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दो अल्ट्रासाउंड से भी पता नहीं चला कि गर्भ में हैं दो बच्चे, डिलीवरी के बाद फिर लेबर पेन, दूसरे बच्चे की मौत

मीना ने 29 सितंबर और इस साल 17 जनवरी के दिन सोहना के गोयल अल्ट्रासाउंड सेंटर में अल्ट्रासोनोग्राफी कराई थी, दोनों ही बार उसे यही बताया गया था कि उसके गर्भ में एक ही बच्चा है। सोहना अस्पताल के डॉक्टर्स ने इन्हीं रिपोर्ट्स के आधार पर मीना की डिलीवरी की

इस तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

दिल्ली से सटे गुरुग्राम में एक बेहद ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक महिला को दो अल्ट्रासाउंड कराने के बाद भी यह नहीं पता चल सका कि उसके गर्भ में दो बच्चे हैं, जिसकी वजह से उसके दूसरे बच्चे की मौत हो गई। गुरुग्राम के सोहना जनरल हॉस्पिटल में 21 जनवरी के दिन मीना को एडमिट कराया गया। उस वक्त उसके पास दोनों अल्ट्रासाउंड्स की रिपोर्ट्स थीं, दोनों में ही गर्भ में दो बच्चे होने की बात नहीं कही गई थी। डॉक्टर्स ने इन्हीं रिपोर्ट्स के आधार पर डिलीवरी की। मीना ने पहले एक लड़की को जन्म दिया, लेकिन कुछ देर बाद पता चला कि मीना के गर्भ में दूसरा बच्चा भी है, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका।

मीना और उसके पति की 6 साल और 3 साल की दो बेटियां थीं। मीना ने पिछले साल तीसरी बार गर्भ धारण किया था। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक उसने 29 सितंबर और इस साल 17 जनवरी के दिन सोहना के गोयल अल्ट्रासाउंड सेंटर में अल्ट्रासोनोग्राफी कराई थी, दोनों ही बार उसे यही बताया गया था कि उसके गर्भ में एक ही बच्चा है। सोहना अस्पताल के डॉक्टर्स ने इन्हीं रिपोर्ट्स के आधार पर मीना की डिलीवरी की। मीना को डॉक्टर्स ने डिलीवरी की ड्यू डेट 6 मार्च 2018 दी थी, लेकिन उसे 21 जनवरी की रात 11 बजे ही अस्पताल में भर्ती कराना पड़ गया। मीना ने 11.10 बजे एक बच्ची को जन्म दिया, उसके बाद उसे फिर से दर्द होने लगा। कुछ समय बाद डॉक्टर्स के एहसास हुआ कि मीना के गर्भ में दूसरा बच्चा भी है। दूसरे बच्चे की डीलीवरी 11.30 बजे हो सकी, लेकिन बच्चे की हालत गंभीर थी।

सोहना अस्पताल के डॉक्टर्स ने 22 जनवरी रात दो बजे मीना के बच्चे की हालत को गंभीर देखते हुए उसे गुरुग्राम के मुख्य सरकारी अस्पताल रिफर कर दिया। वहीं मीना और उसके पति ने बताया कि अस्पताल ने उनसे यह कहा था कि दोनों में से किसी एक ही बच्चे को बचाया जा सकता है क्योंकि उनके पास केवल एक ही बच्चे के लिए पालना था। बाद में दोनों बच्चों को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रिफर कर दिया गया। मीना और उसके बच्चों को 22 जनवरी सुबह 5 बजे अस्पताल में एडमिट कराया गया। उसके दूसरे बच्चे को एनआईसीयू में ऑक्सीजन में रखा गया। 25 जनवरी को डॉक्टर्स ने मीना और उसके पति को बताया कि बच्चे को सांस लेने में दिक्कत आ रही है। उसी दिन दोपहर 3.30 बजे डॉक्टर्स ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया।

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक मीना ने बताया कि डॉक्टर्स ने उससे इस बात की शिकायत की कि उसने यह क्यों नहीं बताया कि उसके गर्भ में जुड़वा बच्चे हैं। मीना ने बताया, ‘डॉक्टर्स इस बात से काफी निराश हैं कि उन्हें यह नहीं पता था कि गर्भ में दो बच्चे हैं। लड़के को बचाया जा सकता था, लेकिन डिलीवरी में देरी होने के कारण हो सकता है कि उसने पेट के अंदर ही पानी पी लिया हो या फिर उसे ऑक्सीजन की कमी हो गई हो। मुझे नहीं पता था कि गर्भ में दो बच्चे हैं। मैंने किसी और की लापरवाही के कारण अपने बेटे को खो दिया।’

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