल्पना भी नहीं कि होगी। चाहे हिंदू हो या मुसलमान सभी के लिए एक समान है यह अद्भुत स्थान क्योंकि इस अद्भुत स्थान की खास बात या है की चाहे मंदिर हो या मस्जिद इस अद्भुत स्थान में एक अनोखी सदभावना देखने को मिलती है एक दूसरे के प्रति यहां ना तो कोई हिंदू है और ना ही कोई मुसलमान यहां सब से पहले अगर कोई है तो वह है इंसान। कानपुर की अद्भुत जगह भाईचारे की एक बहुत बड़ी मिसाल है आइए आप को बताते है कहां है उत्तर प्रदेश के कानपुर में वह अद्भुत स्थान।

उत्तर प्रदेश में कानपुर सेंट्रल स्टेशन से लगभग चार किलोमीटर की दूरी पर टाटमिल चौराहे है जहां पर एक ही परिसर में मंदिर है और मस्जिद भी। दोनों का दरवाजा भी एक है। यहां आरती और अजान एक-दूसरे के सहयोग से होती है। इसे हिंदू मुस्लिम एकता की अद्भुत मिसाल कहते हैं। हिंदू और मुस्लिम दोनों मिलकर यहां सफाई करने से लेकर पूजा, इबादत में एक- दूसरे का सहयोग करते हैं। जुमे में मंदिर तक के परिसर में नमाज अदा की जाती है तो भंडारे के लिए मस्जिद के परिसर का इस्तेमाल किया जाता है और पानी भी भरा जाता है। चाहे जुम्मे की नमाज हो यह मंदिर का भंडारा सब कुछ यहां पर मिल-जुलकर किया जाता है। टाटमिल चौराहे पर नयापुल से झकरकटी की तरफ एक ही परिसर में आगे की तरफ श्री शिव हनुमान मंदिर और उसके पीछे एक मीनार मस्जिद एवं मदरसा है।

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मस्जिद में जाने वाले भगवान के दर्शन करते हुए जाते आते हैं। इस मस्जिद के इमाम ने बताया कि करीब 75 साल पहले कुछ हिंदू और मुस्लिम भाई प्यार मोहब्बत से इसी स्थल पर एक साथ बैठते थे। उन्होंने ही भाईचारे के लिए यहां एक ही परिसर में अगल-बगल मंदिर और मस्जिद बनाई। तब से यहां भाईचारा कायम है। श्री शिव मंदिर के पुजारी ने बताया कि यहां हम मुस्लिम भाइयों के साथ मिलकर सफाई करते हैं। कभी कोई दिक्कत नहीं हुई। शिवरात्रि पर्व से लेकर देवी जागरण तक में मौलवी से लेकर यहां आने वाले सभी मुस्लिम भाई बढ़ चढ़ कर सहयोग करते हैं। बकौल पुजारी ईश्वर अल्ला एक ही नाम है। यहां बजरंगबली और अली, मौला और भोला अगल-बगल हैं।

कानपुर में रहने वाले रोशनलाल शर्मा ने बताया कि वह करीब 15 वर्षों से लगातार के अद्भुत स्थान के दर्शन करने आ रहे है वह कहते है कि जहां एक और जहां हम एक धर्म जाति के नाम पर आपस में लाडवाया जाता है तो वही इस स्थान पर भाईचारे की मिसाल देखने को मिलती है मुझे बहुत खुशी मिलती है इस स्थान पर आकर जहां अल्लाह भी है और महादेव भी है। कानपुर के रहने वाले शाहिद कहते है कि अल्लाह का शुक्र है जो वह कानपुर में रहते है उनका मानना है अगर देश वासियों को भाईचारा की मिसाल देखनी हो तो वह कानपुर के इस अद्भुत स्थान पर आकर भाईचारे की मिसाल को देख सकता है

कानपुर में रहने वाले इरफान, आसिफ, बंशीलाल व रूद्र पांडे का कहना है कि जहां एक और नेता हमें धर्म व जाति के नाम पर बांटते है और हमारे देश व प्रदेश की सदभावना को ठेस पहुंचाने का काम करते है वही भारत के उत्तर प्रदेश के कानपुर में यही ऐसा अद्भुत स्थान है जो भाईचारे की एक बहुत बड़ी मिसाल है या अद्भुत स्थान उन नेताओं को करारा जवाब देते है जो हमें जातीय धर्म के नाम पर लड़वाने का काम करते है कानपुर का क्या अद्भुत स्थान हमें भाईचारा बनाए रखने का आईना दिखाता है और यह अद्भुत स्थान हमें यह भी सीख देता है हम तो एक है जब हम में कोई फर्क ऊपर वाले ने नहीं किया तो वोट बैंक की राजनीति करने वाले यह नेता क्या हम अलग कर पाएंगे। क्योंकि हम एक है क्योंकि यहां महादेव भी है और अल्लाह भी है।

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